महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले कामकाजी जोड़ों के बीच इन दिनों एक अजीब सी उलझन तेजी से बढ़ रही है। घर में दोहरी कमाई (Dual Income) आ रही है, दोनों पार्टनर अच्छे पैकेज पर काम कर रहे हैं, फिर भी महीने के आखिरी हफ्ते में बैंक बैलेंस लगभग शून्य हो जाता है। क्रेडिट कार्ड के बिल देखकर पसीने छूटते हैं और समझ ही नहीं आता कि लाखों रुपये की संयुक्त आमदनी आखिर खर्च कहां हो गई। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ या हैदराबाद जैसे शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा कपल्स के लिए यह एक आम समस्या बन चुकी है। फाइनेंस विशेषज्ञों की मानें तो इसका कारण कम आमदनी नहीं, बल्कि वित्तीय तालमेल और बुनियादी बजटिंग का अभाव है।
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