अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पोस्ट में AI से तैयार तस्वीरों और ट्रान्सफ़ॉर्मर फिल्म के किरदारों का इस्तेमाल करते हुए 'मिस्टर सिंह' को निशाना बनाया गया था. इसमें लिखा था, 'खुद देश छोड़कर चले जाओ या नतीजा भुगतो.' एक अन्य संदेश में लिखा गया, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती, मिस्टर सिंह.'
DHS की इस पोस्ट में एक दाढ़ी वाले भूरे रंग के व्यक्ति की तस्वीर दिखाई गई थी. इसे लेकर भारतीय-अमेरिकी और सिख संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई. उनका कहना था कि एक खास सरनेम और समुदाय को सड़क सुरक्षा और अवैध अप्रवास जैसे मुद्दों से जोड़ना भेदभावपूर्ण है. कई संगठनों ने इस पोस्ट को नस्लवादी और अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ बताया.
विवाद बढ़ने के बाद DHS ने गुरुवार को संबंधित विज्ञापन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से हटा दिया. यह पोस्ट विभाग की उस मुहिम का हिस्सा थी, जिसमें बिना लाइसेंस के कमर्शियल ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का संदेश दिया जा रहा था. पोस्ट हटाए जाने का भारतीय-अमेरिकी और सिख संगठनों ने स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि केवल पोस्ट हटाना पर्याप्त नहीं है.
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हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कहा कि संघीय एजेंसी द्वारा भारतीय या सिख व्यक्ति के रूप में दिखने वाले शख्स की नस्ली पहचान वाली तस्वीर का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाना गंभीर मामला है. संगठन ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी, सिख, हिंदू और दक्षिण एशियाई समुदाय अपने ही देश से बेहतर व्यवहार की उम्मीद करते हैं. HAF ने इस पोस्ट को लेकर जांच की मांग भी उठाई.
सिख कोएलिशन ने भी DHS के संदेश पर सवाल उठाया. संगठन ने कहा कि 9/11 के 25 साल बाद भी सिखों को उनकी शक्ल-सूरत के आधार पर निशाना बनाए जाने की स्थिति बनी हुई है. संगठन के मुताबिक अमेरिका में लाखों सिखों का सरनेम सिंह है और इसका अर्थ 'शेर' होता है. उसने कहा कि सरकारी एजेंसी की ओर से किसी सरनेम को दुश्मन के तौर पर पेश करना पूरे समुदाय के प्रति संदेह और डर को बढ़ा सकता है.
पीटीआई के मुताबिक, नॉर्थ अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन (CoHNA) ने भी DHS को निशाने पर लिया. संगठन ने कहा कि कानून लागू किया जाना चाहिए, लेकिन किसी पूरे समुदाय का कैरिकेचर बनाकर उसे निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. संगठन के अनुसार खतरनाक ड्राइवर अलग-अलग नस्ल, धर्म और सरनेम वाले हो सकते हैं. केवल कुछ सरनेम को चुनकर उन्हें सड़क सुरक्षा से जोड़ना समस्या का समाधान नहीं है.
इस विवाद में कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम और अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी DHS की आलोचना की. न्यूसम के कार्यालय ने इस पोस्ट को सिख समुदाय को निशाना बनाने वाला नस्लवादी प्रचार बताया. वहीं राजा ने कहा कि अमेरिकी सरकार को अपनी ताकत का इस्तेमाल लोगों को बदनाम करने या उनकी आस्था, विरासत और पहचान के आधार पर यह बताने के लिए नहीं करना चाहिए कि वे अमेरिका का हिस्सा नहीं हैं.

सांसद राजा ने कहा कि अमेरिका में 1.60 लाख से ज्यादा लोग सिंह सरनेम साझा करते हैं. उनके मुताबिक जब सरकार इतने बड़े समुदाय द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नाम को निशाना बनाती है तो इससे विदेशी-विरोधी भावना बढ़ सकती है और पूरे समुदाय पर संदेह पैदा हो सकता है. उन्होंने DHS की पोस्ट को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी संदेशों में किसी समुदाय को सामूहिक रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
हालांकि पोस्ट हटाने के बाद DHS ने अपने अभियान का बचाव भी किया. विभाग ने ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया. हरजिंदर को पिछले साल एक सड़क हादसे के बाद गिरफ्तार किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक यह हादसा अवैध यू-टर्न के कारण हुआ था और इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी. DHS ने सड़क सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़े अपने अभियान के संदर्भ में इस मामले का इस्तेमाल किया.
DHS की एक अन्य पोस्ट में ट्रान्सफ़ॉर्मर फिल्म के मुख्य खलनायक मेगाट्रॉन को दिखाया गया. वीडियो में मेगाट्रॉन कुछ 'एलियंस' की रिहाई की मांग करता नजर आता है. अमेरिकी प्रशासन की भाषा में 'एलियंस' शब्द विदेशी नागरिकों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. वीडियो में ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकज़ान बेइशेकीव, अखरोर बोझोरोव और जसवीर सिंह का जिक्र किया गया, जिन्हें अलग-अलग सड़क हादसों या अन्य अपराधों से जोड़ा गया.
एक अन्य पोस्ट में ट्रान्सफ़ॉर्मर के मुख्य किरदार ऑप्टिमस प्राइम को DHS के पैच के साथ दिखाया गया. उसके सामने वही भूरे रंग की दाढ़ी वाले व्यक्ति का कैरेक्टर था. इसके साथ 'Self-deport or find out' संदेश लिखा गया था. DHS ने एक पोस्ट में यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति अमेरिका में शत्रुतापूर्ण इरादे से आता है तो उसे यह पता होना चाहिए कि अमेरिका अपनी सुरक्षा, अपने मूल्यों और अपने देश की रक्षा करेगा.
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में DHS का CBP होम कार्यक्रम भी है. यह कार्यक्रम पात्र बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को अमेरिका छोड़ने की अपनी इच्छा दर्ज कराने की सुविधा देता है. DHS के मुताबिक, जो लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने के लिए इस कार्यक्रम में रजिस्टर करते हैं, उन्हें यात्रा में सहायता दी जा सकती है. इसके अलावा उन्हें अमेरिका से बाहर निकलने के बाद 2,600 अमेरिकी डॉलर का एग्जिट बोनस दिए जाने की भी जानकारी विभाग ने दी है.
DHS की 'मिस्टर सिंह' वाली पोस्ट हटाए जाने के बाद भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने इसे अपनी आपत्ति का परिणाम बताया. हालांकि संगठनों का कहना है कि मामला केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. उनका तर्क है कि सरकारी एजेंसियों को कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते समय किसी खास धर्म, समुदाय, नस्ल या सरनेम को अपराध से जोड़ने से बचना चाहिए.
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