October 8, 2026

तेजस्वी-मीसा-मुकेश को पुलिस ने उठाया, पटना में विपक्ष का बवाल

पटना में विपक्ष का बवाल: तेजस्वी-मीसा-मुकेश को लोकभवन ले गई पुलिस, SDPO की गाड़ी के ऊपर चढ़े कार्यकर्ताUpdated: Thu, 8 Oct 2026 11:18 AM (IST) तेजस्वी यादव को ले जाती पुलिस Read more

October 8, 2026

Nana Patekar Last Wish: क्या थी नाना पाटेकर की आखिरी ख्वाहिश? 3 साल पहले ही किया था खुलासा

Nana Patekar Last Wish: नाना पाटेकर के निधन के बाद 2023 का पुराना इंटरव्यू चर्चा में है। उन्होंने मौत, जिंदगी, परिवार और अंतिम संस्कार को लेकर बेबाक अंदाज में अपनी सोच बताई थी। साथ ही अपनी आखिरी ख्वाहिश का भी जिक्र किया था।Nana Patekar Death: बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते थे। नाना पाटेकर के दुनिया को अलविदा कहने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि उनकी आखिरी ख्वाहिश क्या थी। आइए जानते हैं। Read more

October 8, 2026

Nana Patekar Legacy: संघर्ष से रंगमंच और सिनेमा तक, ऐसे बदली नाना पाटेकर ने अभिनय की परिभाषा

भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं बनती, बल्कि उनकी पूरी अभिनय शैली एक अलग स्कूल की तरह नजर आती है। नाना पाटेकर भी ऐसे ही कलाकार थे। 75 साल की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद उनके निधन की खबर ने हिंदी और मराठी सिनेमा को गहरा झटका दिया। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने थिएटर, गंभीर सिनेमा, मुख्यधारा की फिल्मों और निर्देशन तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को पारंपरिक हीरो की छवि तक सीमित नहीं किया। कभी खलनायक, कभी विद्रोही युवक, कभी पुलिस अधिकारी, कभी सैनिक तो कभी कॉमेडी किरदार—नाना ने हर भूमिका में अपनी अलग छाप छोड़ी। संघर्ष से शुरू हुआ था नाना का सफर नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। शुरुआती जीवन आर्थिक मुश्किलों से भरा रहा। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से पढ़ाई की और संघर्ष के दौर में अपने परिवार की मदद के लिए पोस्टर पेंटिंग जैसे काम भी किए। उनके जीवन के शुरुआती अनुभवों ने उन्हें आम आदमी की परेशानियों और सामाजिक असमानता को करीब से समझने का मौका दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनके कई किरदारों में दिखाई दिए। इसके बाद उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में काम किया, लेकिन जल्द ही रंगमंच की ओर उनका झुकाव बढ़ गया। थिएटर ने उन्हें अभिनय का वह अनुशासन दिया, जिसने बाद में उनके फिल्मी करियर की नींव मजबूत की। मराठी रंगमंच बना अभिनय की असली पाठशाला फिल्मों में पहचान बनाने से पहले नाना पाटेकर ने मराठी थिएटर में लंबा समय बिताया। रंगमंच पर काम करने के दौरान उन्होंने संवाद, आवाज, बॉडी लैंग्वेज और मौन के इस्तेमाल को बेहद बारीकी से साधा। उनकी अभिनय शैली में संवाद बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण कई बार संवाद के बीच का ठहराव दिखाई देता था। छोटे-छोटे वाक्यों, अचानक रुकने और आवाज के उतार-चढ़ाव के जरिए वह किरदार के भीतर चल रहे तनाव को सामने लाते थे। यही थिएटर की ट्रेनिंग बाद में कैमरे के सामने उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। ‘गमन’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर नाना पाटेकर ने 1978 में ‘गमन’ से फिल्मी सफर की शुरुआत की। इसके बाद वह धीरे-धीरे समानांतर और गंभीर सिनेमा में अपनी जगह बनाते गए। ‘अंकुश’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जो सिर्फ संवाद बोलने के बजाय किरदार को भीतर तक जीने की कोशिश करता था। ‘सलाम बॉम्बे!’ में उनके काम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा। ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ ने बदली पहचान विदु विनोद चोपड़ा की ‘परिंदा’ में नाना ने अंडरवर्ल्ड डॉन का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप नारायण तिलक का किरदार उनके करियर के सबसे चर्चित प्रदर्शनों में शामिल हुआ। फिल्म में उनके तीखे संवाद और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर आधारित अभिनय ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बेहद लोकप्रिय बनाया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। ‘खामोशी’ में आवाज के बिना किया कमाल नाना की अभिनय क्षमता का एक अलग उदाहरण ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में देखने को मिला। यहां उन्हें ऐसा किरदार निभाना था जिसमें संवादों की भूमिका बेहद सीमित थी। जिस अभिनेता की पहचान दमदार आवाज और तीखी संवाद अदायगी से बनी थी, उसने चेहरे के भाव, आंखों और बॉडी लैंग्वेज के जरिए भावनाओं को व्यक्त किया। यह भूमिका उनके अभिनय के दूसरे पक्ष को सामने लेकर आई। गंभीर किरदारों से ‘वेलकम’ तक नाना पाटेकर ने खुद को सिर्फ गंभीर फिल्मों तक सीमित नहीं रखा। ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उन्होंने गंभीर और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं, तो दूसरी तरफ ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ में उदय शेट्टी के किरदार से उन्होंने कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खासियत यह थी कि शैली बदलने के बावजूद उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कमजोर नहीं हुई। यही वजह रही कि अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों ने उनके काम को पसंद किया। ‘प्रहार’ से निर्देशन तक का सफर नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता नहीं थे। उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया। ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली। फिल्म में सैनिकों के जीवन और प्रशिक्षण को ज्यादा यथार्थवादी अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई थी। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नाना के लिए सिनेमा केवल अभिनय तक सीमित नहीं था। मराठी सिनेमा में ‘नटसम्राट’ का यादगार अध्याय मराठी सिनेमा में ‘नटसम्राट’ उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। वी. वा. शिरवाडकर के प्रसिद्ध नाटक पर आधारित इस फिल्म में नाना ने गणपतराव ‘अप्पासाहेब’ बेलवलकर का किरदार निभाया। एक उम्रदराज रंगमंच अभिनेता के जीवन, परिवार, अकेलेपन और टूटते आत्मविश्वास को उन्होंने बेहद भावनात्मक अंदाज में पर्दे पर उतारा। यह भूमिका उनके थिएटर और सिनेमा के अनुभवों के संगम के रूप में भी देखी गई। अभिनय के साथ सामाजिक सरोकार भी रहे अहम नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। महाराष्ट्र में किसानों और ग्रामीण परिवारों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सामाजिक काम भी किया। 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ NAAM Foundation की शुरुआत की। संस्था का फोकस सूखे से प्रभावित किसानों, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों पर रहा। संस्था के अनुसार इसकी शुरुआत महाराष्ट्र में किसानों की परेशानियों और बढ़ती आत्महत्याओं के बीच हुई थी। पुरस्कारों से भी मिली पहचान नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले। उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। गंभीर सिनेमा से लेकर व्यावसायिक फिल्मों तक उनके योगदान ने उन्हें हिंदी और मराठी दोनों फिल्म इंडस्ट्री में अलग स्थान दिलाया। नाना पाटेकर की विरासत क्या होगी? नाना पाटेकर की विरासत किसी एक फिल्म, एक संवाद या एक किरदार तक सीमित नहीं है। उनकी सबसे बड़ी पहचान शायद यह रही कि उन्होंने साबित किया कि अभिनेता को प्रभावशाली बनने के लिए पारंपरिक स्टारडम या ग्लैमरस छवि की जरूरत नहीं होती। रंगमंच से मिली कठोर ट्रेनिंग, जीवन के संघर्षों से निकली संवेदनशीलता और किरदार को पूरी तीव्रता से निभाने की क्षमता ने उनकी अपनी अभिनय भाषा तैयार की। यही वजह है कि ‘परिंदा’ के अन्ना से लेकर ‘क्रांतिवीर’ के प्रताप नारायण तिलक, ‘नटसम्राट’ के अप्पासाहेब और ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी तक उनके किरदार आज भी अलग-अलग वजहों से याद किए जाते हैं। नाना पाटेकर का निधन एक कलाकार की जिंदगी का अंत जरूर है, लेकिन उनके निभाए किरदार, संवाद और अभिनय की शैली भारतीय सिनेमा के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा का हिस्सा बने रहेंगे। Read more

October 8, 2026

Nana Patekar MLC Case: क्या होता है मेडिको-लीगल केस? जानिए नाना पाटेकर की मौत के बाद क्यों दर्ज हुआ?

Nana Patekar Death Medico-Legal Case: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है। जानिए ये क्या होता है, इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?Medico Legal Case Meaning: सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में गुरुवार सुबह गोवा में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उन्हें उनके डोना पाउला (Dona Paula) स्थित घर पर अचेत हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें मणिपाल हॉस्पिटल (Manipal Hospital) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक्टर के निधन के बाद मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर ने बताया कि मामले में 'मेडिको-लीगल केस' (MLC) दर्ज किया गया है और नियमानुसार पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा कि ये मेडिको-लीगल केस यानी MLC क्या होता है? किसी की मौत के बाद ये केस कब दर्ज किया जाता है? और नाना पाटेकर के मामले में इसकी जरूरत क्यों पड़ी? आइए समझते हैं... Read more

October 7, 2026

'वो मार्च रोक सकते हैं, हमारी इच्छाशक्ति नहीं', 8 अक्टूबर को कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन का एलान - live rahul gandhi protest opposition leaders jantar mantar delhi police cec gyanesh kumar

Published: Wed, 07 Oct 2026 04:50 PM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 11:43 PM (IST) INDI गठबंधन के सांसद कांग्रेस के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोट चोरी के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। Read more

October 7, 2026

'कॉकरोच जनता पार्टी' के साथ मैदान में उतरे प्रकाश राज, लोगों से भी की अपील

एक्टर प्रकाश राज ने कर्नाटक में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने नागरिकों से गुरुवार, 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़ी संख्या में जुटने की अपील की और इस प्रशासनिक प्रक्रिया को सीधे तौर पर 'लोकतंत्र और संविधान को खत्म करने की कोशिश' बताया. Read more

October 7, 2026

CM योगी के बयान से चढ़ा यूपी का सियासी पारा, अखिलेश के बाद बर्क और AIMIM का भी पलटवार - India TV Hindi

Highlights योगी की ‘80-20’ वाली बात पर अखिलेश यादव ने तुरंत पलटवार किया। जिया उर रहमान बर्क बोले, 'राज्यसभा नतीजे को विधानसभा की जीत न समझें'। AIMIM ने योगी पर चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश का आरोप लगाया। लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राज्यसभा चुनाव के बहाने ‘80-20’ की राजनीतिक बहस को फिर हवा दे दी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव ने आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजों का संकेत दे दिया है। योगी के बयान के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद जिया उर रहमान बर्क ने पलटवार किया। AIMIM ने भी योगी पर चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश का आरोप लगाया। Read more

October 7, 2026

How To Use Buttermilk For Plants: बची छाछ को सिंक में बहाने की भूल न करें! पौधों के लिए साबित होगा जादुई टॉनिक; तेजी से बढ़ेगी गुलाब-गुड़हल की ग्रोथ

How To Use Buttermilk For Plants: गर्मियों में घरों में दही खाई जाती और छाछ भी खूब पिया जाता है. छाछ पीना बहुत ही आम बात है. कई बार छाछ जरूरत से ज्यादा बन जाती है और फिर बची हुई छाछ फ्रिज में रखी रह जाती है. एक-दो दिन बाद जब इसे पीने का मन नहीं करता, तो ज्यादातर लोग इसे बेकार समझकर सिंक में बहा देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो अगली बार रुक जाएं. घर में बची यही छाछ आपके गार्डन के पौधों के लिए काफी काम की साबित हो सकती है. Read more

October 7, 2026

Chhattisgarh Gratuity Payment Order: छत्तीसगढ़ में इन कर्मचारियों को 45 दिनों में होगा ग्रेच्युटी का भुगतान.. दिवाली से पहले खातों में आ जाएगी रकम, पढ़ें ये पत्र | IBC24

Chhattisgarh Gratuity Payment Order: रायपुर: प्रदेश में डायल 108 संजीवनी एक्सप्रेस सेवा से जुड़े 1500 से ज्यादा कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और वेतन से काटी गई राशि के भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारियों ने बुधवार को जय अंबे इमरजेंसी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय का घेराव किया था। कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे। Read more