UP TET 2026 Result: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (UPTET) 2026 रिजल्ट मामले में बड़ी संख्या में कैंडिडेट्स को जोर झटका धीरे से दिया है. UPESSC ने स्पष्ट किया है कि वह UP TET 2026 के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स के OMR शीट की जांच नहीं करेगा. तो वहीं UP TET 2026 में नाॅर्मलाइजेशन की वजह से कम नंबर मिलने वाले मामलों पर भी UPESSC विचार नहीं करेगा. UPESSC ने कहा है कि 4 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला लिया गया है.
आइए, पूरा मामला विस्तार से जानते हैं. जानते हैं कि UP TET 2026 OMR शीट और नाॅर्मलाइजेशन मामला क्या है. UPESSC ने इन मामलों पर विचार ना करने को लेकर क्या तर्क दिया है. विस्तार से पूरा मामला जानते हैं.
OMR शीट में गड़बड़ी की वजह से UP TET आवेदन रद्द
UP TET 2026 में 17 लाख से अधिक कैंडिडेट्स से शामिल हुए थे, जिसका रिजल्ट बीते दिनों UPESSC की तरफ से जारी किया गया था. इसके बाद बड़ी संख्या में ऐसे कैंडिडेट्स सामने आए थे, जिनका आवेदन ही निरस्त हो गया था. UPESSC ने कई कैंडिडेट्स का आवेदन OMR शीट में गड़बड़ी की वजह से रद्द कर दिया था. ऐसे कैंडिडेट्स की संख्या 50 हजार से अधिक बताई जा रही है. ये कैंडिडेट्स रिजल्ट जारी होने के बाद UPESSC ऑफिस के बाहर जुटे थे. इसे देखते हुए UPESSC ने ईमेल जारी करन अपनी शिकायतें भेजने को कहा था.
नाॅर्मलाइजेशन की वजह से कम मिले थे नंबर
UPESSC की तरफ से UP TET 2026 की शिकायतों को लेकर ईमेल जारी किया था. इसमें कई ऐसे कैंडिडेट्स ने भी शिकायत की थी, उन्हें UPTET 2026 में नाॅर्मलाइजेशन लागू किए जाने की वजह से कम नंबर मिले हैं. ऐसे मामलों पर भी UPESSC ने विचार करने से मना कर दिया है.
6 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला
UPTET 2026 को लेकर मिली शिकायतों की जांच के लिए UPESSC ने 6 सदस्यीय कमेटी गठित की थी. इस कमेटी ने शिकायतों का 4 कैटेगरी में बांटा था, जिसमें OMR से जुड़े मामले, नाॅर्मलाइजेशन की वजह से कम नंबर, आंसर-की के आधार पर कम नंबर और रिजल्ट में जन्मतिथि, नाम, पिता और माता का गलत नाम दर्ज शामिल था. शिकायतों को 4 कैटेगरी में बांटने के साथ ही कमेटी ने UPESSC को एक रिपोर्ट भी सौंपी थी, जिसके आधार पर UPESSC ने फैसला लिया है.
UPESSC ने क्या बताई वजह?
UPESSC ने स्पष्ट किया है कि वह UP TET 2026 में OMR शीट में गड़बड़ी, नाॅर्मलाइजेशन की वजह से कम नंबर और आंसर-की के आधार पर कम नंबर मामलों की जांच नहीं करेगा. UPESSC ने इसकी वजह भी बताई है.
UPESSC ने कहा है कि विज्ञापन में OMR भरने की पूरी जानकारी दी गई थी. साथ ही बताया गया था कि OMR शीट में किसी भी तरह की गड़बड़ी का मूल्यांकन नहीं होगा. ऐसे में इस पर विचार नहीं किया जा सकता है.
वहीं नाॅर्मलाइजेशन से कम नंबर को लेकर UPESSC ने कहा है कि विज्ञापन में ही स्पष्ट किया गया कि एक से अधिक पाली में परीक्षा आयोजित होने पर नाॅर्मलाइजेशन लागू होगा, जो कठिनाई के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए वैज्ञानिक पद्वति पर आधारित है और एक सॉफ्टेवयर से किया गया था. ऐसे में नाॅर्मलाइजेशन से किसी को कम नंबर और किसी को अधिक नंबर मिलना स्वभाविक हैं. ऐसे में कम नंबर से जुड़े मामलों पर भी विचार नहीं किया जाएगा.

मनोज भट्ट
पत्रकारिता में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. नवोदय टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान में लंबे समय तक फील्ड रिपोर्टिंग. कई मुद्दों व खबरों को लीड किया, जो चर्चा में रही. अभी तक पंचायत, कृषि, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, राजनीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, चुनाव, बिजनेस से जुड़े विषयों पर काम किया है और इनमें लेखन की दिलचस्पी है.
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