September 7, 2026

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा कायाकल्प: UPTEN के जरिए 'गोल्डन ऑवर' में इलाज की तैयारी, 48 घंटे तक मिलेगा मुफ्त इमरजेंसी उपचार - Up18 News

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर जीवन रक्षक इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह एकीकृत और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में जुटी है। इसी उद्देश्य के तहत उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क (UPTEN) को एक ऐसे एकीकृत आपात चिकित्सा नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जिसका मुख्य लक्ष्य दुर्घटना या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर मरीज को उचित उपचार तक पहुंचाना है।

​यूपीटीईएन के माध्यम से प्रदेश की बिखरी हुई ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुल 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां शामिल होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य मरीज की आवश्यकता के अनुसार उसे नजदीकी और पूरी तरह सक्षम चिकित्सा केंद्र तक तेजी से पहुंचाना है।

​हर साल 12 हजार जानें बचाने का लक्ष्य

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने जानकारी देते हुए बताया कि इस उन्नत व्यवस्था के जरिए हर वर्ष प्रदेश में 10 हजार से 12 हजार लोगों की बहुमूल्य जान बचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सटीक इलाज मिलने से गंभीर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में भारी कमी लाई जा सकती है। इसके लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही एकीकृत आपात नेटवर्क में पिरोने पर जोर दिया जाएगा।

​उन्होंने बताया कि यूपीटीईएन का उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय आपातकाल की सूचना मिलते ही इलाज की प्रक्रिया का शुभारंभ करना है। इस योजना के तहत 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस को सीधे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल परिवहन का एक साधन न मानकर चलते-फिरते ‘आपात उपचार केंद्र’ के रूप में उपयोग करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर इस पूरे नेटवर्क के सुचारू संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन केंद्रों के जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस की आवाजाही, अस्पतालों में बेड की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतरीन समन्वय स्थापित किया जाएगा।

​30 से 50 प्रतिशत तक कम होगा रिस्पांस टाइम

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इस नई योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया समय (Response Time) में 30 से 50 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य है। वहीं, अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के वास्ते करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई (AI) आधारित ट्रायेज जैसी आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल प्रस्तावित है।

​इसका मूल उद्देश्य यह तय करना है कि किस मरीज को किस अस्पताल या किस विशेषज्ञ विभाग में भेजा जाना चाहिए। यानी ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के फार्मूले पर पूरा इमरजेंसी सिस्टम संचालित होगा। इस योजना में आम नागरिकों को भी आपातकालीन व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बनाने पर विचार किया गया है, जिसके तहत तीन स्तरों पर ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क’ तैयार किया जा रहा है। पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले कर्मी होंगे; दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर होंगे; जबकि तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें संकट के समय शुरुआती मदद के लिए तैयार किया जाएगा।

​48 घंटे तक मिलेगा मुफ्त इमरजेंसी इलाज

योजना के सबसे बड़े प्रावधानों में से एक यह है कि इसके तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक पूरी तरह मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना या किसी अन्य गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिजनों पर तत्काल इलाज के खर्च का आर्थिक दबाव कम करना है, ताकि पैसों की कमी के कारण किसी भी व्यक्ति के उपचार में एक पल की भी देरी न हो।

इसके अतिरिक्त, यूपीटीईएन के सुचारू संचालन के लिए एक अलग बजट, सुदृढ़ मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर (EMO) कैडर का गठन करने, एम्स (AIIMS) के अनुरूप वेतनमान तय करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था जैसे कई अहम कदम शामिल हैं।