July 25, 2026

Twisha Sharma Death Case: रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने याचिका की खारिज - Haribhoomi

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट से राहत नहीं मिली। विशेष अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

Giribala Singh Bail

ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट से नहीं मिली राहत

  • Published: 25 Jul 2026, 07:04 PM IST
  • Last Updated: 25 Jul 2026, 07:04 PM IST

भोपाल। ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शनिवार शाम सुनाया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी सबसे पहले विशेष न्यायाधीश नीलम शुक्ला की अदालत में पेश की गई थी। हालांकि, उन्होंने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके बाद प्रकरण विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी गईं।

गिरिबाला ने उम्र और स्वास्थ्य का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत से मानवीय आधार पर जमानत देने की मांग की। अधिवक्ता ने कहा कि गिरिबाला सिंह की उम्र अधिक है और वे कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी लगभग 100 वर्षीय मां उनकी देखभाल पर निर्भर हैं और जेल में उन्हें पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके जेल में रहने के दौरान उनके घर में चोरी की घटना भी हुई। साथ ही, वे नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन प्राप्त करती हैं, इसलिए दहेज की मांग का आरोप स्वाभाविक नहीं माना जाना चाहिए।

CBI ने किया जमानत का कड़ा विरोध
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि केवल महिला होने या उम्र अधिक होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस मामले में मृतका भी एक महिला थी, इसलिए केवल लिंग के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा। CBI ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और आरोपी पर जांच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप हैं।

जांच प्रभावित करने के लगाए आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह पर मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप हैं। एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर CCTV तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क किया था। इसके अलावा CCTV फुटेज हासिल करने के लिए अपना निजी प्रतिनिधि भी भेजा था।

CBI ने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत मिलती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या जांच में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।

मेडिकल रिपोर्ट और जांच का भी दिया गया हवाला
अभियोजन ने अदालत में जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया कि गिरिबाला सिंह की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है। साथ ही यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट पहले ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है। जांच के दौरान उन्होंने वॉयस सैंपल देने से भी इनकार किया था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद विशेष अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अब मामले की आगे की सुनवाई और जांच तय प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।