यूं तो UPSC की परीक्षा सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि लाखों युवाओं का सपना और बरसों की तपस्या होती है. लेकिन जब यह सपना टूटता है, तो दिल और उम्मीद दोनों बिखर जाते हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर एक 26 साल के पूर्व UPSC एस्पिरेंट की भावुक पोस्ट ने इंटरनेट पर हर किसी को भावुक कर दिया है. युवक ने अपनी सालों की मेहनत, नोट्स और किताबों को महज 464 रुपये में रद्दी वाले के हाथों बेच दिया.
2022 में पूरा हुआ ग्रेजुएशन, 3 बार लिखा मेन्स
साल 2022 में ग्रेजुएशन पूरा करने वाले इस अभ्यर्थी ने अपनी जिंदगी के करीब 4 से 5 साल देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सर्विसेज यानी UPSC परीक्षा की तैयारी में खपा दिए. उसने साल 2023, 2024 और 2025 में लगातार तीन बार UPSC Mains का एग्जाम लिखा. लेकिन बदकिस्मती से इस साल वह प्रीलिम्स की पहली सीढ़ी भी पार नहीं कर पाया.
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बार-बार के असंतोष और निराशा के बाद उसने इस सफर को हमेशा के लिए खत्म करने का कड़ा फैसला ले लिया.
'अब सब खत्म हो चुका है...'
अपनी पोस्ट में युवक ने लिखा कि उसने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक की सारी पढ़ाई की सामग्री, NCERT किताबें, एम. लक्ष्मीकांत, शुरुआती टेस्ट पेपर्स, और बरसों में बनाए अपने हाथ के नोट्स सब रद्दी वाले के तराजू पर रख दिए.
युवक ने लिखा, 'एक बाहरी इंसान के लिए वह सिर्फ पुरानी किताबों का ढेर था. लेकिन मेरे लिए वह 4 बजे सुबह उठकर लिखे गए हर उत्तर, प्रिलिम्स के अनगिनत मॉक टेस्ट, खुद तैयार किए गए एनालिसिस शीट्स और मेरी अपनी लिखावट में लिखे नोट्स का ढेर था, जिस पर मुझे कभी बहुत गर्व होता था.' जैसे-जैसे किताबें तराजू के एक पलड़े पर रखी जा रही थीं, उसके अंदर का कुछ हिस्सा सुन्न पड़ रहा था.
तैयारी के चक्कर में गंवाई नौकरी और प्यार
इस सपने की कीमत सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं थी. युवक ने बताया कि 2022 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने एक हाई-पेइंग जॉब (उच्च वेतन वाली नौकरी) का ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि उसे अपने UPSC के सपने पर पूरा यकीन था. आज हालत यह है कि नौकरी छोड़ने के उस फैसले पर लोग या तो उसका मजाक उड़ाते हैं या फिर उस पर दया खाते हैं. यही नहीं, इस कठिन और थका देने वाले सफर के दौरान उसने अपना 4 साल पुराना रिश्ता भी खो दिया.
सालों की मेहनत का मोल: सिर्फ 464 रुपये
तमाम उतार-चढ़ाव और हर हार के बाद एक बार फिर कोशिश करने का हौसला जुटाने वाले इस युवा के पूरे संघर्ष को रद्दी वाले ने तराजू में तोल दिया. कबाड़ी ने उसकी बरसों की मेहनत के बदले महज ₹464 दिए. पास खड़े किसी शख्स ने उससे यह भी कहा कि अगर वह थोड़ा मोल-भाव करता तो शायद 600 रुपये तक मिल जाते. लेकिन युवक के जवाब में उसका सारा दर्द और बिखरा हुआ हौसला साफ छलक आया.
उसने लिखा, 'किताबों से जो मिलना था, वो मिला नहीं. फिर और 100-200 रुपये ज्यादा या कम मिले तो क्या ही फर्क पड़ता है.'
मंदिर में दान कर दिए सारे पैसे, कहा- 'कोई अगली बार नहीं होगा'
युवक ने उन 464 रुपयों को अपने पास रखने के बजाय पास के एक मंदिर में दान कर दिया. उसने साफ लिखा कि यह दान किसी पुण्य, किस्मत या फिर से नई शुरुआत (अगली बार) के लिए नहीं था. उसने लिखा, 'कोई 'नेक्स्ट टाइम' (अगली बार) नहीं है.' भगवान से अपनी शिकायत और दर्द को बयां करते हुए उसने अंत में लिखा, 'मैं बस ऊपर वाले से इतना कहना चाहता था कि इतना सब होने के बावजूद मेरा दिल आपसे ज्यादा बड़ा है.'
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