एजुकेशन
- Authored by: नीलाक्ष सिंह
- Updated Jul 23, 2026, 07:44 PM IST
देहरादून के वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद मौजूदा सेमेस्टर की 2 परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। विश्वविद्यालय की जांच में सामने आया कि एक बाहरी पेपर सेटर ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले छात्रों के साथ प्रश्न साझा किए थे
![]()
UTU
देहरादून के वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय यानी UTU ने पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद मौजूदा सेमेस्टर की 2 परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। विश्वविद्यालय की जांच में सामने आया कि एक बाहरी पेपर सेटर (Paper Setter) ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले छात्रों के साथ प्रश्न साझा किए थे। इस वजह से UTU से जुड़े 12 कॉलेजों के छात्रों को दिक्कत हुई होगी। विश्वविद्यालय ने संबंधित पेपर सेटर को अगले सात वर्षों तक परीक्षा से जुड़े सभी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं, जिस कॉलेज में वह कार्यरत थे, वहां से भी उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' विषय की परीक्षा को लेकर सामने आया। शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने जांच शुरू की। परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जांच में पाया गया कि बाहरी पेपर सेटर ने संस्थान के आंतरिक पोर्टल और व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा में पूछे गए सवालों से मिलते-जुलते प्रश्न पहले ही छात्रों तक पहुंचा दिए थे।
जांच के दौरान यह भी संदेह सामने आया कि उसी फैकल्टी सदस्य द्वारा तैयार किए गए 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी' विषय का प्रश्नपत्र भी लीक हुआ हो सकता है।
अगस्त में होगी दोबारा परीक्षा
विश्वविद्यालय ने दोनों विषयों की परीक्षाएं रद्द करते हुए घोषणा की है कि इनका पुनः आयोजन अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में किया जाएगा। साथ ही सभी संबद्ध संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को इस फैसले की तुरंत जानकारी दें, ताकि वे दोबारा परीक्षा की तैयारी समय पर कर सकें।
प्रोफेसर पर सात साल की रोक
विश्वविद्यालय ने संबंधित पेपर सेटर को तत्काल प्रभाव से अगले सात वर्षों तक परीक्षा से जुड़े किसी भी कार्य में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा कॉलेज को भी परीक्षा प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी और संस्थागत नियंत्रण बनाए रखने में लापरवाही बरतने पर चेतावनी दी गई है।
व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे प्रश्न
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक डॉ. टी.एस. सिद्धू के अनुसार, संबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 50 प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। बाद में इन्हीं में से कई प्रश्न परीक्षा पत्र में शामिल पाए गए। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने संबंधित फैकल्टी सदस्य को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
जांच के बाद हुई बर्खास्तगी
कॉलेज के अनुसार, 8 जुलाई को पेपर लीक की शिकायत मिलने के बाद 10 जुलाई को जांच समिति गठित की गई। समिति ने 13 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर 14 जुलाई से अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
शुरुआत में संस्थान ने संबंधित प्रोफेसर को तीन साल तक प्रश्नपत्र तैयार करने से रोक दिया था। बाद में विश्वविद्यालय की बड़ी जांच में उन्हें पेपर लीक का जिम्मेदार माना गया और 22 जुलाई को सात साल के लिए परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके बाद कॉलेज ने नियुक्ति पत्र की शर्तों के तहत उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सख्त नियमों और लगातार निगरानी के बावजूद यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे जुड़े सवाल छात्रों तक पहुंच रहे हैं, तो यह परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर चिंता पैदा करता है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय की आगे की जांच और उन कदमों पर है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाएंगे।
![]()
नीलाक्ष सिंहauthor
नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।
और पढ़ें
- Hindi News
- Education
End of Article