August 22, 2026
भाजपा अब खोखा नहीं तो क्या? - Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar
मैंने जनसंघ, भाजपा को बढ़ते-बनते देखा है। लोकसभा की दो सीट (1984) व 7.7 प्रतिशत वोटों से 282 सीटें (2014) तथा 31.3 प्रतिशत वोट प्राप्ति का विकास भी देखा। 1984 से 2014 के इन तीस वर्षों में भाजपा-संघ की तब पूंजी थी चाल, चेहरा और चरित्र। और इसी के क्रम में 2014 में नरेंद्र मोदी ने एकछत्र सत्ता पाई। वह सब अब उस खोखे में कनवर्ट है, जिसका न कोई धर्म है, न ईमान और न चरित्र। इन बारह वर्षों में अमित शाह से मौजूदा नितिन नवीन की अध्यक्षता की भाजपा भारत की राजनीति का वह खोखा बन चुकी है, जो गुजराती-मारवाड़ी धनपशुओं की कॉर्पोरेट शेल (खोखा) कंपनियों की धंधेबाजी का मात्र एक मॉडल है।
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