Published: Saturday, August 15, 2026, 18:59 [IST]
उत्तर प्रदेश में दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स की शुद्धता को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के निर्माण, स्टोरेज और बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। यानी दूध से बने असली प्रोडक्ट की जगह दूसरे फैट, प्रोटीन या अन्य गैर-दूध वाली चीजों से तैयार किए गए मिलते-जुलते उत्पादों को डेयरी प्रोडक्ट के नाम पर बेचने पर अब सख्ती होगी।
FSSAI के मुताबिक, किसी डेयरी प्रोडक्ट में दूध के मुख्य घटक यानी मिल्क फैट या मिल्क प्रोटीन की जगह गैर-दूध वाली चीजें, जैसे वेजिटेबल ऑयल, फैट या वेजिटेबल प्रोटीन डालकर ऐसा प्रोडक्ट बनाया जाता है, जो देखने या इस्तेमाल में दूध से बने प्रोडक्ट जैसा लगे, तो उसे एनालॉग डेयरी (dairy analogue) कहा जाता है।
किन डेयरी प्रोडक्ट्स पर गिरेगी गाज?
सरकार के इस कदम का फोकस उन उत्पादों पर है, जिन्हें असली डेयरी प्रोडक्ट जैसा दिखाकर बाजार में उतारा जाता है। दिए गए सरकारी आदेश के मुताबिक एनालॉग पनीर, एनालॉग क्रीम, एनालॉग घी, एनालॉग छेना और एनालॉग खोया जैसे उत्पाद कार्रवाई के दायरे में हैं। यहां एक बात साफ समझना जरूरी है।
हर वेजिटेबल फैट वाला खाद्य उत्पाद अपने आप नकली नहीं हो जाता। FSSAI के नियमों में डेयरी एनालॉग के लिए अलग पहचान और लेबलिंग का प्रावधान है। ऐसे उत्पादों को दूध या मिल्क प्रोडक्ट बताकर पेश नहीं किया जा सकता।
जांच में क्या-क्या मिलाने का आरोप?
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दूध से बने सामान की जांच के दौरान मिलावट को लेकर गंभीर बातें सामने आईं। दिए गए आदेश के मुताबिक कुछ सैंपल में रिफाइंड ऑयल, अलग-अलग फैट, सोयाबीन और उसके उत्पाद पाए गए।
इसके अलावा जांच में टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, हाइड्रोजन परॉक्साइड और अलग-अलग न्यूट्रिलाइजर जैसी चीजों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया गया है। यही वजह है कि मामला सिर्फ स्वाद या क्वालिटी का नहीं रह जाता। अगर किसी खाद्य प्रोडक्ट में ऐसे पदार्थ मिलाकर उसे दूध या डेयरी प्रोडक्ट के तौर पर बेचा जाता है, तो यह सीधे फूड सेफ्टी और कंज्यूमर हेल्थ का सवाल बन जाता है।
नियम तोड़ने पर क्या होगा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सिर्फ बिक्री रोकने की बात नहीं कही है। कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। अगर किसी डेयरी यूनिट में दूसरे फैट या सेहत के लिए नुकसानदेह केमिकल और मिलावट की पुष्टि होती है, तो वहां मौजूद दूध और दूध से बने सामान को जब्त कर नष्ट किया जा सकता है।
सरकार के आदेश में ऐसे मामलों में इमरजेंसी प्रोहिबिशन ऑर्डर के जरिए यूनिट का काम तुरंत रोकने की बात कही गई है। अगर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल संगठित तरीके से इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ BNS की धाराओं में FIR भी दर्ज की जा सकती है।
इसके साथ संबंधित ब्रांड की पूरे उत्तर प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है। नियमों के तहत उस फूड बिजनेस का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी तत्काल सस्पेंड किया जा सकता है।
बाहर के राज्य से आया प्रोडक्ट भी नहीं बचेगा
कार्रवाई सिर्फ यूपी में बनने वाले सामान तक सीमित नहीं रहेगी। अगर राज्य के बाहर तैयार किए गए किसी दूध या डेयरी प्रोडक्ट में हानिकारक केमिकल या दूसरे फैट की पुष्टि होती है, तो उस ब्रांड की उत्तर प्रदेश में बिक्री पर भी राज्यव्यापी रोक लगाई जा सकती है।
यानी सरकार का फोकस सिर्फ किसी एक दुकान या फैक्ट्री पर कार्रवाई करने से आगे है। मकसद यह है कि मिलावटी या गलत तरीके से डेयरी प्रोडक्ट के तौर पर बेचे जा रहे सामान की सप्लाई चेन पर चोट की जाए।
क्या अब हर 'Analogue Dairy Product' गैरकानूनी है?
यह फर्क समझना सबसे जरूरी है। FSSAI के नियम डेयरी एनालॉग की मौजूदगी को अलग कैटेगरी के तौर पर पहचानते हैं, लेकिन उसे दूध या मिल्क प्रोडक्ट बताकर बेचना अलग मामला है। ऐसे उत्पादों के लिए स्पष्ट लेबलिंग की जरूरत होती है। FSSAI ने यह भी साफ किया है कि डेयरी एनालॉग को दूध, मिल्क प्रोडक्ट या कंपोजिट मिल्क प्रोडक्ट नहीं माना जाता।
उत्तर प्रदेश का ताजा कदम ऐसे उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और बिक्री पर राज्य स्तर पर रोक के तौर पर सामने आया है। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा जो गैर-दूध वाली सामग्री से तैयार सामान को असली डेयरी आइटम के रूप में बाजार में बेचते हैं।
कंज्यूमर के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि पनीर, घी, खोया या दूसरे डेयरी सामान खरीदते वक्त पैकेट पर लेबल, FSSAI डिटेल और प्रोडक्ट की जानकारी जरूर देखें। सिर्फ रंग, स्वाद या कम कीमत देखकर किसी प्रोडक्ट को असली मान लेना सुरक्षित तरीका नहीं है।