आदिवासी की आड़.. फिर कांग्रेस का वार! भाजपा पर आरोपों की बौछार, Politics between BJP and Congress over tribal neglect
Modified Date: August 14, 2026 / 12:02 am IST
Published Date: August 13, 2026 11:40 pm IST
रायपुरः जिस पार्टी ने देश में राष्ट्रपति से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक जनजातीय वर्ग से बनाए हैं, उनके बारे में छग कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी राज में उनसे पाकिस्तानियों जैसा बर्ताव होता है। आरोप में कोई तथ्य है या सिर्फ जुमलेबाजी और श्रेय की होड़। कांग्रेस फिर आदिवासियों पर दर्ज केसेज के बहाने सरकार पर आरोप लगा रही है, तो बीजेपी उसे उसकी सरकार के दौर में क्या हुआ, इसका आईना दिखा रही है।
नक्सलवाद की समाप्ति के बाद श्रेय लेने की होड़ के बीच अक्सर आदिवासी हितैषी होने पर बहस छिड़ती रही है। एक बार फिर वैसी ही बहस प्रदेश के सियासी गलियारे में है। कांग्रेस का आरोप है कि भले ही बीजेपी सरकार के मुखिया आदिवासी हों लेकिन असल में बीजेपी आदिवासियों से नफरत करती है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का आरोप है कि प्रदेश में आदिवासियों के साथ अछूत और पाकिस्तानी जैसा बर्ताव किया जा रहा है। ना तो 9 अगस्त को विश्व आदिवासी मनाया गया, न बधाई दी गई तो वहीं पूर्व डिप्टी CM टीएस सिंहदेव ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि जब बड़े-बड़े नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। उनके लिए रेड कार्पेट बिछाए गए हैं तो फिर छोटे-छोटे मामलों में गिरफ्तार आदिवासियों की रिहाई क्यों नहीं हो पाई है। उन्हें भी राहत दी जानी चाहिए वर्ना ये फिर आक्रोश की वजह बनेगा और ऐसे में नक्सलवाद पनपने की आशंका है। जवाब दिया विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि, बीजेपी आदिवासियों से कितना प्रेम करती है सबके सामने है, इसलिए तो देश की राष्ट्रपति से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक आदिवासी बनाए हैं।
वैसे कांग्रेस पहले भी नक्सल सहयोग समेत कुछ अन्य मामलों में जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग करती आई है और बीजेपी साफ करती रही है कि ये कानूनी प्रक्रिया है जिसमें वक्त लगता है। सरकार के संज्ञान में है और ऐसे केसेज के निपटारे की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई सियासी लाभ ना होने के चलते उन्हें जानबूझकर भुला दिया गया है या फिर बार-बार ऐसे केसेज की याद दिलाकर आदिवासी हितैषी साबित किया जा रहा है?
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लेखक के बारे में
सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।
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