October 6, 2026
बच्चों को Pocket Money देते समय गांठ बांध लें ये 5 बातें, कम उम्र में ही सीख जाएंगे बचत और बजट का गोल्डन फॉर्मूला
बचपन में सीखी गई आदतें इंसान के जीवन भर के व्यवहार की नींव तय करती हैं, और यह बात पैसों के प्रबंधन पर भी शत-प्रतिशत लागू होती है। आज के उपभोक्तावादी दौर में, जहां ऑनलाइन डिलीवरी, गेमिंग इन-ऐप परचेज और डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, बच्चों को पैसे की असली कद्र सिखाना माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को महीने या हफ्ते की पॉकेट मनी तो देते हैं, लेकिन अक्सर इसे महज एक 'खर्चा' मानकर छोड़ देते हैं। वित्तीय मनोवैज्ञानिकों और पैरेंटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि पॉकेट मनी केवल बच्चों की फरमाइशें पूरी करने का साधन नहीं है, बल्कि यह उन्हें कम उम्र से ही बजटिंग, निर्णय लेने की क्षमता और बचत (Savings) का व्यावहारिक पाठ पढ़ाने का सबसे प्रभावी टूल है। यदि बच्चे को सही उम्र में पैसे का संतुलन संभालना न सिखाया जाए, तो बड़े होकर क्रेडिट कार्ड के कर्ज और फिजूलखर्ची में फंसने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
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