देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में हर तीसरा विद्यार्थी परिसर में खुद को बाहरी महसूस करता है। जेईई एडवांस और नीट जैसी कठिन परीक्षाएं पास करके प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुंचने वाले विद्यार्थियों को सीट तो मिल जाती है, लेकिन अव्वल होने का टूटता भ्रम, भाषा, सामाजिक हैसियत, आर्थिक तंगी और भेदभाव उन्हें भीतर से अकेला कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट की गठित नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थियों का यही अकेलापन तनाव और पढ़ाई बीच में छोड़ने की बड़ी वजह बन रहा है। टास्क फोर्स के 2.43 लाख विद्यार्थियों पर किए सर्वे में 15% ने माना कि बीते छह माह में गंभीर तनाव महसूस किया। 15% ने माना कि एक साल में उन्हें बार-बार आत्महत्या के विचार आए। तनाव के चलते 2018 से 2023 के बीच 13,600 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।
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