अमेरिका में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए वहां की वर्क कल्चर कई बार सीखने का नया मौका देती है. कैलिफोर्निया में रहने वाली भारतीय महिला हरिनी ने भी अपने ऑफिस के अनुभव से ऐसी ही एक बात सीखी, जिसने आत्मविश्वास को लेकर उनकी सोच बदल दी. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सहकर्मियों को देखकर उन्हें समझ आया कि हर बात का पूरा जवाब पता होने का इंतजार किए बिना भी अपनी राय रखी जा सकती है.
हरिनी ने इंस्टाग्राम पर @harini_nagireddi अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया. इसमें उन्होंने बताया कि अपने पूरे ऑफिस में वह अकेली भारतीय हैं. शुरुआत में उन्हें अक्सर लगता था कि शायद उनके अमेरिकी सहकर्मी उनसे ज्यादा जानते हैं. इसकी वजह यह थी कि वे मीटिंग या बातचीत के दौरान बिना ज्यादा सोचे अपने विचार सामने रख देते थे. धीरे-धीरे हरिनी को समझ आया कि असली फर्क ज्ञान का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का था. उनके सहकर्मी हर सवाल का जवाब जानते हों, ऐसा जरूरी नहीं था. फिर भी वे बातचीत में हिस्सा लेने से नहीं हिचकिचाते थे. वहीं हरिनी को लगता था कि पहले पूरी तरह सही जवाब तैयार होना चाहिए, उसके बाद ही बोलना चाहिए.
समझ आई ये बात
उन्होंने कहा कि भारत में पली-बढ़ी होने के कारण उन्हें बचपन से ही यह सिखाया गया था कि बोलने से पहले अच्छी तरह सोचो और जब तक अपनी बात को लेकर पूरी तरह पक्का भरोसा न हो, तब तक उसे सामने मत रखो. स्कूल और पढ़ाई के दौरान यह तरीका उनके लिए काफी फायदेमंद रहा. लेकिन ऑफिस में उन्हें लगा कि यही आदत कई बार उन्हें पीछे कर देती है. हरिनी के मुताबिक, काम की जगह पर बातचीत काफी तेजी से आगे बढ़ती है. अगर कोई व्यक्ति अपने विचार को परफेक्ट बनाने के चक्कर में उसे बोलने में देर करता है, तो हो सकता है कि तब तक कोई दूसरा व्यक्ति वही चर्चा आगे ले जाए. इसलिए जरूरी नहीं कि हर बात पूरी तरह तैयार होने के बाद ही कही जाए.
उनका मानना है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को बिना जानकारी के सब कुछ जानने का दिखावा करना चाहिए. असली बात यह है कि अगर आपके दिमाग में कोई विचार है, तो उसे सामने रखने से डरना नहीं चाहिए. हो सकता है कि वह विचार अभी पूरी तरह तैयार न हो, लेकिन बातचीत में शामिल होने से उसे बेहतर बनाने का मौका मिल सकता है.
यह भी पढ़ें: दुल्हन की डोली में रखी जाती थी ये पाकिस्तान खास रोटी, जानें मुल्तान की अनोखी परंपरा
इस एक्सपीरियंस ने हरिनी की आत्मविश्वास को लेकर पुरानी सोच भी बदल दी. पहले उन्हें लगता था कि कुछ लोग स्वभाव से ही कॉन्फिडेंट होते हैं और कुछ लोग नहीं. लेकिन ऑफिस में मिले अनुभवों ने उन्हें महसूस कराया कि आत्मविश्वास कोई जन्म से मिलने वाली चीज नहीं, बल्कि एक ऐसी स्किल है जिसे समय के साथ सीखा और विकसित किया जा सकता है.
यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.<p></p> अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. <p></p>फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
Read More