भोपाल4 घंटे पहले
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विधायक निधि के कामों की दरों पर सवाल उठाते नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे द्वारा विभागीय बैठक में कचरा गाड़ी और अन्य खरीदी में दरों की विसंगतियों को स्वीकार किए जाने के बाद मामला सियासी तूल पकड़ रहा है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ACS के बयान पर सवाल उठाते हुए सरकारी सिस्टम और शेड्यूल ऑफ रेट्स (SOR) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने SOR की दरें बढ़ाकर भ्रष्टाचार की व्यवस्था बना रखी है।
'सलाह देने से पहले अपना घर देखें अधिकारी'
ACS संजय दुबे द्वारा बैठक में कनिष्ठ अधिकारियों को दी गई नसीहत पर उमंग सिंघार ने कहा कि बड़े अधिकारियों को मातहतों को सलाह देने से पहले यह देखना चाहिए कि वे खुद कितनी ईमानदारी से काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह नगर पालिका और नगर निगम के CMO पर प्रभाव जमाने की कोशिश तो नहीं है। सिंघार ने कहा कि अधिकारियों को नसीहत देने से पहले अपना घर देखना चाहिए। उन्होंने समय आने पर इस संबंध में बड़ा खुलासा करने की बात भी कही।
सिंघार ने कहा कि एक नगर पालिका में 60 लाख रुपए में 200 LED बल्ब खरीदे गए। उन्होंने फिनाइल की खरीदी में भी इसी तरह का खेल होने का आरोप लगाया।
विधायक निधि के कामों के रेट्स पर उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने विधायक निधि से होने वाले कामों की दरों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी दरों के कारण जनता के पैसे का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बाजार में मिलने वाली चीजों और विधायक निधि से स्वीकृत राशि के बीच अंतर के उदाहरण दिए।
- पानी का टैंकर: सिंघार के मुताबिक, बाजार में 60 हजार रुपए में मिलने वाला टैंकर विधायक निधि से 2.5 लाख रुपए में स्वीकृत कराना पड़ता है।
- बोरिंग/खनन: उन्होंने कहा कि सवा लाख रुपए में होने वाली बोरिंग के लिए 2.5 लाख रुपए तक चुकाने पड़ते हैं।
- बिजली की डीपी: सिंघार के अनुसार, बाजार में 50 से 60 हजार रुपए में मिलने वाली डीपी के लिए 2 से 2.5 लाख रुपए तक का खर्च दिखाया जाता है।
‘भ्रष्टाचार जनप्रतिनिधि नहीं, अफसरों का SOR करवा रहा’
सिंघार ने GeM पोर्टल और सरकारी खरीदी में लाखों-करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकारी नियमों और स्पेसिफिकेशन के मुताबिक चीजें बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हैं, तो जनप्रतिनिधियों को बाजार से सीधे काम कराने का अधिकार क्यों नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा, “पार्षद, अध्यक्ष या मेयर पर करप्शन का आरोप मढ़ दिया जाता है, जबकि असल करप्शन अधिकारी करवा रहे हैं। SOR के अंदर आपने रेट बढ़ा रखे हैं और पैसा अफसरों की जेब में जा रहा है।”
‘भ्रष्टाचार 25 लाख में होगा या 300 करोड़ में?’
बजट का जिक्र करते हुए सिंघार ने कहा कि विधायक को निधि के रूप में 2 करोड़ रुपए और पार्षद को 10 से 25 लाख रुपए मिलते हैं। वहीं, उसी क्षेत्र में विभागों के जरिए 200 से 300 करोड़ रुपए और नगरीय क्षेत्र में 20 से 25 करोड़ रुपए के काम होते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि भ्रष्टाचार 25 लाख रुपए में ज्यादा होगा या 20 करोड़ रुपए में? इसी तरह 2 करोड़ रुपए में ज्यादा होगा या 300 करोड़ रुपए में?
प्रमुख सचिवों को सलाह, मुख्यमंत्री से पूछा सवाल
उमंग सिंघार ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों से कहा कि यदि वे व्यवस्था में सुधार चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत अपने विभाग के SOR की दरें कम करने से करें।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर भी निशाना साधा। सिंघार ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार रोकना चाहते हैं, तो 24 घंटे के भीतर बैठक बुलाकर SOR की दरों की विसंगतियां दूर कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि 24 घंटे, 24 दिन या ढाई साल बीत जाने के बाद भी सरकार इस व्यवस्था को बदलने का फैसला नहीं ले पाएगी।
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