नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को भारत आने के लिए दो बार इन्वाइट कर चुके है. लेकिन उन्होंने भारत आने के लिए एक ऐसी शर्त लगा दी है कि जो भारत कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता. मतलब ये कि वो नहीं आ रहे. और वो भी तब जब कि नरेंद्र मोदी ने संदेश भिजवाया है कि अगर वो भारत आते हैं तो ये उनके लिए यादगार यात्रा होगी.
आज बात करंगे कि उनके ना आने के पीछे क्या कारण है? क्या उनकी कोई मजबूरी है, या फिर वो इंडिया को ब्लैकमेल करना चाहते हैं. या इसके पीछे कोई तीसरा देश है. तीसरे देश की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्यूंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद वो सबसे पहले चीन गए थे. और तीस्ता नदी को ले कर एक ऐसा MOU साइन करके आए हैं जिस पर भारत को आपत्ति है.
लेकिन आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूं हमारी सबसे बड़ी समस्या क्या है. भारत में बैठ कर जब भी हम बांग्लादेश की बात करते हैं तो सबसे पहली बात हमें ध्यान आती है 1971 की. हमने बांग्लादेश को आजाद कराया था. हमने बांग्लादेश को सपोर्ट किया. इसलिए बांग्लादेश भारत का मित्र देश है. लेकिन फैक्ट ये है कि बांग्लादेश ऐसा नहीं सोचता. और ख़ासतौर से पिछले 2 साल में तो सब बदल गया.
इसको समझने के लिए हम लेटेस्ट Pew Research का सर्वे क्या कहता है ये देखते हैं. 2026 के इस सर्वे में सबसे बड़ी फाइंडिंग ये है कि अधिकतर बांग्लादेशी ये मानते हैं कि उन्हें सबसे बड़ा खतरा भारत से है. यानी, भारत एक दुश्मन देश है. दूसरी बड़ी फाइंडिंग ये है कि 51% बांग्लादेशी इंडिया को नापसंद करते है. सिर्फ़, 42% लोग ही भारत को पसंद करते हैं. जबकि 51% भारतीय या तो बांग्लादेश को पसंद करते हैं या उनकी बांग्लादेश के बारे में कोई भी राय नहीं है. अगर हम पाकिस्तान की बात करें तो 54% बांग्लादेशी पाकिस्तान को पसंद करते हैं. और हाँ ये हालत पिछले 2 साल में बहुत तेज़ी से बदले हैं, जबकि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरवादी काफ़ी तेजी से बड़े हैं. तो आज हालत ये है कि बांग्लादेश-पाकिस्तान भाई–भाई हैं और भारत उनका सबसे बड़ा दुश्मन.
इस ही कॉन्टेक्स्ट में हमे तारीक रहमान के डिसिशन को देखना होगा. लेकिन ये हालत पिछले 2 साल में कैसे बदले.
अनकवर्ड के आज के एपिसोड में हम बात करेंगे कि वो बांग्लादेश जिसे भारत ने पाकिस्तान से आजाद करवाया और जो तीन तरफ से भारत से ही घिरा हुआ है, आखिर कैसे इतनी अकड़ के साथ बात कर रहा है?
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में एक बगावत हुई, शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ. वो भारत की दोस्त थीं. भारत ने दोस्ती का फर्ज अदा किया. बगावत के बीच जब उन्हें जान का खतरा था तब भारत ने ढाका से निकालकर उन्हें शरण दी. वो तब से अब तक दिल्ली में रह रही हैं. तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की कमान भारत के घनघोर विरोधी मोहम्मद यूनुस के हाथ में आई. लेकिन जब चुनाव हुए तो बीएनपी के नेता तारिक रहमान बांग्लादेश के पीएम बने. उम्मीद थी की तारिक रहमान भारत-बांग्लादेश के बिगड़ते रिश्तों को सुधारने की कोशिश करेंगे. पीएम मोदी ने उन्हें दिल्ली आने का न्योता भी भेजा. लेकिन वो दिल्ली आने की बजाय चीन की यात्रा पर चले गए.
सितंबर में दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स की मीटिंग के लिए भी उन्हें न्योता भेजा गया. लेकिन वो भी कबूल नहीं किया गया. शर्त रखी गई कि भारत पहले शेख हसीना को बांग्लादेश भेजे. जहां उन्हें मौत की सजा सुना दी गई है. इसके अलावा बांग्लादेश की तरफ से तीस्ता नदी को लेकर भी भारत पर दबाव बनाया जा रहा है.
तीस्ता नदी के मसले पर तो चीन के नाम पर भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही है. तीस्ता नदी भारत से निकलकर बांग्लादेश जाती है. लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के बीच इस नदी को लेकर विवाद है.
तीस्ता नदी नॉर्थ सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिलों से गुजरती है. फिर बांग्लादेश के रंगपुर इलाके में जाती है. जहां ये नदी ब्रह्मपुत्र में मिलती है, और आखिर में गंगा यानी पद्मा और मेघना के साथ बंगाल की खाड़ी में गिरती है. तीस्ता नदी की कुल लंबाई करीब 414 किलोमीटर है. जिसमें से 305 कि.मी ये भारत में बहती है और 109 कि.मी बांग्लादेश में.
मॉनसून में तो इस नदी में भरपूर पानी होता है. लेकिन गर्मी में जब पानी कम होता है तो जलपाईगुड़ी में गाजोलडोबा बैराज से इसका पानी रोक लिया जाता है. और बांग्लादेश के रंगपुर डिविजन के 5-6 जिलों में पानी की कमी हो जाती है. 2011 में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार थी, तब डन देशों के बीच तीस्ता के पानी को ले कर एक समझौता लगभग तय हो गया था. इसमें भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% पानी मिलना था. बाकी 25% पानी नदी के बहाव के लिए छोड़ना था.
लेकिन उस वक्त पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि तीस्ता में पानी पहले से ही कम है. अगर नॉर्थ बंगाल का पानी बांग्लादेश को दे दिया गया तो जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, मालदा जैसे 5-6 जिलों की सिंचाई पूरी तरह बंद हो जाएगी. ममता के दबाव में तब की मनमोहन सिंह सरकार ने ये समझौता ठंडे बस्ते में डाल दिया.
अब बंगाल में ममता नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार है. इसलिए बांग्लादेश चाहता है कि भारत तीस्ता नदी को लेकर ऐसा समझौता करे जिसमें उसने भरपूर पानी मिल जाए. लेकिन बात अब सिर्फ पानी की नहीं है. अब इस नदी के पानी को ले कर चीन की भी एंट्री हो गई.
मॉनसून में इस नदी में भरपूर पानी होता है. बांग्लादेश चाहता है कि चीन इस पानी को स्टोर करने, इसकी सिल्ट को साफ करने और सिंचाई सुविधाएं तैयार करने के लिए उसकी मदद करे. इसको ले कर तारिक रहमान ने चीन के साथ एक MOU भी साइन कर लिया है. इसमें अरबों डॉलर का खर्च आएगा जो चीन बांग्लादेश को कर्ज के तौर पर देगा. भारत को ये परेशानी है की जहां काम होगा वो जगह भारत की चिकन नेक के बहुत क़रीब है.
चिकन नेक भारत का एक बहुत संकरा जमीनी रास्ता है. ये North East को बाक़ी राज्यों से जोड़ता है. इसके एक तरफ नेपाल है, दूसरी तरफ बांग्लादेश. उत्तर में भूटान और चीन की चुम्बी घाटी है. कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर ही है.
बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के पंचगढ़, नीलफामारी और लालमोनिरहाट जिले चिकेन नेक के क़रीब हैं. पंचगढ़ बांग्लादेश का सबसे उत्तरी जिला है. यहां से सिलीगुड़ी शहर और चिकन नेक का सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ कुछ किलोमीटर दूर है. नीलफामारी जिला पंचगढ़ के बगल में है. तीस्ता नदी का मुख्य बहाव यहीं से गुजरता है और बांग्लादेश ने अपना तीस्ता बैराज भी इसी जिले में बनाया है.
ऐसे में अगर चीन तीसता नदी में काम शुरू करता है तो चीनी विशेषज्ञ और आधुनिक मशीनें भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर और जलपाईगुड़ी सीमा के बहुत करीब आ जाएंगी. यहां से वो भारतीय सेना और मिसाइल की तैनाती पर आसानी से नजर रख सकते हैं. युद्ध की स्थिति में ये भारत के लिए एक ख़तरा पैदा कर सकता है.
बांग्लादेश भारत की इस सुरक्षा चिंता से वाकिफ है. इसीलिए वो चीन के साथ अपने ताल्लुक बढ़ा रहा है. वो भारत की इस मजबूरी का फ़ायदा उठाना चाहता है. वो चाहता है कि भारत के साथ नदियों पर उसके मनमाफिक समझौते हो सकें. तारिक रहमान ये भी चाहते हैं कि भारत दबाव में आकर शेख हसीना को बांग्लादेश भेज दे. ताकि वो अपने देश की कट्टरपंथी जमातों को संतुष्ट कर सके.
लेकिन बांग्लादेश के लिए ये इतना आसान भी नहीं है. बांग्लादेश की भी कई ऐसी मजबूरियां हैं जिनका समाधान सिर्फ भारत के ही हाथ में है. जल्द ही अनकवर्ड के एक और एपिसोड में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि कैसे भारत को ब्लैकमेल करना बांग्लादेश के लिए आसान नहीं है.
ढाका में शेख हसीना की जान बचाकर भारत ने पूरी दुनिया को ये मैसेज दिया था कि हम अपने दोस्तों का साथ मुश्किल वक्त में भी नहीं छोड़ते.