July 11, 2026

वीकेंड स्पेशल: लघुकथाएं- बेटियां, परवरिश, पड़ाव, मर्द, नाम/बदनाम (Weekend Special: Short Stories- Betia. Parvarish, Padav, Mard, Naam/Badnaam)

बेटियां

"हैलो! ... हां, क्या हुआ? इतनी सुबह सुबह?"

"अरे, कुछ नहीं पापा! फोन का अलार्म बंद कर रही थी, ग़लती से काॅल चली गई.. आप ठीक हैं ना?"

आज फिर से इसने कोई ख़राब सपना देखा होगा. मैंने अपने आंसू पोंछे; ये बेटियां कितनी आसानी से झूठ बोल लेती हैं!

परवरिश

"पापा, कल मैम ने आपको स्कूल बुलाया है.. वो गुस्से में थीं."

"क्या हुआ? तुमने फिर मारपीट की?"

"नहीं... मैम ने पूछा कि ग्रैंडफादर को हिंदी में क्या कहते है? मैंने बताया दादाजी और नानाजी. मैम बोलीं वैरी गुड!"

"फिर उन्हें ग़ुस्सा किस बात पर आया?"

"... जब मैंने बताया कि नानाजी को मम्मी का बाप भी कहते हैं..."

यह भी पढ़ें: 10 बातें जो हर पिता को अपने बच्चों को सिखानी चाहिए (10 Things Every Father Should Teach His Kids)

पड़ाव

जब मिनी छोटी थी, बारिश आते ही कूद-कूदकर ताली बजाती थी. फिर जवानी ने दस्तक दी; बारिश में खिड़की से बाहर मुंह निकालकर चुपचाप भीगने लगी... और जब किसी ने दिल तोड़ दिया तो बारिश के साथ आंखें भी बरसने लगीं. शादी के बाद वाली हर बारिश बस मायके की याद दिलाने लगी, मन भिगोने लगी.

आज पोता बारिश में कूद-कूदकर ताली बजा रहा है.

"दादी, आओ ना, क्या सोच रही हो?"

"तेज़ बारिश है बेटा! किसानों को बड़ा नुक़सान होगा..."

मर्द

रास्ते में देखा कि एक महिला को तीन-चार आदमी घेरे खड़े हैं. बहुत अंधेरी और सुनसान जगह... कार धीमी की, फिर कुछ सोच कर आगे बढ़ा दी.

"हेलो पापा, कितनी देर में आएंगे? मैच शुरू हो गया है..."

"बस... आधे घंटे में..." कार के रियर-व्यू मिरर में अभी भी वो महिला दिख रही थी.

"पापा! छक्का!.."

मैंने तेज़ी से यू-टर्न लेकर कार उन लोगों के पास रोक दी.

यह भी पढ़ें: वुमन सेफ्टी लॉ- महिलाओं की सुरक्षा पर एक नज़र… (Women’s Safety Laws- A Look At Women’s Safety…)

नाम/बदनाम

विद्यालय का क्लर्क एडमिशन फॉर्म पढ़कर हंस रहा था, "आजकल‌ बच्चों के नाम कैसे रखे‌ जाते हैं... आपके बेटे का नाम प्रथम है ना, अरे भाई! दूसरा होगा तो द्वितीय रख दोगे क्या? हा हा हा... सोच समझकर नाम रखने चाहिए. जैसा नाम हो वैसा ही आचरण हो जाता है. ये समझ लीजिए!"

"ये बताइए, एडमिशन हो जाएगा ना?" मैंने मुद्दे पर आते हुए कहा.

"देखिए जगह तो है नहीं! बाकी आप हमारी जेब गर्म कर दें तो हम भी कोशिश करेंगे." वो कुटिलता से मुस्कुरा रहा था.

मैं उठकर खड़ा हो गया, "जगह नहीं है तो फिर क्या फ़ायदा!.. रही नाम और आचरण वाली बात, उससे भी मैं सहमत नहीं हूं; नाम तो आपका भी बहुत अच्छा है!"

मेरी बात सुनकर 'राम कुमार जी' की मुस्कान अचानक गायब हो गई थी!

- लकी राजीव

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES

Photo Courtesy: Freepik