मिडिल ईस्ट टेंशन ने दुनियाभर में तेल-गैस की सप्लाई पर असर डाला. भारत में भी इसका असर देखने को मिला, लेकिन मोदी सरकार के प्लान-B के तहत आयात डेस्टिनेशन में विविधिता और देश में उत्पादन बढ़ाने जैसे कदमों से ये काफी कम रहा. यही नहीं अब भारत दूसरे देशों को भी तेल सप्लाई करने में अहम भूमिका निभा रहा है. वोर्टेक्सा के ताजा आंकड़ों के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी निर्यात में मंदी और अमेरिकी शिपमेंट में कमजोरी आने के चलते अब भारत यूरोप को डीजल की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश बनकर उभरा है.
यूरोप को 60% डीजल सप्लाई भारत से
पीटीआई की रिपोर्ट में इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगस्त में बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट से होकर यूरोप जाने वाले जहाजों पर पहुंचे डीजल का लगभग 60 फीसदी हिस्सा भारतीय रिफाइनरों द्वारा सप्लाई किया गया था. बीते महीने यूरोप जाने वाले प्रमुख शिपिंग रूट से लगभग 2,00,000 बैरल प्रतिदिन डीजल या गैसोल की आवाजाही हुई. मार्च और अप्रैल में इस मार्ग से प्रवाह लगभग ठप हो जाने के बाद यह आंकड़ा पिछले वर्ष के स्तर के करीब था.
भारत दुनिया का चौथा बड़ा रिफाइनर
डीजल सप्लाई के मामले में भारत की बढ़ती भूमिका का कारण यह है कि देश के रिफाइनरों के पास अतिरिक्त क्षमता मौजूद है. भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, जिसकी स्थापित क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जो घरेलू ईंधन की मांग से अधिक है. 2025-26 में भारत ने 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जिससे यह रिफाइनंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के विश्व के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गया. इन ईंधनों को अब यूरोप और रूस में बाजार मिल रहे हैं.
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रूस-US से यूरोपीय सप्लाई में गिरावट
अगस्त 2026 में बाब-अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) के रास्ते अमेरिका से यूरोप जाने वाले डीजल शिपमेंट में तेज गिरावट आई है, तो वहीं रूसी डीजल निर्यात भी बुरी तरह फिसला है, जो कभी यूरोपीय आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत था. वोर्टेक्सा के मुताबिक, अगस्त के पहले 25 दिनों में रूस का समुद्री रूट से डीजल और गैसोल का निर्यात औसतन केवल 1,50,000 बैरल प्रति दिन रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 6,10,000 बैरल प्रति दिन कम था.
रिपोर्ट में बताया गया है कि Russia-Ukraine War के बीच यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों और निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार रुकावट पेश आई है. सिर्फ जुलाई और अगस्त महीने में ही रूसी रिफाइनरियों पर करीब 32 हमले हुए. वोर्टेक्सा के आंकड़ों को देखें, तो 2,60,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद इसकी क्षमता का सिर्फ करीब 28 फीसदी ही ऑपरेशनल रह गया. इन हमलों से निर्यात टर्मिनल भी प्रभावित हुए हैं.
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