Sep 10, 2026 04:04 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने और आर्टिकल 370 के तहत उसका स्पेशल स्टेटस खत्म करने के बाद लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।

केंद्र सरकार आर्टिकल-371 के तहत सुई-जेनेरिस मॉडल पर यह सुविधा लद्दाख को देने की योजना बना रही है।
लद्दाख को स्पेशल स्टेटस मिलने की संभावना दिखने लगी है, जिसकी मांग यह सीमावर्ती केंद्र शासित प्रदेश बीते चार वर्षों से कर रहा है। केंद्र सरकार लद्दाख को आर्टिकल 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने पर सहमत हो गई है। इसके तहत प्रशासन के लिए एक चुनी हुई संस्था भी होगी, जो सुई-जेनेरिस (sui-generis) मॉडल पर आधारित होगी। आपको बता दें कि भारत में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है।
अंग्रेजी समाचार चैनल एनडीटीवी को दिए एक खास इंटरव्यू में लद्दाख के चीफ सेक्रेटरी आशीष कुंद्रा ने कहा कि संसद आर्टिकल 371 में संशोधन करके लद्दाख को पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा देगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा और एक चुनी हुई संस्था देने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। आपको बता दें कि भारत के संविधान का आर्टिकल 371 कुछ राज्यों को उनकी खास क्षेत्रीय और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्थायी, अंतरिम और विशेष शक्तियां देता है।
कुंद्रा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "हम एक अनोखे मॉडल पर काम कर रहे हैं। यह प्रशासन का सुई-जेनेरिस मॉडल है। लद्दाख में एक चुनी हुई संस्था होगी, लेकिन यह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश या राज्य नहीं होगा।" आपको बता दें कि कुंद्रा उस केंद्रीय टीम का हिस्सा हैं जो लद्दाख के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है। मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच दिल्ली में बातचीत हुई।
क्या होता है सुई-जेनेरिस मॉडल?
सुई-जेनेरिस मॉडल एक खास स्थिति के प्रशासन के लिए बनाया गया एक कानूनी व्यवस्था है। लैटिन शब्द सुई-जेनेरिस का अर्थ है अपनी तरह का या अनोखा।
केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने और आर्टिकल 370 के तहत उसका स्पेशल स्टेटस खत्म करने के बाद लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। लद्दाख के लोगों ने केंद्र के फैसले का स्वागत किया, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरशाही के शासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। वे राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
पिछले साल लेह में सुरक्षा बलों के साथ झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। हिंसा के बाद एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक समेत दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सरकार का कहना है कि उसने गिरफ्तार किए गए ज्यादातर लोगों के खिलाफ मामले वापस ले लिए हैं। कुंद्रा के मुताबिक, जिन मामलों में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है उन पर लद्दाख के उपराज्यपाल जल्द ही कोई फैसला लेंगे।