ओडिशा में करीब 13 हजार जूनियर शिक्षकों ने नौकरी नियमित करने की मांग को लेकर गुरुवार, 17 सितंबर को राजधानी भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया। ओडिशा जूनियर टीचर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षक महात्मा गांधी मार्ग पर जुटे और सरकार से नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाने की मांग की। शिक्षकों ने संविदा आधारित नियुक्ति व्यवस्था खत्म कर उन्हें नियमित सरकारी सेवा में शामिल करने की मांग भी रखी।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वे राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद नौकरी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर उनके भविष्य और सेवा संबंधी अधिकारों पर पड़ रहा है।
नियमितीकरण को लेकर क्या है पूरा विवाद?
शिक्षकों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी की सरकार ने स्कीम आधारित जूनियर शिक्षकों के नियमितीकरण को मंजूरी दी थी। इसके बाद स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की थी।
इन शिक्षकों की नियुक्ति 2023-24 के दौरान हुई थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उन्हें नियुक्ति की मूल तारीख से नियमित सेवा का लाभ दिए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि अभी तक किसी भी स्कीम आधारित जूनियर शिक्षक का नियमितीकरण नहीं हो पाया है।
हाई कोर्ट की अंतरिम रोक से प्रक्रिया पर ब्रेक
नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मामला ओडिशा हाई कोर्ट पहुंच गया। अदालत ने 14 अप्रैल को सरकार के नियमितीकरण संबंधी फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस प्रक्रिया के लिए निर्धारित मानदंडों को स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि अदालत के निर्देश के कई महीने बीतने के बाद भी सरकार की ओर से आवश्यक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इसी वजह से नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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