August 10, 2026

Uttarakhand Dhami Model: आपदा के जख्मों पर कैसे मरहम लगा रही है उत्तराखंड सरकार? जानिए CM धामी का खास मॉडल

उत्तराखंड में 'धामी मॉडल' के तहत आपदा पीड़ितों को सिर्फ राहत नहीं दी गई, बल्कि 33 करोड़ से ज्यादा खर्च कर बुनियादी ढांचे और आजीविका को दोबारा पटरी पर लाया जा रहा है।

Uttarakhand The Dhami Model: पहाड़ों की गोद में बसा उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन यहां की हसीन वादियां कई बार कुदरत के एक बड़े इम्तिहान का सामना भी करती हैं। जब पहाड़ दरकते हैं, तो सिर्फ सड़कें या घर नहीं टूटते, बल्कि लोगों की रोजी-रोटी और पूरी जिंदगी पर इसका असर पड़ता है। लेकिन, जब बात जनता की सुरक्षा और उनकी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की हो, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की सरकार ने सिर्फ कागजी वादों के बजाय जमीन पर उतरकर एक मिसाल पेश की है। इसे 'द धामी मॉडल' (The Dhami Model) कहा जा रहा है, जिसने आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने का नया रास्ता दिखाया है। आइए जानते हैं कि कैसे सरकार ने राहत से लेकर पुनर्वास तक के काम किए...

जब धराली और थराली पर आई आफत

करीब एक साल पहले जब धराली और थराली में अचानक बादल फटने और मलबे का सैलाब आने से तबाही मची थी, तब प्राथमिकता सिर्फ जान बचाने की नहीं थी, बल्कि उन परिवारों को दोबारा खड़े करने की थी जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया था। पहाड़ों में बुनियादी सुविधाएं दोबारा खड़ी करना आसान काम नहीं है। यहां एक बंद सड़क का मतलब बाजार, स्कूल और अस्पताल से सीधा संपर्क कट जाना है। बिजली या पानी की एक लाइन टूटने से पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार ने सिर्फ फौरी मदद देकर पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि पुनर्निर्माण को एक मिशन बना लिया।

33 करोड़ रुपए से ज्यादा की मदद और रिकवरी

  • सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और विकास कार्यों के लिए 33 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम तय की गई।
  • विभागों के जरिए विकास काम कराए गए। पशुपालन, सिंचाई, बागवानी, कृषि, ऊर्जा, पर्यटन और खाद्य आपूर्ति जैसे अलग-अलग विभागों के जरिए 16 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए।
  • राहत उपायों के तहत 17 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे प्रभावित परिवारों के बैंक खातों या हाथों में पहुंचाई गई।
  • सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि टूटे हुए बागानों का मुआवजा, बकरी-भेड़ पालन के लिए मदद और बीज-पौधे बांटने का काम किया गया, ताकि किसान और बागवान दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

आगे की आपदा से निपटने की पूरी तैयारी

  • धामी सरकार ने सिर्फ पुरानी भरपाई करने के बजाय भविष्य की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया है। उत्तराखंड में अब एक मजबूत डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है।
  • अर्ली वार्निंग सिस्टम (चेतावनी देने वाले तंत्र), मौसम की सटीक जानकारी देने वाले प्लेटफॉर्म और समय-समय पर मॉक ड्रिल का सहारा लिया जा रहा है।
  • नदियों के किनारे बाढ़ से बचाव के लिए मजबूत दीवारें, पहाड़ी ढलानों को बचाने के उपाय और आधुनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल हो रहा है ताकि भविष्य में नुकसान को कम से कम किया जा सके।

सरकार हर परिवार के साथ खड़ी- सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस रिकवरी की समीक्षा करते हुए साफ कहा था, 'धराली की आपदा सिर्फ ढांचा खड़ा करने की चुनौती नहीं थी, बल्कि यह प्रभावित परिवारों की ज़िंदगी और भविष्य को बचाने की जिम्मेदारी थी। हमारी सरकार पहले दिन से हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।'

जोशीमठ संकट से लेकर हर कदम पर साथ

उत्तराखंड सरकार का यह 'केयरिंग अप्रोच' सिर्फ धराली तक सीमित नहीं था। जब दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के दौरान जोशीमठ में ज़मीन धंसने (Land Subsidence) का गंभीर संकट आया था, तब भी सरकार ने युद्धस्तर पर काम किया था। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित होटलों, स्कूलों और गेस्ट हाउसों में शरण दी गई। तुरंत राहत के रूप में ₹4,000 मासिक किराया और ₹1.5 लाख की फौरी सहायता दी गई। संकट क्षेत्र में बिजली-पानी के बिल माफ किए गए। पुनर्वास के लिए परिवारों को तीन बेहतरीन विकल्प दिए गए, नकद मुआवजा, जमीन और मकान, या सुरक्षित जगह पर सरकार द्वारा बनाया गया घर। केंद्र सरकार के सहयोग से ₹1,658 करोड़ से ज्यादा का रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन प्लान मंजूर किया गया ताकि इस ऐतिहासिक शहर को वैज्ञानिक तरीके से बचाया जा सके।