August 12, 2026

US जज ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी समेत 3 के खिलाफ क्रिमिनल केस किया खारिज, जानिए क्या है पूरा मामला

By Oneindia Staff

Time Published: Wednesday, August 12, 2026, 16:01 [IST]

US Judge Dismisses Criminal Case: भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी के लिए अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत की खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के निदेशक रहे वनीत जैन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गारौफिस ने 10 अगस्त 2026 को अभियोजन पक्ष की अपील स्वीकार करते हुए मामले को 'With Prejudice' खारिज किया। इसका मतलब है कि इन्हीं आरोपों के आधार पर यह आपराधिक मामला दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने गौतम अदाणी या अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए मूल आरोपों को गलत साबित कर दिया है। मामले में कोई ट्रायल नहीं हुआ, गवाहों की गवाही नहीं हुई और आरोपों से जुड़े सबूतों की अदालत में सुनवाई नहीं हुई। जज ने भी स्पष्ट किया कि केस खारिज करने का आदेश आरोपों की मेरिट पर कोई राय नहीं है।

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करीब दो साल पुराने मामले का अंत

यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था। अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस व्यवस्था से अदाणी समूह की एक कंपनी को अरबों डॉलर के संभावित मुनाफे का फायदा मिल सकता था।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया था कि अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन नीतियों के बारे में गुमराह किया गया। अदाणी समूह और संबंधित आरोपियों ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया और किसी भी गलत काम से इनकार किया।

अमेरिकी न्याय विभाग ने केस वापस लेने की मांग क्यों की?

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग ने इस साल मामले को आगे न बढ़ाने का फैसला किया। विभाग की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यह मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा है, इसे साबित करना मुश्किल है और इसे अमेरिकी न्याय विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

DOJ ने यह भी तर्क दिया कि कथित गतिविधियों का बड़ा हिस्सा भारत में हुआ था और अमेरिका को ऐसे मामलों में अपनी आपराधिक कार्रवाई की सीमा पर विचार करना चाहिए। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर ने मामले को खारिज करने के फैसले का बचाव किया था।

लेकिन जज निकोलस गारौफिस ने सरकार की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामले को खारिज करने के फैसले में कुछ ऐसी अनियमितताएं थीं, जो चिंता पैदा करती हैं। उनके मुताबिक, मैककॉट्टर ने जांच और अभियोजन से जुड़े कई अधिकारियों की पेशेवर राय को दरकिनार करते हुए खुद फैसले पर भरोसा किया।

अदाणी के 10 अरब डॉलर के निवेश का मुद्दा भी उठा

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अदाणी के नवंबर 2024 में किए गए अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश के वादे को लेकर हुई। अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि कहीं इस निवेश प्रस्ताव का आपराधिक केस खत्म करने के फैसले से कोई संबंध तो नहीं था।

अदाणी ने अदालत में शपथपत्र देकर कहा कि उन्हें किसी ऐसे सौदे या बदले की जानकारी नहीं है जिसके तहत अमेरिका में निवेश के बदले आपराधिक केस खत्म किया गया हो। हालांकि, दस्तावेजों से यह सामने आया कि अदाणी के वकीलों ने न्याय विभाग के साथ बातचीत में अमेरिका में प्रस्तावित निवेश को मामले के समाधान के संभावित हिस्से के तौर पर उठाया था।

जज गारौफिस ने अंततः कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि अदाणी का 10 अरब डॉलर का निवेश प्रस्ताव DOJ के आधिकारिक फैसले का आधार नहीं था। हालांकि, उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह के प्रस्तावों का कानून के समान और निष्पक्ष इस्तेमाल पर क्या असर पड़ता है, यह जनता के आकलन का विषय है।

क्या अदाणी पूरी तरह कानूनी आरोपों से मुक्त हो गए?

यहां आपराधिक और सिविल मामलों के बीच अंतर समझना जरूरी है। न्यूयॉर्क की अदालत ने क्रिमिनल केस खारिज किया है, लेकिन अदाणी और सागर अदाणी से जुड़ा एक अलग सिविल मामला अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC के साथ समझौते के जरिए निपटाया गया है।

मई 2026 में SEC ने बताया था कि गौतम अदाणी ने 60 लाख डॉलर और सागर अदाणी ने 1.2 करोड़ डॉलर की सिविल पेनल्टी पर सहमति जताई। दोनों ने आरोपों को स्वीकार या खारिज किए बिना समझौता किया था।

इसके अलावा, अदाणी एंटरप्राइजेज ने ईरान से जुड़े LPG आयात पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले को निपटाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ 27.5 करोड़ डॉलर के समझौते पर भी सहमति जताई थी। यह मामला भी मौजूदा क्रिमिनल केस से अलग है।

गौतम अदाणी ने क्या कहा?

अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया। उन्होंने अपने समर्थकों के विश्वास के लिए धन्यवाद दिया और समूह की भविष्य की प्रतिबद्धताओं को दोहराया।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शुरू हुई थी बड़ी हलचल

अदाणी समूह पर वैश्विक स्तर पर जांच और सवालों का दौर जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद तेज हुआ था। रिपोर्ट में समूह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदाणी समूह ने इन आरोपों को खारिज किया था।

इसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली और अदाणी समूह के बाजार मूल्य में बड़ी कमी आई। नवंबर 2024 में अमेरिकी आपराधिक मामला सामने आने के बाद समूह एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनी और निवेशकों की निगाहों में आ गया।

अब क्या बदला?

अमेरिकी अदालत के ताजा आदेश के बाद गौतम अदाणी, सागर अदाणी और वनीत जैन के खिलाफ 2024 में दर्ज आपराधिक अभियोग का अध्याय बंद हो गया है। 'With prejudice' के साथ मामला खारिज होने का अर्थ है कि इन्हीं आरोपों के आधार पर अभियोजन पक्ष इसे दोबारा दाखिल नहीं कर सकता।

हालांकि, जज गारौफिस ने यह स्पष्ट किया है कि उनका आदेश इस बात का फैसला नहीं है कि मूल आरोप सही थे या गलत। यह फैसला मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार द्वारा आपराधिक मुकदमा आगे नहीं बढ़ाने के निर्णय को स्वीकार करने से जुड़ा है। इसलिए इसे आरोपों से जुड़े तथ्यों पर अदालत की क्लीन चिट के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।

इस मामले ने अमेरिकी अदालतों में अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट मामलों, अभियोजन पक्ष के विवेक और सरकार द्वारा हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पर भी नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल अदाणी समूह के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि 2024 से चल रहा यह आपराधिक मामला अब कानूनी तौर पर समाप्त हो चुका है।