प्रथम अध्याय: हे श्रद्धालुओ! आज मैं आपको उस दिव्य और प्राचीन शिवलिंग की कथा सुनाता हूँ, जो सूर्यपुत्री माँ ताप्ती की गोद में विराजमान है। दक्षिण के द्वार कहे जाने वाले बुरहानपुर नगर में, पावन राजघाट के तट पर भगवान शिव का एक अति प्राचीन रूप विद्यमान है। यह शिवलिंग लगभग 900 वर्ष है, जो अपनी प्राकृतिक भव्यता के साथ आज भी अडिग है। संगेखारा नामक गहरे काले पाषाण से निर्मित यह अखंड शिवलिंग अपनी सुदृढ़ता के कारण सदियों से नदी के प्रचंड वेग को सहते हुए भी सुरक्षित है। प्राचीन काल में, जब यहाँ सनातन धर्म की परंपराएँ चरम पर थीं, तब श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक इस दुर्लभ शिवलिंग का पूजन किया करते थे।
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