August 22, 2026

छोटा ड्रोन, बड़ी ताकत! ‘अलख’ से नहीं बच पाएगा दुश्मन, GPS के बिना भी पूरा करेगा मिशन

अलख माइक्रो ड्रोन GPS के बिना भी नेविगेट कर सकता है। लाइव FPV, सर्विलांस, ISR और मिशन-विशिष्ट स्ट्राइक क्षमता से लैस यह ड्रोन काउंटर-टेरर ऑपरेशन और कठिन इलाकों में सुरक्षा बलों के लिए अहम साबित हो सकता है।

भारतीय रक्षा क्षेत्र में छोटे लेकिन बेहद सक्षम ड्रोन तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी दिशा में IIT कानपुर के स्टार्टअप EndureAir Systems का विकसित किया गया अलख माइक्रो/नैनो UAV अब निगरानी से आगे बढ़कर ऐसे मिशनों के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जिनमें दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के साथ मिशन मुताबिक स्ट्राइक की क्षमता जरूरी होती है। IIT कानपुर और EndureAir के सहयोग से विकसित अलख ड्रोन सर्विलांस, काउंटर-इंसर्जेंसी, काउंटर टेररिज्म, मिशन विशिष्ट स्ट्राइक कॉन्फिगरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

छोटा आकार, बड़े काम की क्षमता

अलख की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद कॉम्पैक्ट आकार है। कंपनी के अनुसार इसका नया माइक्रो FPV संस्करण तंग और कठिन इलाकों में भी तेजी से तैनात किया जा सकता है। इसे बैकपैक में ले जाकर जरूरत पड़ने पर तुरंत उड़ाया जा सकता है। कंपनी की मौजूदा जानकारी के मुताबिक यह करीब 2 फीट × 2 फीट जैसे छोटे खुले स्थान से भी ऑपरेट कर सकता है और इसका उपयोग क्लोज-रेंज सर्विलांस, टारगेट ऑब्जर्वेशन तथा कठिन इलाकों में इंटेलिजेंस जुटाने के लिए किया जा सकता है।

अलख का इस्तेमाल पहले भी आपदा राहत और बचाव अभियानों में किया जा चुका है। IIT कानपुर के दस्तावेजों के मुताबिक उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान में इस ड्रोन ने सुरंग के अंदर की स्थिति और कैविटी का निरीक्षण करने में भूमिका निभाई थी। यानी इसका विकास केवल सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं रहा है।

GPS के बिना भी नेविगेशन

आधुनिक युद्ध में दुश्मन के लिए केवल हथियारों से हमला करना ही पर्याप्त नहीं है। GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम को बाधित करना भी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का अहम हिस्सा है। ऐसे माहौल में GPS-denied यानी GPS उपलब्ध न होने वाली परिस्थितियों में काम करने की क्षमता किसी छोटे UAV को काफी उपयोगी बना सकती है।

EndureAir के अनुसार अलख को GPS-denied वातावरण में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। कंपनी ने इसके नए संस्करण को एंटी-जैमिंग समर्थित ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण वातावरण में संचार की विश्वसनीयता के लिए भी विकसित किए जाने की जानकारी दी है।

पुराने अलख संस्करण से जुड़े तकनीकी विवरणों में संचार प्रणाली के जरिए सात दीवारों तक सिग्नल पहुंचने और करीब 4 किलोमीटर तक संचार की क्षमता का उल्लेख भी मिलता है। हालांकि अलग-अलग संस्करणों की क्षमताएं अलग हो सकती हैं, इसलिए इन आंकड़ों को पूरे अलख परिवार की स्थायी क्षमता नहीं माना जाना चाहिए।

अब निगरानी के साथ मिशन-विशिष्ट स्ट्राइक

अलख के विकास में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसकी भूमिका का विस्तार है। कंपनी ने हाल में ALAKH 10-इंछ प्लेटफॉर्म के लिए सर्विलांस और ISR के अलावा CI/CT मिशन तथा मिशन मुताबिक स्ट्राइक यानी कामिकेज कॉन्फिगरेशन की क्षमता का उल्लेख किया है। इसका अर्थ है कि मिशन की जरूरत के अनुसार प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भूमिका के लिए कॉन्फिगर किया जा सकता है।

लाइव FPV से सैनिक देख सकेंगे पूरा इलाका

अलख की एक और अहम क्षमता Live FPV- First Person View है। इसके जरिए ऑपरेटर ड्रोन के कैमरे से मिलने वाली लाइव वीडियो फीड के माध्यम से उस इलाके को वास्तविक समय में देख सकता है जहां ड्रोन उड़ रहा है।

इसका फायदा यह है कि किसी संदिग्ध स्थान की केवल पहले से उपलब्ध तस्वीर पर निर्भर रहने के बजाय ऑपरेटर मौके की मौजूदा स्थिति देख सकता है। कंपनी के अनुसार अलख दिन-रात निगरानी के लिए EO/IR सेंसर और लाइव FPV स्ट्रीमिंग जैसी क्षमताओं को सपोर्ट करता है।

युद्ध या काउंटर-टेरर ऑपरेशन में यह क्षमता खास तौर पर उपयोगी हो सकती है। उदाहरण के लिए, किसी संदेहास्पद इमारत, सुरंग, कमरे या दुर्गम इलाके की स्थिति का आकलन ड्रोन के जरिए पहले किया जा सकता है। इससे सैनिकों को सीधे जोखिम वाले क्षेत्र में भेजने से पहले बेहतर स्थिति के अनुसार जागरूकता मिलती है।

स्वॉर्म ऑपरेशन की दिशा में भी क्षमता

ड्रोन युद्ध का अगला महत्वपूर्ण चरण स्वार्म टेक्नोलॉजी माना जा रहा है। इसमें एक साथ कई ड्रोन किसी मिशन में समन्वय के साथ काम कर सकते हैं। EndureAir ने अलख को स्वार्म एप्लीकेशन से जोड़ते हुए ऐसी तकनीक पर काम करने की जानकारी दी है। कंपनी के CEO ने भी बताया है कि स्वार्म टेक्नोलॉजी का उद्देश्य कई ड्रोन के बीच सहयोग बढ़ाना, बड़े क्षेत्र को कवर करना और कम ऑपरेटरों के जरिए ज्यादा UAV को नियंत्रित करना है।