July 17, 2026

UP ने मारी बाजी! पीएम सूर्य घर योजना के तहत देश में दूसरा सबसे बड़ा राज्य बना उत्तर प्रदेश| Navbharat Live

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सार

UP PM Surya Ghar Scheme: पीएम सूर्य घर योजना के तहत यूपी में 6.74 लाख से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। राज्य ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए देश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

UP wins the race! Uttar Pradesh becomes the second largest state in the country to receive solar energy under the PM Surya Ghar Yojana.

सीएम योगी ने यूपी में 2,283.8 मेगावाट घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता को विकसित किया (सोर्स-सोशल मीडिया)

विस्तार

UP Yogi Adityanath ON PM Surya Ghar Yojana: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना के मामले में उत्तर प्रदेश अब देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में अब तक 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में गुजरात पहले स्थान पर है।

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपी नेडा) के अनुसार, राज्य में 2,283.8 मेगावाट से अधिक घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित हो चुकी है। इससे लाखों परिवारों को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की सौर बिजली का लाभ मिल रहा है। योजना ने प्रदेश में सोलर उद्योग को भी नई गति दी है, जहां 7,000 से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं और 85,000 से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। सरकार का दावा है कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

2,283.8 मेगावाट सौर क्षमता विकसित

इस दौरान यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में घरेलू रूफटॉप सोलर के तेजी से विस्तार के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2,283.8 मेगावाट यानी 2.28 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इससे प्रदेश के लाखों घर अपनी छतों पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि रूफटॉप सोलर से उपभोक्ताओं की पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ उनके मासिक बिजली बिल में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

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प्रदेश के लाखों परिवारों को प्रतिदिन लगभग ₹6.5 करोड़ मूल्य की निःशुल्क सौर बिजली का लाभ प्राप्त हो रहा है। यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश को केवल बिजली उपभोग करने वाली व्यवस्था से आगे बढ़ाकर विशेष आर्थिक दिशा में ले जा रहा है, जहां उपभोक्ता स्वयं अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने में भी सक्षम हो रहे हैं।

85 हजार से अधिक लोगों को रोजगार

पीएम सूर्य घर योजना के व्यापक विस्तार ने उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सोलर इकोनॉमी इकोसिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश में सोलर सेक्टर से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां एवं व्यावसायिक इकाइयां सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से 85,000 से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से लेकर सर्वे, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, सेल्स, मार्केटिंग तथा ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस तक एक व्यापक रोजगार श्रृंखला विकसित हुई है। इससे विशेष रूप से युवाओं, तकनीकी पेशेवरों, इलेक्ट्रिशियन, इंजीनियरों, स्थानीय उद्यमियों और छोटे व्यवसायों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मिली नई रफ्तार

उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर की तेजी से बढ़ती मांग ने प्रदेश के सोलर मैन्युफैक्चरिंग एवं सप्लाई चेन इकोसिस्टम को भी नई गति प्रदान की है। सोलर मॉड्यूल एवं संबंधित उपकरणों के क्षेत्र में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और असेंबली लाइंस विकसित हुई हैं।

इसके साथ ही इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, मीटरिंग उपकरण, वेयरहाउसिंग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े व्यवसायों को भी नई मांग मिली है। इससे प्रदेश में सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह निवेश, औद्योगिक विकास, एमएसएमई विस्तार, स्थानीय उद्यमिता और ग्रीन जॉब्स को गति देने वाली एक नई आर्थिक शक्ति के रूप में उभरी है।

9,000 एकड़ भूमि की बचत का दावा

घरेलू रूफटॉप सोलर मॉडल की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बिजली उत्पादन के लिए अलग से बड़े भू भाग की आवश्यकता नहीं होती। घरों और भवनों की उपलब्ध छतों का उपयोग स्वच्छ बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। प्रदेश में विकसित रूफटॉप सोलर क्षमता को यदि समान क्षमता वाले बड़े ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से स्थापित किया जाता, तो इसके लिए बड़े भू-भाग की आवश्यकता होती।

रूफटॉप सोलर के विस्तार से अनुमानतः 9,000 एकड़ से अधिक अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता में बचत हुई है। इससे प्रदेश की बहुमूल्य भूमि को कृषि, आवास, औद्योगिक एवं अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए संरक्षित रखने में मदद मिल रही है।

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हर साल 27 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान

प्रदेश में स्थापित लगभग 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

अनुमानित सौर ऊर्जा उत्पादन और भारतीय विद्युत ग्रिड के उत्सर्जन कारकों के आधार पर, इस स्थापित क्षमता से सालाना लगभग 3.8 अरब यूनिट (3.8 बिलियन kWh) स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है।इससे जीवाश्म ईंधन आधारित पारंपरिक बिजली उत्पादन को प्रतिस्थापित कर प्रतिवर्ष अनुमानतः 27 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हो सकता है।

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