उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की भुवाणा स्थित करोड़ों रुपए की जमीन को लेकर सुखेर थाने में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि आरोपियों ने ग्राम पंचायत भुवाणा के नाम से फर्जी पट्टे तैयार किए और इन्हें आधार बनाकर यूडीए के खिलाफ सिविल
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यूडीए के भू-अभिलेख निरीक्षक राजेश मेहता की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट के अनुसार मामला राजस्व ग्राम भुवाणा ग्राम पंचायत भुवाणा तहसील बड़गांव की आराजी संख्या 3055 से जुड़ा है। यूडीए का कहना है कि यह भूमि प्राधिकरण के स्वामित्व में है। पूर्व में तत्कालीन नगर विकास प्रन्यास ने निजी खातेदारों से विधिवत भूमि अर्जित कर मुआवजा दिया था और कब्जा लेने के बाद यहां योजना विकसित की। इसके बाद भूखंडों का सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से विक्रय किया गया।
शिकायत के अनुसार- आराजी संख्या 3055 कभी ग्राम पंचायत की संपत्ति नहीं रही और न ही इस भूमि पर पंचायत की कोई योजना थी। इसके बावजूद ब्राह्मणों का खेरवाड़ा निवासी दुर्गा शंकर, मोहन सिंह और भैरू सिंह ने कथित तौर पर पंचायत के नाम से भूखंडों के पट्टे तैयार कराए। इन पट्टों को बाद में यूडीए के खिलाफ उदयपुर की सिविल कोर्ट में स्थायी निषेधाज्ञा के वाद संख्या 96/2025 सीओ में पेश किया गया।
यूडीए ने इन आधार पर बताए फर्जी पट्टे
यूडीए ने इन पट्टों को फर्जी बताते हुए कई आधार सामने रखे हैं। शिकायत में कहा गया कि फरवरी 2002 के बताए जा रहे पट्टों में राजस्थान ग्राम पंचायत नियम 1963 का उल्लेख है, जबकि इन नियमों को निरस्त कर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 लागू हो चुके थे। यूडीए ने इसे कथित फर्जीवाड़े का महत्वपूर्ण आधार बताया है।
शिकायत के मुताबिक- वर्ष 2002 में पट्टे जारी करने के लिए राजस्थान पंचायती राज नियम-1996 के प्रावधानों के तहत पंचायत समिति बड़गांव से जारी पट्टा बुक का इस्तेमाल होना चाहिए था। आरोप है कि संबंधित पट्टे उस पट्टा बुक से जारी नहीं हुए और ग्राम पंचायत भुवाणा, पंचायत समिति बड़गांव तथा पंचायत के पट्टा रजिस्टर में भी इनकी कोई प्रति या संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सन 2002 में पंचायत में कंप्यूटर नहीं था, जबकि उक्त प्रस्तुत पत्रावली में नोटशीट कंप्यूटर द्वारा प्रिंट की गई है। उक्त पत्रावली में सरपंच व सचिव के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। साल 2002 में कौन सरपंच था और कौन सचिव था, इसका भी जांच हो।
प्रावधानाें के विपरीत बताया
वर्तमान पंचायत सचिव ने भी यूडीए को लिखित रूप से बताया- इस संबंध में पंचायत में कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं है और आराजी संख्या 3055 पंचायत की संपत्ति नहीं है।
यूडीए की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तीनों व्यक्ति भुवाणा के निवासी नहीं हैं, बल्कि ब्राह्मणों का खेरवाड़ा के रहने वाले हैं। शिकायत के अनुसार- उन्होंने पंचायत में भूखंडों के लिए आवेदन नहीं किया था। न ही संबंधित मामलों में कोई पत्रावली, मौका रिपोर्ट, कोरम प्रस्ताव या सार्वजनिक नीलामी से जुड़ा रिकॉर्ड मिला। यूडीए ने इसे राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के प्रावधानों के विपरीत बताया है।
शिकायत में पुलिस से कथित कूटरचित पट्टे और पत्रावली बरामद करने, आरोपियों को गिरफ्तार करने तथा मामले में किसी गिरोह की संलिप्तता होने पर उसकी भी जांच करने की मांग की गई है।