September 10, 2026

दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा-PG व्यवस्था पर फैसला: LG तरनजीत सिंह संधू ने 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को दी मंजूरी - Haribhoomi

Delhi Student Housing Safety: दिल्ली में सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद देश-विदेश से आने वाले छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने पर्याप्त आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को मंजूरी दे दी है।

Delhi Student Housing Safety

LG तरनजीत सिंह संधू ने छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास के उद्देश्य से 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को दी मंजूरी।

  • Published: 10 Sep 2026, 04:01 PM IST
  • Last Updated: 10 Sep 2026, 04:02 PM IST

Delhi Student Housing Safety: राजधानी दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए देश-विदेश से आने वाले छात्रों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 18 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन को मंजूरी दे दी है। यह समिति दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में काम करेगी।

यह फैसला हाल ही में सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद लिया गया है। इस हादसे ने छात्र आवासों में सुरक्षा मानकों, भीड़भाड़ और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

उपराज्यपाल की बैठक में बनी थी रणनीति

हाई-पावर कमेटी का गठन 7 सितंबर को उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर किया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी मौजूद थे।

बैठक में छात्रों के लिए पीजी से जुड़े मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा, विश्वविद्यालयों, एमसीडी और डीडीए के माध्यम से वैकल्पिक छात्र आवास विकसित करने और खाली पड़ी सरकारी इमारतों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए थे। 

आवास की मांग और उपलब्धता का होगा आकलन

समिति का प्रमुख काम दिल्ली में छात्र आवास की मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर का आकलन करना होगा। इसके अलावा विश्वविद्यालयों, नगर निगम, डीडीए और अन्य सरकारी एजेंसियों के सहयोग से नए हॉस्टल विकसित करने और मौजूदा सुविधाओं का विस्तार करने की संभावनाएं भी तलाश की जाएंगी।

समिति डीडीए की खाली या कम इस्तेमाल हो रही संपत्तियों और अन्य सरकारी भवनों को छात्रों के लिए आवास के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावनाओं की भी जांच करेगी। अतिरिक्त हॉस्टल और छात्र निवास विकसित करने के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन और इमारतों की पहचान भी की जाएगी।

छात्र आवासों का बनेगा केंद्रीय डेटाबेस

हाई-पावर कमेटी दिल्ली के सभी संस्थागत हॉस्टलों और कानूनी रूप से पंजीकृत पीजी आवासों का केंद्रीय डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी काम करेगी। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और नियमन के दायरे में आने वाली हॉस्टल सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

इसके साथ ही छात्रों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए छात्र असुरक्षित आवास, अत्यधिक भीड़भाड़, आग के खतरे और अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं की शिकायत समयबद्ध तरीके से दर्ज करा सकेंगे।

फायर सेफ्टी और मॉक ड्रिल पर भी जोर

समिति छात्र आवासों के लिए मानक आपातकालीन निकासी और आपदा प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तैयार करेगी। हॉस्टल वॉर्डन, विश्वविद्यालय अधिकारियों, पीजी संचालकों और छात्रों के लिए समय-समय पर फायर और डिजास्टर मॉक ड्रिल तथा सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है।

समिति में वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल

18 सदस्यीय समिति में दिल्ली सरकार और विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद इसके अध्यक्ष होंगे। समिति में मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, एनडीएमसी अध्यक्ष, एमसीडी आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष समेत गृह, राजस्व, स्वास्थ्य, शहरी विकास, कानून और पीडब्ल्यूडी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।  

मुख्य अग्निशमन अधिकारी और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के अलावा अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी समिति का सदस्य बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर समिति किसी अन्य विभाग, एजेंसी, तकनीकी विशेषज्ञ या संस्थागत प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल कर सकेगी।

60 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट

नवगठित हाई-पावर कमेटी को अपने गठन की तारीख से 60 दिनों के भीतर ठोस सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। प्रशासन को उम्मीद है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और मानकीकृत आवास की व्यवस्था मजबूत होगी और भविष्य में सत्य निकेतन जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।