Kursi Ka Countdown: बागपत शहर को पुराने समय में 'व्याघ्रप्रस्थ' के नाम से जाना जाता था. इसका अर्थ 'बाघों की भूमि' माना जाता है. कहा जाता है कि इस इलाके में कभी बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते थे, इसलिए इसका यह नाम पड़ा. हालांकि, बागपत नाम की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मान्यताएं भी हैं. आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…
एक मान्यता के अनुसार शहर का पुराना नाम 'व्याघ्रप्रस्थ' था, जबकि कुछ अन्य स्रोत इसके नाम को अलग-अलग पुराने शब्दों से जोड़ते हैं. समय के साथ इन नामों में बदलाव हुआ और शहर को बागपत या बाघपत कहा जाने लगा. 1857 के विद्रोह के बाद बागपत का महत्व बढ़ा और इसे तहसील मुख्यालय बनाया गया. शुरुआती दौर में यह एक छोटा शहर था, जहां एक स्थानीय मंडी प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करती थी. इस मंडी की स्थापना से जुड़ी मान्यता रुहेला सरदार नजीब खान के बेटे जाबिता खान से जुड़ी है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/24/up-election-2027-2026-09-24-14-11-03.png)
बागपत जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनमें छपरौली (50), बड़ौत (51) और बागपत (52) शामिल हैं. बागपत को लंबे समय से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी यहां अपनी स्थिति मजबूत की है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की तीनों सीटों पर जीत दर्ज की थी.
यह भी पढ़ें: UP Election 2027: लखनऊ की सियासी बिसात, जानें किन सीटों पर निर्भर है पार्टियों की किस्मत
छपरौली से अजय कुमार तोमर, बड़ौत से कृष्णपाल मलिक और बागपत से योगेश धामा विधायक चुने गए थे. आगामी चुनावों के लिए RLD के NDA में शामिल होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बागपत के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है. जिले में जाट मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जबकि मुस्लिम, त्यागी, ब्राह्मण और गुर्जर मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/24/up-election-2027-2026-09-24-14-11-18.png)
आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं, एक-एक सीट के बारे में...
1. छपरौली सीट
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बागपत जिले की छपरौली विधानसभा सीट (सीट संख्या-50) से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अजय कुमार ने 1,11,880 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्हें 53.30% वोट मिले, जबकि भाजपा के सहेंद्र सिंह रमाला 82,372 वोटों के साथ दूसरे और बसपा के साहिक 9,774 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. अजय कुमार ने सहेंद्र सिंह रमाला को 29,508 वोटों के अंतर से हराया था. इस चुनाव में RLD ने समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/24/up-election-2027-2026-09-24-14-11-32.png)
2. बड़ौत सीट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बागपत जिले की बड़ौत विधानसभा सीट (सीट संख्या-51) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ था. इस चुनाव में बीजेपी के कृष्णपाल मलिक ने 90,931 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि RLD के जयवीर सिंह तोमर को 90,616 वोट मिले. दोनों प्रत्याशियों के बीच महज 315 वोटों का अंतर रहा. वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के अंकित शर्मा 11,244 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. कृष्णपाल मलिक को 46.34 फीसदी, जयवीर सिंह तोमर को 46.18 फीसदी और अंकित शर्मा को 5.73 फीसदी वोट मिले.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/24/up-election-2027-2026-09-24-14-11-58.png)
3. बागपत सीट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बागपत जिले की बागपत विधानसभा सीट (सीट संख्या-52) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के योगेश धामा ने जीत दर्ज की थी. उन्हें कुल 1,01,420 वोट मिले, जबकि राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के मोहम्मद अहमद हमीद 94,687 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. दोनों के बीच 6,733 वोटों का अंतर रहा. वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के अरुण कसाना 12,863 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे. योगेश धामा को 47.50 फीसदी, मोहम्मद अहमद हमीद को 44.34 फीसदी और अरुण कसाना को 6.02 फीसदी वोट मिले थे.
अब आगे क्या होगा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बागपत जिले की बागपत, बड़ौत और छपरौली विधानसभा सीटों पर राजनीतिक समीकरण 2022 के मुकाबले बदल चुके हैं. 2022 में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल साथ थे, जबकि अब आरएलडी भाजपा के साथ गठबंधन में है और सपा-कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. बागपत सीट पर 2022 में भाजपा के योगेश धामा ने आरएलडी के मोहम्मद अहमद हमीद को हराया था, इसलिए 2027 में भाजपा और आरएलडी के बीच सीट बंटवारे को लेकर दावेदारी अहम होगी. बड़ौत में भी 2022 में भाजपा ने आरएलडी को महज 315 वोटों से हराया था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी-भाजपा गठबंधन को यहां बढ़त मिली थी, जिससे इस सीट पर गठबंधन के भीतर दावेदारी का सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है.
वहीं, छपरौली आरएलडी का पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र रहा है और 2022 में सपा-आरएलडी गठबंधन के उम्मीदवार अजय कुमार ने भाजपा के सहेन्द्र सिंह रमाला को हराया था. 2024 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी-भाजपा गठबंधन को छपरौली विधानसभा क्षेत्र में सपा से अधिक वोट मिले थे. ऐसे में 2027 में इन तीनों सीटों पर मुख्य राजनीतिक समीकरण भाजपा-आरएलडी गठबंधन और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच रहने की संभावना है, जबकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों और सीट बंटवारे के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.
यह भी पढ़ें: UP Election 2027: आगरा की 9 सीटों पर बिछी चुनावी बिसात...