September 10, 2026

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की सरकार से 5 बड़ी मांगें; पुरानी पेंशन (OPS) बहाली पर सबसे ज्यादा जोर, फिटमेंट फैक्टर 3.68 करने की आवाज तेज

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की सरकार से 5 बड़ी मांगें; पुरानी पेंशन (OPS) बहाली पर सबसे ज्यादा जोर, फिटमेंट फैक्टर 3.68 करने की आवाज तेज

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए वेतन संशोधन का समय नजदीक आने के साथ ही कर्मचारी यूनियनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना तेज कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से केंद्र सरकार हर 10 साल में नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करती आई है। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुई थीं, जिसके अनुसार 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की समय-सीमा 1 जनवरी 2026 से प्रस्तावित मानी जा रही है।

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF), रेलवे कर्मचारी संगठन (AIRF) और नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) समेत देश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए 5 सूत्रीय मांगों का मसौदा तैयार किया है, जिसमें रिटायरमेंट सुरक्षा और वेतन वृद्धि सबसे आगे है।

कर्मचारियों की 5 सबसे बड़ी मांगें: जानिए क्या है पूरा एजेंडा

कर्मचारी संगठनों ने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई दर और बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार के समक्ष ये पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • 1. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली:

    कर्मचारियों की सबसे प्राथमिक और गैर-समझौतावादी मांग 'ओल्ड पेंशन स्कीम' (OPS) को बिना किसी शर्त के दोबारा लागू करना है। संगठनों का कहना है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की वह गारंटी नहीं देते जो पुरानी व्यवस्था में 50% निश्चित पेंशन, डीए रिविजन और शून्य कर्मचारी अंशदान के साथ मिलती थी।

  • 2. फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.68 गुना करना:

    7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुआ था। 8वें वेतन आयोग के लिए यूनियनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 3.0 से 3.68 गुना किया जाए। यदि सरकार 3.68 फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से सीधे बढ़कर ₹34,560 प्रति माह के पार पहुंच जाएगा।

  • 3. 18 महीने के फ्रीज किए गए DA/DR एरियर का एकमुश्त भुगतान:

    कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक के 18 महीनों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को रोक लिया था। कर्मचारी संघों की मांग है कि सरकार अब उस रोके गए बकाए (Frozen DA Arrears) को ब्याज सहित एकमुश्त जारी करे, क्योंकि कर्मचारी महामारी के दौरान अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे थे।

  • 4. पेंशनर्स के लिए एडिशनल पेंशन और कम्यूटेशन अवधि घटाना:

    वर्तमान में केंद्रीय पेंशनर्स को 80 वर्ष की उम्र पूरी करने पर 20% अतिरिक्त पेंशन दी जाती है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए अतिरिक्त पेंशन की यह शुरुआत 65, 70 और 75 वर्ष की आयु से ही चरणबद्ध तरीके से (जैसे 5%, 10%, 15%) शुरू की जाए। साथ ही, पेंशन कम्यूटेशन (Commutation Recovery) की अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग भी शामिल है।

  • 5. सीजीएचएस (CGHS) और कैशलेस मेडिकल सुविधाओं का विस्तार:

    केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को दूर करने की मांग उठाई गई है। कर्मचारी चाहते हैं कि देश के सभी प्रमुख निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा को अनिवार्य बनाया जाए, सीजीएचएस पैकेज दरों को बाजार दरों के अनुरूप संशोधित किया जाए और टियर-2 व टियर-3 शहरों में अधिक वेलनेस सेंटर खोले जाएं ताकि रिटायरमेंट के बाद अपने गृह जिलों में रहने वाले बुजुर्ग पेंशनर्स को इलाज के लिए भटकना न पड़े।

वेतन आयोग के 10 साल के अंतराल पर भी सवाल: क्या बनेगा नया आयोग?

आमतौर पर वेतन आयोगों की सिफारिशें लागू होने में आयोग के गठन से लेकर अंतिम गजट नोटिफिकेशन जारी होने तक 1.5 से 2 साल का समय लगता है। कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि यदि सरकार को 8वें वेतन आयोग का लाभ समय पर देना है, तो आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम के साथ टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की घोषणा में अब और देरी नहीं की जानी चाहिए।

यूनियनों ने यह भी सुझाव दिया है कि अब 10 साल के लंबे इंतजार के पारंपरिक ढांचे को समाप्त किया जाना चाहिए और 'एक्रीड फॉर्मूले' (Ayndkroyd Formula) के आधार पर वेतन की समीक्षा हर 5 साल में या जब भी महंगाई भत्ता (DA) 50% को पार करे, स्वतः ही की जानी चाहिए। यदि सरकार जल्द ही इस पर औपचारिक वार्ता शुरू नहीं करती है, तो कर्मचारी संगठन आगामी महीनों में देशव्यापी प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करने की चेतावनी दे रहे हैं।