September 6, 2026

Uttarakhand Elections 2027: उत्तरकाशी की 3 सीटों पर बिछी सियासी बिसात, दावेदारों की धड़कनें तेज

Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड समेत देश के सात राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तराखंड में साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होंगे. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. साथ ही सभी पार्टियों के दावेदारों की भी धड़कनें तेज हो गई हैं कि उन्हें इस बार पार्टी चुनावी मैदान में उतारेगी या उनकी टिकट करेगी.

इस चुनावी सीजन में हम आपको उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सभी सीटों का हाल बताने जा रहे हैं. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगा. क्योंकि उत्तरकाशी जिले की तीन में से दो सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है. जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के पास है. जबकि कांग्रेस के पास जनपद में कोई सीट नहीं है. तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं उत्तरकाशी के ऐतिहासिक महत्व वहां की पृष्ठभूमि के बारे में......

गढ़वाल की ऐतिहासिक धरोहर उत्तरकाशी

उत्तरकाशी को उत्तराखंड का मस्तक और मां गंगा और यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. इसीलिए उत्तरकाशी जिला धार्मिक, आध्यात्मिक और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनपद में सियासी सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं. साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाना भी शुरू कर दी है.

बता दें कि उत्तरकाशी पवित्र गंगोत्री व यमुनोत्री धाम, ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर, नेलांग घाटी के अद्भुत नजारों और पर्वतारोहण के वैश्विक केंद्र नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के लिए मशहूर है. यहां की राजनीति में चारधाम यात्रा प्रबंधन, आपदा राहत व पुनर्वास, सेब बागवानों के हित, टनल और ऑल वेदर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सुविधाएं और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा केंद्र में रहे हैं. इस बार भी जनपद में इन्हीं मुद्दों पर चुनाव होगा.

बीजेपी-कांग्रेस के साथ निर्दलीयों का भी दबदबा

वहीं जिले के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां राष्ट्रीय दलों- बीजेपी और कांग्रेस के अलावा स्थानीय क्षत्रपों और निर्दलीय प्रत्याशियों का भी खासा दबदबा रहा है. 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में जिले की 3 सीटों में से 2 सीटों पर बीजेपी (BJP) ने जीत हासिल की थी, जबकि 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने दोनों प्रमुख दलों को पछाड़ते हुए परचम लहराया था. ऐसे में 2027 के चुनाव में बीजेपी के सामने अपना प्रभुत्व बनाए रखने और कांग्रेस के लिए इस सीमांत जिले में अपनी खोई सियासी जमीन फिर से हासिल करने की कड़ी चुनौती होगी.

उत्तरकाशी की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामरिक पहचान

उत्तरकाशी को स्कंद पुराण में 'सौम्य काशी' कहा गया है, सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक आंदोलनों और समृद्ध परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. उत्तरकाशी कभी टिहरी रियासत का हिस्सा रहा और जिसने 30 मई 1930 को तिलाड़ी के मैदान में वन अधिकारों की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक 'रवांई जनआंदोलन' (तिलाड़ी कांड) की शहादत देखी. मां गंगा (भागीरथी) और यमुना के उद्गम स्थलों को समेटे यह जिला तिब्बत सीमा से सटा होने के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत प्रहरी भी है.

उत्तरकाशी की पहचान गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के दर्शन, मुखबा और खरसाली के शीतकालीन प्रवास, रवांई घाटी की अनोखी मंगसीर बग्वाल, सेलकु मेला, पांडव नृत्य और दयारा बुग्याल जैसी अनुपम धरोहरों से है, लेकिन इस आध्यात्मिक वैभव के बीच, उत्तरकाशी नगर के बाड़ाहाट बाजार से लेकर रवांई घाटी के बड़कोट, पुरोला, मोरी और आराकोट के सेब अंचलों तक यहां की सियासत का अपना एक अलग अंदाज है.

उत्तरकाशी की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी / विवरणकुल आंकड़ेपुरुषमहिला
कुल जनसंख्या3,30,0861,68,5971,61,489
साक्षरता दर (%)75.81%88.79%62.35%
कुल साक्षर आबादी2,15,1261,28,23786,889
शिशु जनसंख्या (0–6 आयु वर्ग)46,30724,16522,142

उत्तरकाशी की कुल धार्मिक आबादी

धर्मजनसंख्याप्रतिशत (%)
हिंदू3,24,85998.42%
मुस्लिम3,5541.08%
बौद्ध5630.17%
ईसाई3530.11%
सिख1670.05%
जैन740.02%
अन्य धर्म1050.03%
धर्म उल्लेख नहीं 4110.12%
कुल आबादी3,30,086100.00%

कैसा रहा 2022 विधानसभा चुनाव में उत्तरकाशी की सभी सीटों पर रिजल्ट?

विधानसभा सीटउम्मीदवारपार्टीप्राप्त मतस्थिति
1. पुरोला (SC)दुर्गेश्वर लालBJP27,856विजेता (6,296 मतों से)
मालचंदINC21,560उपविजेता
प्रकाश कुमारAAP538पराजित
राम प्रसादRLP495पराजित
2. यमुनोत्रीसंजय डोभालनिर्दलीय 22,952विजेता (6,639 मतों से)
दीपक बिजल्वाणINC16,313उपविजेता
केदार सिंह रावतBJP10,620तीसरे स्थान पर
मनोज कोहली श्यामAAP583पराजित
3. गंगोत्रीसुरेश सिंह चौहानBJP29,619विजेता (8,029 मतों से)
विजयपाल सिंह सजवाणINC21,590उपविजेता
कर्नल अजय कोठियालAAP6,161तीसरे स्थान पर
नवनीत उनियालनिर्दलीय (IND)476पराजित

गंगोत्री विधानसभा सीट पर बीजेपी ने दर्ज की थी जीत

बता दें कि गंगोत्री सीट को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक मिथक वर्षों से चला आ रहा है- "जिस पार्टी का प्रत्याशी गंगोत्री से जीतता है, प्रदेश में सरकार उसी दल की बनती है." 2002 से लेकर 2022 तक हर चुनाव में यह मिथक सटीक साबित हुआ है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेश सिंह चौहान ने कांग्रेस के दिग्गज व पूर्व विधायक विजयपाल सिंह सजवाण को 8,029 मतों के बड़े अंतर से हराया था.

अगर 2027 के समीकरण की बात करें तो भागीरथी घाटी में स्थित इस सीट पर चारधाम यात्रा का नियमन, सिलक्यारा टनल जैसी मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं, वरुणावत पर्वत से जुड़े सुरक्षा कार्य और आपदा विस्थापन मुख्य विषय हैं. बीजेपी इस सीट पर अपनी जीत की परंपरा बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस वापसी की उम्मीद में संगठन को धार दे रही है.

यमुनोत्री विधानसभा सीट पर बीजेपी-कांग्रेस को निर्दलीय ने दी थी मात

वहीं यमुनोत्री सीट का इतिहास बताता है कि यहां दलगत निष्ठा से ज्यादा उम्मीदवार का व्यक्तिगत प्रभाव, स्थानीय रिश्तेदारी और रवांई क्षेत्र की गोलबंदी काम करती है. यही वजह है कि यहां निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी अक्सर बाजी मारते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी संजय डोभाल ने बीजेपी के केदार सिंह रावत और कांग्रेस दोनों को पछाड़कर 22,952 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी.

वहीं 2027 के समीकरण की बात करें तो यमुनोत्री धाम के लिए प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट, खरसाली व बड़कोट क्षेत्र में ट्रामा सेंटर व स्वास्थ्य सेवाओं की मांग, और यमुना घाटी के सेब-सब्जी उत्पादकों की समस्याएं यहां के मुख्य मुद्दे हैं. आगामी चुनाव में निर्दलीय प्रभाव को थामना दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी.

पुरोला विधानसभा सीट- SC बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला

वहीं टोंस और कमल नदी घाटी में फैली यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. जौनसार-बावर और हिमाचल की सीमा से सटे होने के कारण यहां का सामाजिक व राजनीतिक ताना-बाना बेहद अनूठा है. यहां भी लंबे समय से कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला रहा है. 2022 के चुनाव में बीजेपी के दुर्गेश्वर लाल ने कांग्रेस के प्रत्याशी मालचंद को 6,296 मतों के अंतर से मात दी थी.

अगर 2027 के समीकरण की बात करें तो आराकोट और मोरी जैसे सेब बेल्ट में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व पैकेजिंग प्लांट का अभाव, सुदूरवर्ती गांवों में पक्की सड़कों की मांग और स्थानीय वन अधिकार यहां के प्रमुख विषय हैं. स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच बढ़ती राजनीतिक चेतना 2027 में नए समीकरण बना सकती है.