July 11, 2026

Yogini Dasha: योगिनी दशा क्या है ? जानिए कैसे बदलती है जीवन की दिशा और दशा

Yogini Dasha: योगिनी दशा क्या है ? जानिए कैसे बदलती है जीवन की दिशा और दशा

योगिनी दशा Image Credit source: unsplash

Yogini Dasha In Astrology: ज्योतिष में इंसान के जीवन के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए कई तरह की दशाओं का जिक्र किया गया है. इनमें सबसे ज्यादा प्रचलित विंशोत्तरी दशा है, लेकिन उत्तर भारत और विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में योगिनी दशा को बेहद सटीक और प्रभावशाली माना जाता है. मान्यता है कि यह दशा जातक के जीवन की दिशा और दशा को पूरी तरह बदलने की ताकत रखती है.आइए विस्तार से समझते हैं कि योगिनी दशा क्या है, इसके प्रकार क्या हैं और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है.

क्या है योगिनी दशा?

योगिनी दशा ज्योतिष की एक विशेष दशा प्रणाली है, जिसका आधार जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति और जन्म नक्षत्र होता है. इस प्रणाली में कुल आठ योगिनियां मानी गई हैं और प्रत्येक योगिनी एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है. इन योगिनियों के नाम हैं,मंगला, पिंगला, धन्या, भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा और संकटा. इन आठों योगिनियों की दशाएं क्रमवार चलती हैं और इनका एक पूरा चक्र 36 सालों में पूरा होता है. इसके बाद यही क्रम दोबारा शुरू हो जाता है.

योगिनी दशा कैसे तय होती है?

योगिनी दशा की शुरुआत जन्म नक्षत्र के आधार पर होती है. हर व्यक्ति की पहली योगिनी दशा अलग-अलग हो सकती है. जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उसी के अनुसार पहली दशा निर्धारित की जाती है. इसके बाद बाकी योगिनियों की दशाएं निश्चित क्रम में आती रहती हैं. यही कारण है कि एक ही उम्र के दो लोगों की योगिनी दशा अलग हो सकती है और उनके जीवन में घटने वाली घटनाओं का समय भी अलग दिखाई देता है.

आठ योगिनियों की अवधि

योगिनी दशा में प्रत्येक योगिनी की समय अवधि अलग होती है.

  • मंगला 1 वर्ष
  • पिंगला 2 वर्ष
  • धन्या 3 वर्ष
  • भ्रामरी 4 वर्ष
  • भद्रिका 5 वर्ष
  • उल्का 6 वर्ष
  • सिद्धा 7 वर्ष
  • संकटा 8 वर्ष

इन सभी अवधियों का कुल योग 36 साल होता है.

जीवन पर कैसे पड़ता है प्रभाव?

योगिनी दशा का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है. यदि संबंधित योगिनी का स्वामी ग्रह शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को करियर, शिक्षा, धन, विवाह, संतान, स्वास्थ्य और मान-सम्मान के क्षेत्र में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. वहीं यदि ग्रह कमजोर, नीच राशि में या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो जीवन में बाधाएं, आर्थिक परेशानियां, मानसिक तनाव या कार्यों में देरी जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं.

क्या योगिनी दशा भविष्य बता सकती है?

ज्योतिषाचार्य योगिनी दशा का उपयोग भविष्य में होने वाली संभावित घटनाओं के समय का अनुमान लगाने के लिए करते हैं. विवाह कब हो सकता है, नौकरी मिलने की संभावना कब बनेगी, व्यापार में लाभ कब मिलेगा या किसी चुनौतीपूर्ण समय का सामना कब करना पड़ सकता है, हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि दशा केवल संभावनाओं का संकेत देती है. व्यक्ति के कर्म, निर्णय और परिस्थितियां भी उसके जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं.

योगिनी दशा का महत्व

योगिनी दशा वैदिक ज्योतिष की ऐसी प्रणाली है, जो व्यक्ति के जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण बदलावों का समय समझने में मदद करती है. यह केवल शुभ या अशुभ समय बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि किस समय कौन-सा निर्णय अधिक लाभदायक हो सकता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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