September 18, 2026

US IT Layoffs Viral Post: 'सिर्फ 5 मिनट की कॉल और निकाल दी पूरी इंडियन टीम, पोस्ट पढ़कर कांप उठे लोग

US IT Layoffs Viral Post: 'सिर्फ 5 मिनट की कॉल और निकाल दी पूरी इंडियन टीम, पोस्ट पढ़कर कांप उठे लोग

वैश्विक टेक जगत में छंटनी (Layoffs) का खौफनाक दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कभी लाखों के पैकेज, ऑनसाइट पोस्टिंग और अमेरिकी डॉलर में मोटी तनख्वाह के सपने दिखाकर हायर किए जाने वाले भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के साथ अंतरराष्ट्रीय कंपनियां किस कदर बेरहमी से पेश आ रही हैं, इसका एक रूह कंपा देने वाला उदाहरण सोशल मीडिया पर सामने आया है। अमेरिका स्थित एक प्रमुख टेक और सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत एक वरिष्ठ भारतीय टेक प्रोफेशनल की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। पोस्ट में खुलासा किया गया है कि कंपनी प्रबंधन ने सुबह बिना किसी पूर्व सूचना या ईमेल के एक अचानक 5 मिनट की वर्चुअल मीटिंग बुलाई और उसी कॉल में पूरी की पूरी भारतीय कोर इंजीनियरिंग टीम को एक झटके में नौकरी से बाहर (Layoff) का रास्ता दिखा दिया। इस घटना के वायरल होते ही कॉर्पोरेट जगत के अमानवीय व्यवहार को लेकर चौतरफा तीखी बहस छिड़ गई है।

'गूगल मीट खुली, 5 मिनट में सब खत्म': वायरल पोस्ट का दर्दनाक ब्योरा

प्रभावित टेक प्रोफेशनल ने पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म (LinkedIn और Reddit) पर अपना दर्द साझा करते हुए लिखा कि टीम पिछले कई महीनों से दिन-रात एक करके एक बड़े प्रोडक्ट रोलआउट पर काम कर रही थी। प्रोजेक्ट की समयसीमा को पूरा करने के लिए भारतीय डेवलपर्स अमेरिकी टाइम जोन के मुताबिक देर रात तक काम कर रहे थे।

पोस्ट के मुताबिक:

  • सुबह के समय अचानक कैलेंडर पर 5 मिनट की एक संक्षिप्त मीटिंग शेड्यूल हुई, जिसका टाइटल केवल 'क्विक अपडेट' था।

  • जैसे ही सभी भारतीय इंजीनियर कॉल से जुड़े, अमेरिकी नेतृत्व (यूएस मैनेजमेंट) के एक वरिष्ठ अधिकारी और एचआर प्रतिनिधि ने सीधे बोलना शुरू किया।

  • बिना किसी भूमिका या सहानुभूति के एक तैयार स्क्रिप्ट पढ़ी गई: "ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग और लागत कटौती के चलते आपकी पूरी टीम की भूमिकाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है।"

  • कर्मचारियों को अपनी बात रखने या सवाल पूछने का कोई मौका नहीं दिया गया।

  • ठीक 5 मिनट पूरे होते ही कॉल काट दी गई और अगले 60 सेकंड के भीतर सभी कर्मचारियों के स्लैक, गिटहब, आधिकारिक ईमेल और ऑफिस लैपटॉप का सिस्टम एक्सेस काट दिया गया।

भारतीय प्रतिभाओं को केवल 'सस्ता लेबर' समझने पर फूटा गुस्सा

इस वायरल पोस्ट ने भारतीय कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स अमेरिकी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दोहरे रवैये पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं।

कमेंट बॉक्स में यूजर्स ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • यूएस बनाम इंडिया वर्क कल्चर: जब कंपनियों को कम लागत में 16-16 घंटे काम कराना होता है, तब वे भारत में ऑफशोर टीमें खड़ी करती हैं, लेकिन जब वित्तीय रिपोर्ट में शेयरधारकों को मुनाफा दिखाना होता है, तो सबसे पहले भारतीय टीमों पर ही कैंची चलाई जाती है।

  • अचानक सिस्टम लॉगआउट का अपमान: वर्षों की निष्ठा और मेहनत के बदले कर्मचारियों को अपने सहकर्मियों को फेयरवेल या गुडबाय मैसेज भेजने तक का समय नहीं दिया गया। इसे आधुनिक दासता और कॉर्पोरेट जगत का सबसे क्रूर चेहरा बताया गया।

  • ईएमआई और आश्रित परिवारों का संकट: बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम में रहने वाले इन डेवलपर्स के सिर पर होम लोन, बच्चों की स्कूल फीस और बुजुर्ग माता-पिता की दवाओं का भारी खर्च है, जो एक झटके में शून्य पर आ गया।

एआई ऑटोमेशन और मार्जिन का दबाव: क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Generative AI) टूल्स के तेजी से अपनाने और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के दौर में आईटी कंपनियां अब 'लीन टीम' (कम कर्मचारियों वाली टीम) के मॉडल पर काम कर रही हैं।

उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक वेंचर कैपिटलिस्ट और निवेशक कंपनियों पर परिचालन लागत (Operating Costs) घटाने का भारी दबाव बना रहे हैं। कोडिंग और बेसिक डेवलपमेंट का काम अब एआई टूल्स के जरिए तेजी से होने लगा है, जिसके चलते मिड-लेवल और बैकएंड सपोर्ट वाली पूरी-की-पूरी टीमों को रातों-रात गैर-जरूरी (Redundant) घोषित कर दिया जा रहा है। अमेरिका में स्थानीय राजनीतिक दबाव के कारण भी कई कंपनियां विदेशी व ऑफशोरिंग आउटसोर्सिंग को सीमित करने का दिखावा कर रही हैं।

कॉर्पोरेट वफादारी एक भ्रम: करियर विशेषज्ञों की युवाओं को सलाह

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद करियर काउंसलर्स और वरिष्ठ टेक लीडर्स ने भारतीय युवाओं को एक बड़ा सबक याद दिलाया है:

  • कंपनी से प्यार करें, ब्रांड से नहीं: किसी भी कॉरपोरेट कंपनी के लिए कोई भी कर्मचारी अपरिहार्य नहीं होता। कंपनी केवल बैलेंस शीट देखती है, इसलिए कभी भी अपने स्वास्थ्य, परिवार और मानसिक शांति की कीमत पर अत्यधिक ओवरवर्क न करें।

  • इमरजेंसी फंड का निर्माण: हर कामकाजी युवा के पास कम से कम 6 से 9 महीने के अनिवार्य खर्चों (ईएमआई, राशन, किराया) के बराबर इमरजेंसी फंड लिक्विड रूप में हमेशा तैयार होना चाहिए।

  • निरंतर अपस्किलिंग और नेटवर्किंग: केवल कंपनी के इंटरनल टूल्स पर निर्भर रहने के बजाय खुद को नए एआई आर्किटेक्चर, क्लाउड कंप्यूटिंग और ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगातार अपडेट रखें और अपना प्रोफेशनल नेटवर्क सक्रिय बनाए रखें।