September 17, 2026

Vishwakarma Ji Ki Aarti: आज है विश्वकर्मा पूजा, पढ़ें भगवान की आरती, नोट करें पूजा टाइम

Vishwakarma Ji Ki Aarti: हर साल कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस देव की पूजा करने से करियर और कारोबार में खूब तरक्की मिलती है. खासतौर पर उन लोगों को आज के दिन पूजा जरूर करनी चाहिए, जो औजारों, मशीनों तथा उपकरणों का कार्य करते हैं. आज का दिन इन लोगों के लिए अत्यंत खास होता है. बता दें कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर वर्ष 17 सितंबर को ही होती है क्योंकि उनके जन्म की तारीख सौर कैलेंडर से चुनी जाती है. ऐसे में आज के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करनी चाहिए. राहुकाल और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही आज उनकी पूजा में आपको विश्वकर्मा जी की आरती भी करनी चाहिए. इस आर्टिकल में हिंदी में पढ़ें विश्वकर्मा जी की आरती के लिरिक्स.

विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Ji Ki Aarti)

श्री विश्वकर्मा आरती

प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवोप्रभु विश्वकर्मा।

सुदामा की विनय सुनीऔर कंचन महल बनाये।

सकल पदारथ देकर प्रभु जीदुखियों के दुख टारे॥

प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

विनय करी भगवान कृष्ण नेद्वारिकापुरी बनाओ।

ग्वाल बालों की रक्षा कीप्रभु की लाज बचायो॥

प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

रामचन्द्र ने पूजन कीतब सेतु बांध रचि डारो।

सब सेना को पार कियाप्रभु लंका विजय करावो॥

प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

श्री कृष्ण की विजय सुनोप्रभु आके दर्श दिखावो।

शिल्प विद्या का दो प्रकाशमेरा जीवन सफल बनावो॥

प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥

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भगवान श्री विश्वकर्मा चालीसा (Shree Vishwakarma Chalisa)

दोहा

विनय करौं कर जोड़कर,मन वचन कर्म संभारि।

मोर मनोरथ पूर्ण कर,विश्वकर्मा दुष्टारि ।।

चौपाई

विश्वकर्मा तव नाम अनूपा।पावन सुखद मनन अनरूपा॥

सुंदर सुयश भुवन दशचारी।नित प्रति गावत गुण नरनारी॥

शारद शेष महेश भवानी।कवि कोविद गुण ग्राहक ज्ञानी॥

आगम निगम पुराण महाना।गुणातीत गुणवंत सयाना॥

जग महँ जे परमारथ वादी।धर्म धुरंधर शुभ सनकादि॥

नित नित गुण यश गावत तेरे।धन्य-धन्य विश्वकर्मा मेरे॥

आदि सृष्टि महँ तू अविनाशी।मोक्ष धाम तजि आयो सुपासी॥

जग महँ प्रथम लीक शुभ जाकी।भुवन चारि दश कीर्ति कला की॥

ब्रह्मचारी आदित्य भयो जब।वेद पारंगत ऋषि भयो तब॥

दर्शन शास्त्र अरु विज्ञ पुराना।कीर्ति कला इतिहास सुजाना॥

तुम आदि विश्वकर्मा कहलायो।चौदह विधा भू पर फैलायो॥

लोह काष्ठ अरु ताम्र सुवर्णा।शिला शिल्प जो पंचक वर्णा॥

दे शिक्षा दुख दारिद्र नाश्यो।सुख समृद्धि जगमहँ परकाश्यो॥

सनकादिक ऋषि शिष्य तुम्हारे।ब्रह्मादिक जै मुनीश पुकारे॥

जगत गुरु इस हेतु भये तुम।तम-अज्ञान-समूह हने तुम॥

दिव्य अलौकिक गुण जाके वर।विघ्न विनाशन भय टारन कर॥

सृष्टि करन हित नाम तुम्हारा।ब्रह्मा विश्वकर्मा भय धारा॥

विष्णु अलौकिक जगरक्षक सम।शिवकल्याणदायक अति अनुपम॥

नमो नमो विश्वकर्मा देवा।सेवत सुलभ मनोरथ देवा॥

देव दनुज किन्नर गन्धर्वा।प्रणवत युगल चरण पर सर्वा॥

अविचल भक्ति हृदय बस जाके।चार पदारथ करतल जाके॥

सेवत तोहि भुवन दश चारी।पावन चरण भवोभव कारी॥

विश्वकर्मा देवन कर देवा।सेवत सुलभ अलौकिक मेवा॥

लौकिक कीर्ति कला भंडारा।दाता त्रिभुवन यश विस्तारा॥

भुवन पुत्र विश्वकर्मा तनुधरि।वेद अथर्वण तत्व मनन करि॥

अथर्ववेद अरु शिल्प शास्त्र का।धनुर्वेद सब कृत्य आपका॥

जब जब विपति बड़ी देवन पर।कष्ट हन्यो प्रभु कला सेवन कर॥

विष्णु चक्र अरु ब्रह्म कमण्डल।रूद्र शूल सब रच्यो भूमण्डल॥

इन्द्र धनुष अरु धनुष पिनाका।पुष्पक यान अलौकिक चाका॥

वायुयान मय उड़न खटोले।विधुत कला तंत्र सब खोले॥

सूर्य चंद्र नवग्रह दिग्पाला।लोक लोकान्तर व्योम पताला॥

अग्नि वायु क्षिति जल अकाशा।आविष्कार सकल परकाशा॥

मनु मय त्वष्टा शिल्पी महाना।देवागम मुनि पंथ सुजाना॥

लोक काष्ठ, शिल ताम्र सुकर्मा।स्वर्णकार मय पंचक धर्मा॥

शिव दधीचि हरिश्चंद्र भुआरा।कृत युग शिक्षा पालेऊ सारा॥

परशुराम, नल, नील, सुचेता।रावण, राम शिष्य सब त्रेता॥

ध्वापर द्रोणाचार्य हुलासा।विश्वकर्मा कुल कीन्ह प्रकाशा॥

मयकृत शिल्प युधिष्ठिर पायेऊ।विश्वकर्मा चरणन चित ध्यायेऊ॥

नाना विधि तिलस्मी करि लेखा।विक्रम पुतली दॄश्य अलेखा॥

वर्णातीत अकथ गुण सारा।नमो नमो भय टारन हारा॥

दोहा

दिव्य ज्योति दिव्यांश प्रभु,दिव्य ज्ञान प्रकाश।

दिव्य दृष्टि तिहुं,कालमहं विश्वकर्मा प्रभास॥

विनय करो करि जोरि,युग पावन सुयश तुम्हार।

धारि हिय भावत रहे,होय कृपा उद्गार॥

छन्द 

जे नर सप्रेम विराग श्रद्धा,सहित पढ़िहहि सुनि है।

विश्वास करि चालीसा चोपाई,मनन करि गुनि है॥

भव फंद विघ्नों से उसे,प्रभु विश्वकर्मा दूर कर।

मोक्ष सुख देंगे अवश्य ही,कष्ट विपदा चूर कर॥

भगवान विश्वकर्मा जी पूजन सामग्री

भगवान विश्वकर्मा की पूजा में रोली, अक्षत, चंदन, पुष्प, माला, धूप, दीप, फल, मिठाई और नैवेद्य आदि का इस्तेमाल किया जाता है. भगवान विश्वकर्मा को आज के दिन पान, सुपारी और तंबाकू का भी भोग लगाया जाता है. इसके अलावा पूजा स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा रखी जाती है. जिन लोगों का काम मशीन, औजार, कारखाने या निर्माण से जुड़ा है, वे अपने काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भी पूजा में शामिल कर सकते हैं. पूजा के बाद प्रसाद वितरित करना शुभ माना जाता है. 

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विश्वकर्मा जयंती पर औजारों की पूजा क्यों की जाती है?

भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार और निर्माण कला से जुड़ा देवता माना जाता है. इसलिए, विश्वकर्मा जयंती का दिन विशेष रूप से शिल्पकारों, कारीगरों, इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों, मशीनरी से जुड़े लोगों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन लोग अपने कार्य में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों की सफाई करके उनकी पूजा करते हैं. मान्यता है कि इससे कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को अपने काम में सफलता प्राप्त होती है.

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रात:काल मुहूर्त- सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर 10:43 तक

दोपहर का शुभ मुहूर्त- दोपहर 12:15 से 1 बजकर 48 मिनट तक

शाम का शुभ मुहूर्त- शाम 4:52 से लेकर 6 बजकर 24 मिनट तक

राहुकाल का समय 

आज राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. इस समय पूजा या उद्यापन करने से बचना चाहिए.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)