
सूर्य ग्रहण 2026Image Credit source: pexels
Surya Grahan Kab Lagega: द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. चूंकि ग्रहण का समय भारत में रात का है और यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. लेकिन जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई ही न दे, तो वहां ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों को उसी तरह लागू नहीं माना जाता. अगर आपके मन में भी आज के सूर्य ग्रहण और दान के नियमों को लेकर कोई उलझन है, तो आइए जानते हैं शास्त्र क्या कहते हैं और आज भारत में दान-पुण्य के क्या नियम लागू होंगे.
भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
इस बार का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ग्रहण रात के समय हो रहा है, इसलिए भारत के सभी हिस्सों में उस समय सूर्य अस्त हो चुका होगा. ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण के दौरान सूतक और पूजा-पाठ से जुड़े सामान्य ग्रहण नियम लागू नहीं होंगे. यानी भारत में इस ग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद करने या भोजन आदि से जुड़े विशेष प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी नहीं माना जाएगा.
सूर्य ग्रहण में दान कब करना चाहिए?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, जिस स्थान पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, वहां ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा है. मान्यता है कि ग्रहण के बाद स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा. इसलिए यहां ग्रहण के बाद स्नान और दान को लेकर कोई विशेष धार्मिक बाध्यता नहीं है. अगर कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करना चाहता है तो वह अपनी सुविधा के अनुसार कर सकता है.
ग्रहण के बाद किन चीजों का दान करें?
धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना गया है. विशेष रूप से सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करने की परंपरा बताई जाती है. इनमें गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन और लाल रंग के कपड़े जैसी चीजें शामिल हैं. इसके अलावा जरूरतमंद व्यक्ति को पका हुआ भोजन या राशन भी दिया जा सकता है.
क्या ग्रहण के दौरान दान कर सकते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भी दान करने की परंपरा कुछ स्थानों पर मिलती है, लेकिन ग्रहण समाप्त होने के बाद किया गया दान विशेष महत्व वाला माना जाता है. हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए यहां रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण के दौरान या बाद में दान करने करना उनके मन के ऊपर है.
भारत में सूतक काल लगेगा या नहीं?
सूतक काल को लेकर भी इस सूर्य ग्रहण के दौरान लोगों के बीच काफी चर्चा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सामान्य तौर पर ग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है, लेकिन इसका पालन ग्रहण दिखाई देने की स्थिति से जुड़ा होता है. क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि यहां रहने वाले लोगों को सूतक के कारण पूजा-पाठ, भोजन या दैनिक कामों में रोकने की जरूरत नहीं है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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