Vishwakarma Puja 2026: जानें भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी क्यों कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने सोने की लंका, द्वारका और पुष्पक विमान जैसी अद्भुत रचनाएं की थीं।
Vishwakarma Puja 2026
- Published: 17 Sep 2026, 10:07 AM IST
- Last Updated: 17 Sep 2026, 10:07 AM IST
Vishwakarma Puja 2026: साल 2026 में 17 सितंबर, गुरुवार को कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। इस दिन खासतौर पर कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें देवताओं का शिल्पकार और निर्माण कला का प्रतीक माना गया है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और दिव्य शक्तियों से कई भव्य नगरियों, महलों और विमानों का निर्माण किया था। यही वजह है कि उन्हें देवशिल्पी विश्वकर्मा के नाम से जाना जाता है।
सोने की लंका से जुड़ी है पौराणिक कथा
भगवान विश्वकर्मा की प्रसिद्ध रचनाओं में सोने की लंका का उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बाद उनके विश्राम के लिए विश्वकर्मा जी ने स्वर्ण लंका का निर्माण किया था।
कथाओं में बताया जाता है कि पूरी लंका को सोने से सजाया गया था। बाद में यह लंका रावण के अधिकार में चली गई। रामायण की कथा में यही स्वर्ण लंका रावण की नगरी के रूप में वर्णित है।
विश्वकर्मा ने बनाई थी द्वारकापुरी?
भगवान विश्वकर्मा की दूसरी प्रमुख रचना के रूप में द्वारका नगरी का भी उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर समुद्र के बीच द्वारका नगरी का निर्माण किया गया था।
कथाओं के अनुसार यह नगरी सुरक्षा, भव्य वास्तुकला और सुंदर कलाकृतियों का अद्भुत मेल थी। पौराणिक वर्णनों में द्वारका को बेहद समृद्ध और व्यवस्थित नगरी बताया गया है।
इंद्रपुरी भी विश्वकर्मा की रचना मानी जाती है
देवताओं के राजा इंद्र की नगरी इंद्रपुरी का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा से जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक कथाओं में इंद्रपुरी को भव्य महलों, सुंदर उद्यानों और दिव्य वास्तुकला से सजी नगरी बताया गया है।
मान्यता है कि इसकी भव्यता और स्थापत्य कला भगवान विश्वकर्मा की कुशलता को दर्शाती थी। इसी तरह की कथाओं के कारण धार्मिक परंपरा में उन्हें देवताओं का प्रमुख शिल्पकार माना गया।
पुष्पक विमान भी विश्वकर्मा की दिव्य रचना
भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी सबसे चर्चित रचनाओं में पुष्पक विमान का नाम भी आता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह एक दिव्य विमान था, जो अपनी विशेष क्षमताओं के कारण अन्य विमानों से अलग माना जाता था।
रामायण की परंपरागत कथा में पुष्पक विमान का संबंध कुबेर और बाद में रावण से बताया जाता है। इसके आकार और गति को लेकर भी अलग-अलग पौराणिक वर्णन मिलते हैं। धार्मिक कथाओं में इसे विश्वकर्मा की अद्भुत शिल्पकला से जोड़ा जाता है।
इसलिए देवताओं के शिल्पकार कहलाते हैं विश्वकर्मा
सोने की लंका, द्वारका, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी रचनाओं से जुड़ी पौराणिक कथाएं भगवान विश्वकर्मा की निर्माण कला और तकनीकी कौशल को दर्शाती हैं। इसी वजह से हिंदू धार्मिक परंपरा में उन्हें देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकला का देवता माना जाता है।
हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा के जरिए लोग औजारों, मशीनों, वाहनों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं। यह दिन मेहनत, निर्माण-कौशल और शिल्प परंपरा के सम्मान से भी जुड़ा माना जाता है