September 21, 2026 20 बार देखा गया
वाराणसी में लगातार हुई बारिश का असर अब खेतों से निकलकर आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। वाराणसी के चिरई गांव ब्लॉक के सरामोहने गांव में करीब 20 किसान सब्जियों की खेती करते हैं। किसानों का कहना है कि बारिश और खेतों में पानी भरने से नैनुआ, बैंगन, भिंडी समेत कई सब्जियों की फसल खराब हुई है। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है और बाजार में सब्जियां कम आने से दुकानों पर उनके दाम बढ़ गए हैं।

सब्जी बेच रहे विक्रेता (फोटो साभार: सुशीला)
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन -सुचित्रा
खेतों में पानी भरने से खराब हुई फसल
सरामोहने गांव के किसान संतोष कुमार बताते हैं कि इस बार बारिश ने सब्जियों की खेती को काफी नुकसान पहुंचाया है। नैनुआ, बैंगन और भिंडी जैसी फसलों के खेतों में पानी भर गया।

बारिश की वजह से बैगन की फसल हुई ख़राब (फोटो साभार: सुशीला)
उनका कहना है कि एक सब्जी की फसल तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये तक लागत लग जाती है लेकिन इस बार कमाई 5 हजार रुपये भी नहीं हो सकी। क्योंकि यही वह समय होता है जब सब्जियों की अच्छी पैदावार की उम्मीद रहती है। लगातार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। लागत और मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो गया है।
निचले खेतों में सबसे ज्यादा नुकसान
किसान मुंशी का कहना है कि गंगा किनारे और निचले इलाकों में स्थित खेतों में बारिश का असर सबसे ज्यादा हुआ है। इन खेतों से पानी जल्दी निकल नहीं पाता। लगातार दो-तीन दिन बारिश होने के बाद खेतों में पानी जमा रहा जिससे सब्जियों को नुकसान पहुंचा।

नेनुआ (तुरई) की फसल (फोटो साभार: सुशीला)
उन्होंने बताया कि गांव में बड़ी संख्या में परिवार सब्जियों की खेती पर निर्भर हैं। किसान अपनी उपज बेचकर घर का खर्च चलाते हैं। इसी आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, दवा और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं। ऐसे में फसल खराब होने का असर सीधे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
बारिश के बाद बाजार में महंगी हुई सब्जियां
सब्जी दुकानदार प्रेम पटेल बताते हैं कि मंडी से ही सब्जियां महंगे दाम पर मिल रही हैं। ऐसे में दुकानदारों को भी कुछ मार्जिन जोड़कर सब्जी बेचनी पड़ती है। महंगाई का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है। जहां लोग पहले एक किलो सब्जी खरीदते थे वहां अब आधा किलो या पाव-दो पाव में काम चला रहे हैं।
स्थानीय दुकानदार के मुताबिक, फिलहाल बैंगन करीब 60 रुपये किलो, नैनुआ 60 रुपये, मिर्च 100 रुपये, टमाटर 80 रुपये, बोड़ा (लोभिया) 40 रुपये और कुंदरू करीब 50 रुपये किलो तक बिक रहा है। हालांकि अलग-अलग बाजार और दुकानों पर कीमतों में अंतर हो सकता है।

मंडी में बिक रही सब्जी (फोटो साभार: सुशीला)
रोज कमाने-खाने वाले परिवारों पर ज्यादा असर
स्थानीय निवासी पुष्पा देवी कहती हैं कि सब्जियों के बढ़े दाम का सबसे ज्यादा असर छोटे और रोज कमाने वाले परिवारों पर पड़ता है। जिन परिवारों की आमदनी सीमित है उन्हें कम मात्रा में सब्जी खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है। अब बारिश के कारण स्थानीय सब्जियों के महंगे होने से घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ गया है।
हर साल बारिश की वजह से किसानों की फसल का काफी नुकसान होता है। क्योंकि फसल बुआई के बाद वो इसी दिन का इंतजार करते हैं कि बाजार में सब्जी बेच कर वह कुछ पैसे कमा सके। इसके साथ ही उन पर जो भी कर्जा है वो चुका सके लेकिन बारिश उनके कर्जे को और बढ़ा देती है और उनकी चिंता बढ़ जाती है।
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