August 26, 2026

Toxic: यश की दमदार एक्टिंग, लेकिन 'टॉक्सिक' वालों ने कर दी ये 5 बड़ी गलतियां, कहीं भारी न पड़ जाए!

Toxic: यश की दमदार एक्टिंग, लेकिन 'टॉक्सिक' वालों ने कर दी ये 5 बड़ी गलतियां, कहीं भारी न पड़ जाए!

टॉक्सिक में रह गईं ये कमियां!

Yash Toxic: कन्नड़ इंडस्ट्री से निकलकर पूरे भारत में अपनी धाक जमाने वाले ‘रॉकिंग स्टार’ यश जब भी स्क्रीन पर आते हैं, तब सीटियां और तालियां खुद-ब-खुद बजने लगती हैं. ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी के बवंडर के बाद यश की अगली फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर दर्शकों का क्रेज सातवें आसमान पर था. डायरेक्टर गीतू मोहनदास के साथ यश की ये जोड़ी सिनेमा के पर्दे पर कुछ नया और बेहद डार्क पेश करने के इरादे से उतरी है. थिएटर्स में यश की एंट्री पर फैंस ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है. एक्शन सीन्स में उनका स्वैग भी 100 में से 100 नंबर ले रहा है, लेकिन फिर भी थिएटर से निकलते वक्त कई दर्शकों के मन में एक ही बात आ रही है और वो ये है कि फिल्म अच्छी तो है, लेकिन अगर इन 5 चीजों पर थोड़ा और काम हो जाता, तो ये फिल्म बॉक्स ऑफिस के कई सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देती!

आइए जानते हैं वो 5 बड़ी बातें, जिन पर अगर सही से काम किया गया होता, तो ‘टॉक्सिक’ एक अलग ही मुकाम पर होती.

1. इमोशनल कनेक्ट का मिसिंग होना

‘केजीएफ’ सिर्फ गोलियों और कोयले की खदानों की कहानी नहीं थी, उसके पीछे ‘मां का वादा’ था जिसने आम दर्शक को रुला दिया था. ‘टॉक्सिक’ में स्टाइल, सिगार और स्लो-मोशन शॉट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन दिल को छू लेने वाला वो कोर इमोशन थोड़ा फीका पड़ गया. दर्शक हीरो के दर्द से उस तरह नहीं जुड़ पाए, जैसा एक मास-मसाला पैन-इंडिया फिल्म से उम्मीद की जाती है.

2. जरूरत से ज्यादा ‘डार्क’ और ए-रेटेड टोन

फिल्म की टैगलाइन ही थी ‘फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’. मेकर्स ने फिल्म को इंटरनेशनल लेवल का डार्क और हिंसक बनाया. लेकिन भारत में किसी फिल्म को 1000 करोड़ी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बनने के लिए फैमिली और बच्चों के फुटफॉल की जरूरत होती है. फिल्म का एक्सट्रीम वायलेंस और एडल्ट टोन सिंगल स्क्रीन के उस बड़े दर्शक वर्ग को पूरी तरह थिएटर्स तक नहीं खींच पाया, जो त्योहारों और छुट्टियों पर पूरे परिवार के साथ सिनेमा हॉल जाता है.

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3. बड़ी स्टारकास्ट, लेकिन आधा-अधूरा स्क्रीन टाइम

फिल्म में कियारा आडवाणी, नयनतारा और हुमा कुरैशी जैसे बड़े और टैलेंटेड नामों की फौज खड़ी की गई थी. कागजों पर यह कास्टिंग किसी सपने जैसी लगती है, लेकिन स्क्रीन पर कई किरदारों को अपनी पूरी ताकत दिखाने का मौका ही नहीं मिला. अगर इन किरदारों के बैकस्टोरी और टकराव को थोड़ा और तराशा जाता, तो स्क्रीन पर यश और उनके बीच की जंग देखने में दोगुना मजा आता.

4. स्टाइल भारी, लेकिन रफ्तार सुस्त

डायरेक्टर गीतू मोहनदास का विजुअल सेंस कमाल का है, फ्रेम-टू-फ्रेम हॉलीवुड लेवल की सिनेमैटोग्राफी नजर आती है. लेकिन विजुअल्स को खूबसूरत दिखाने के चक्कर में कई जगह फिल्म की रफ्तार बहुत धीमी हो गई. इंटरवल के बाद कुछ सीन्स ऐसे लगते हैं जहां कहानी आगे बढ़ने के बजाय सिर्फ यश के दो किरदारों के स्वैग और स्टाइल को बार-बार एस्टेब्लिश करने में वक्त बिताती है.

5. सीटीमार गाने का न होना

‘टॉक्सिक’ का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है, लेकिन इस फिल्म में वो एक ‘कल्ट’ मास एंथम या रोंगटे खड़े कर देने वाला कांतारा और केजीएफ जैसा थीम म्यूजिक गायब दिखा, जिसे सुनकर दर्शक थिएटर से बाहर निकलते ही अपनी रील्स बनाना शुरू कर दें या अपनी कॉलरट्यून सेट कर दें.

कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ यश के स्टारडम और उनकी रिस्क लेने की हिम्मत को तो साबित करती है, लेकिन अगर स्क्रिप्ट की इन कमजोर कड़ियों को कस दिया जाता, तो ये फिल्म सिर्फ एक हिट बनकर नहीं रहती, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर एक नया इतिहास रच देती.

सोनाली नाईक

सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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