September 26, 2026

खाड़ी में संघर्ष: 'वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले 'अस्वीकार्य'; समुद्री सुरक्षा जोखिम पर जयशंकर की दो-टूक

भारत ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नेताओं के सामने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री यात्रियों (सीफेयरर्स) को निशाना बनाए जाने पर कड़ी चिंता जताई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और उनमें सवार नाविकों पर हमले 'बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं।' संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की उच्चस्तरीय सामान्य बहस में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि इस साल दुनिया खाड़ी क्षेत्र में एक ऐसे संघर्ष को देख रही है, जिसने पहले से मुश्किल हालात को और गंभीर बना दिया है। हम लगातार जारी शत्रुता को लेकर बेहद चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और सीफेयरर्स को निशाना बनाया जाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।



सभी पक्ष संयम बरतें और तनाव कम करें: भारत


विदेश मंत्री ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा और व्यापार का आवागमन बिना रुकावट जारी रहना चाहिए। समुद्री क्षेत्र में सामने आ रही नई चुनौतियों ने जमीन पर पहले से मौजूद समस्याओं को और बढ़ा दिया है। खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ लाल सागर से काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले हुए हैं। इन घटनाओं में भारतीय नाविकों की भी जान गई है और दूसरे देशों के सीफेयरर्स भी मारे गए हैं। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।

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भारत समेत 25 देशों की पहल


विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करने की पहल में साथ दिया है। जहाजों और सीफेयरर्स की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन करना बेहद जरूरी है।

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भारत और लाइबेरिया ने बनाया नया ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’


भारत और लाइबेरिया ने शुक्रवार को ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की स्थापना का एलान किया। लगातार हो रहे वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बीच इसे समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस समूह की स्थापना के दौरान जयशंकर ने हाल के कई समुद्री हमलों और उनमें नाविकों को हुए नुकसान का जिक्र किया।



विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में इन मुद्दों का किया जिक्र

  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
  • जयशंकर ने सभी पक्षों से संयम और तनाव कम करने की अपील की।
  • भारत ने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा व व्यापार की निर्बाध आवाजाही पर जोर दिया।
  • खाड़ी से लेकर लाल सागर और काला सागर तक समुद्री सुरक्षा चुनौती बढ़ी है।
  • भारतीय नाविक भी इन समुद्री इलाकों में बढ़ते जोखिम का सामना कर रहे हैं।
  • भारत ने इस मुद्दे पर वैश्विक जनमत तैयार करने की पहल में 23 अन्य साझेदारों के साथ हाथ मिलाया है।

एमवी केप दाओ पर हमले में भारतीय नाविक की गई जान


जयशंकर ने एंटिगुआ और बारबुडा के झंडे वाले बल्क कैरियर एमवी केप दाओ पर हुए हमले का भी उल्लेख किया। यह जहाज ओमान की खाड़ी में था और इस घटना में एक भारतीय नाविक की जान चली गई। ऐसे हमलों के बढ़ते खतरे को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों से गुजरने वाले जहाजों और उन पर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।



 होरमुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमला, भारतीय लापता


उन्होंने पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गैया का भी जिक्र किया, जिसे होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय निशाना बनाया गया था। इस घटना के बाद जहाज पर मौजूद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच व्यापारी जहाजों और सीफेयरर्स के लिए खतरा बढ़ा है। इनमें  होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी, लाल सागर, अदन की खाड़ी, बाब-अल-मंडेब, काला सागर और सोमालिया के आसपास के समुद्री क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा संबंधी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।



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इन समुद्री रास्तों से गुजरते हैं बड़ी संख्या में भारतीय नाविक


भारत के बड़ी संख्या में सीफेयरर्स भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं। ये जहाज इन संवेदनशील समुद्री इलाकों में संचालित होते हैं या इन रास्तों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में बढ़ती समुद्री असुरक्षा का सीधा असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ता है। भारत लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा के साथ-साथ जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान की हिफाजत भी सुनिश्चित की जाए।