मीराबाई चानू ने ग्लासगो में गोल्ड जीतने के बाद आंसू बहाए, लेकिन ये पेरिस 2024 वाले टूटे हुए आंसू नहीं थे. वहां वह सिर्फ एक किलो से चौथे स्थान पर रह गई थीं. वह अपने पीरियड के तीसरे दिन थीं और रिपोर्टरों से कहा था, 'ये मेरी किस्मत में नहीं था.' ग्लासगो में कहानी अलग थी. यहां आंसू खुशी के थे. ओलंपिक सिल्वर, अब तीन कॉमनवेल्थ खिताब, चोट के बाद वापसी और अलग-अलग वेट कैटेगरी में शरीर को फिर से ढालने की मेहनत, सब कुछ एक ही पोडियम पर जाकर मिला. यही वह शहर भी है जहां मीराबाई चानू ने 2014 में किशोरी रहते हुए सिल्वर के साथ पहला बड़ा पोडियम हासिल किया था.
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