पिलखुवा की आशना चौधरी ने UPSC में AIR 116 किया हासिल, बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर बनीं IPS अधिकारी
Updated: Thu, 24 Sep 2026 08:41 AM (IST)
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UPSC Rank 116, आशना चौधरी (Image-Instagram)
Success Story: अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो असफलता भी सफलता की राह का हिस्सा बन जाती है. IPS आशना चौधरी की UPSC जर्नी भी कुछ ऐसी ही है. दो बार असफल होने के बाद उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों को समझा, रणनीति बदली और तीसरे प्रयास में UPSC पास कर अपने सपने को पूरा किया. अब उनकी कहानी कई युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
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छोटे शहर की बेटी के अपना सपना किया साकार
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा की रहने वाली आशना चौधरी ने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा. उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर कभी समझौता नहीं किया. लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा रखते हुए उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और आखिरकार अपने सपने को हकीकत में बदल दिया.
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पढ़ाई में भी रही हैं काफी होशियार
आशना पढ़ाई में शुरू से ही अच्छी रही हैं. उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 96.5 फीसदी अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन किया. आगे उन्होंने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर डिग्री पूरी की.
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पहले दो प्रयासों में मिली असफलता
UPSC जैसी कठिन परीक्षा में आशना को भी शुरुआत में सफलता नहीं मिली. पहले दो प्रयासों में असफल होने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी पर दोबारा काम किया. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि कहां कमी रह गई और किन चीजों में बदलाव की जरूरत है.
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तीसरे प्रयास में बदल गई पूरी कहानी
दो असफलताओं के बाद आशना ने अपनी तैयारी की रणनीति बदली. उन्होंने गलतियों का एनालिसिस किया, पढ़ाई को ज्यादा व्यवस्थित किया और रिविजन व मॉक टेस्ट पर फोकस बढ़ाया. लगातार मेहनत का नतीजा तीसरे प्रयास में सामने आया और उन्होंने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.
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UPSC में हासिल की AIR 116
आशना चौधरी ने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 116 हासिल की. उनकी खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी तैयारी में सेल्फ-स्टडी पर भरोसा रखा और कोचिंग के बिना परीक्षा की तैयारी की. उनकी सफलता यह दिखाती है कि सही रणनीति, नियमित पढ़ाई और अपनी गलतियों से सीखना तैयारी में काफी अहम भूमिका निभाता है.
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पढ़ाई के साथ समाजसेवा से भी जुड़ीं
आशना की जर्नी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रही. उन्होंने एक NGO के साथ भी काम किया, जहां जरूरतमंद बच्चों की मदद से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया. इस अनुभव ने उन्हें समाज और लोगों की समस्याओं को करीब से समझने का मौका दिया.
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सोशल मीडिया पर भी हैं काफी एक्टिव
आशना चौधरी सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं. इंस्टाग्राम पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं, जहां वह अपनी जर्नी और तैयारी से जुड़ी बातें शेयर करती हैं. उनकी कहानी से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यही है कि दो बार मिली असफलता के बाद भी कोशिश जारी रखी जाए, तो मंजिल हासिल की जा सकती है.
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परिवार से मिली प्रेरणा
आशना चौधरी की सफलता की कहानी में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है. अपने परिवार से प्रेरित होकर ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की. परिवार के सपोर्ट और खुद पर भरोसे ने उन्हें असफलताओं के बाद भी आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी.
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