Tapti Jayanti 2026: आज ताप्ती जयंती के अवसर पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मां ताप्ती की पौराणिक कथा और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय। मान्यता है कि इससे शनि और सूर्य दोषों से राहत मिलती है।
Tapti Jayanti 2026
- Published: 20 Jul 2026, 09:02 AM IST
- Last Updated: 20 Jul 2026, 09:02 AM IST
सनातन परंपरा में नदियों को मां का दर्जा दिया गया है और उनकी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। आज आषाढ़ शुक्ल सप्तमी के अवसर पर ताप्ती जयंती मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ताप्ती सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और सूर्य दोष से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है।
ताप्ती जयंती का धार्मिक महत्व
ताप्ती नदी का उद्गम मध्य प्रदेश की सतपुड़ा पर्वतमाला से होता है और यह गुजरात के खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में ताप्ती नदी को पापों का नाश करने वाली और कल्याणकारी नदी बताया गया है। मान्यता है कि ताप्ती माता का स्मरण मात्र भी शुभ फल प्रदान करता है।
ताप्ती जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त
ताप्ती जयंती के दिन सूर्योदय से दोपहर तक पूजा करना शुभ माना गया है। अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक चूंकि आज सोमवार भी है, इसलिए भगवान शिव की पूजा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
ताप्ती जयंती पूजा विधि
- सुबह स्नान करें। यदि ताप्ती नदी में स्नान संभव न हो तो जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
- मां ताप्ती के चित्र या प्रतीक स्वरूप की पूजा करें।
- हल्दी, अक्षत, कुमकुम, पीले फूल और कपूर अर्पित करें।
- फल, हलवा और अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
- चुनरी अर्पित कर ताप्ती माता की कथा का पाठ करें।
- आरती के बाद दीपदान करें।
- घर के मुख्य द्वार या तुलसी के पास दीपक जलाएं।
मां ताप्ती की पौराणिक कथा
स्कंद पुराण के अनुसार, सूर्य देव का तेज इतना प्रचंड हो गया था कि धरती और देवलोक दोनों उसके प्रभाव से परेशान हो गए। तब सूर्य देव ने अपने ताप को शांत करने के लिए उसे एक पवित्र जलधारा के रूप में प्रवाहित किया। सूर्य के इसी ‘ताप’ से माता ताप्ती का जन्म हुआ और इसी कारण उनका नाम ‘तापी’ या ‘ताप्ती’ पड़ा।
ताप्ती जयंती पर क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ताप्ती माता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है। साथ ही शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और सूर्य ग्रह से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने की भी मान्यता है। श्रद्धालु इस दिन दान-पुण्य और नदी पूजन कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।