September 6, 2026

Success Story: सेना के लिए छोड़ी TCS की जॉब, सिपाही का बेटा आर्मी में बना अफसर; जीता OTA का सोर्ड ऑफ ऑनर

Sep 06, 2026 09:57 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Indian Army Success Story: एक सिपाही के बेटे पी. शशि कुमार ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में बेस्ट प्रदर्शन कर सोर्ड ऑफ ऑनर अपने नाम किया है। वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं।

Shashi Kumar Success Story:

पी शशिकुमार की सफलता की कहानी

P Shashi Kumar Indian Army Success Story: सफलता और सम्मान किसी की केवल कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प से ही हासिल किए जाते हैं। इस बात को सच साबित कर दिखाया है एक पूर्व सैनिक के होनहार बेटे पी. शशि कुमार ने। ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) की पासिंग आउट परेड में शशि कुमार ने न केवल भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट कमिशन हासिल किया, बल्कि अकादमी का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान सोर्ड ऑफ ऑनर जीतकर अपने परिवार और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

पिता का सपना और बचपन का जुनून

पी. शशि कुमार एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका नाता भारतीय सेना से बेहद गहरा रहा है। उनके पिता खुद भारतीय सेना में एक सिपाही के रूप में देश सेवा कर चुके हैं। बचपन से ही अपने पिता को सेना की वर्दी में देखने और उनके अनुशासन को महसूस करने के कारण शशि कुमार के मन में भी देश सेवा का जुनून सवार हो गया था। उनका एक ही सपना था कि वे अपने पिता से भी आगे बढ़कर एक दिन भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हों।

सेना के लिए छोड़ी TCS की जॉब

ग्रेजुएशन के बाद TCS की आरामदायक कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कुमार ने देश सेवा के अपने असली सपने को चुनकर सेना जॉइन की। ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में दी जाने वाली कठिन और अनुशासित सैन्य ट्रेनिंग के दौरान पी. शशि कुमार ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित की। चाहे वह फिजिकल फिटनेस हो, हथियार चलाने की कला, रणनीति बनाना हो या फिर नेतृत्व क्षमता - शशि कुमार हर क्षेत्र में अपने साथी कैडेटों से आगे रहे।

ट्रेनिंग के अंत में अकादमी द्वारा दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मान सोर्ड ऑफ ऑनर से उन्हें नवाजा गया। यह सम्मान केवल उसी कैडेट को मिलता है जो पूरी ट्रेनिंग अवधि के दौरान ओवरऑल प्रदर्शन में नंबर एक पर रहता है।

पासिंग आउट परेड में भावुक हुए माता-पिता

पासिंग आउट परेड के दौरान जब पासिंग आउट कैडेटों के कंधों पर उनके माता-पिता ने पीपिंग सेरेमनी के तहत अफसर के कंधों पर सितारे सजाए, तो शशि कुमार के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। एक सिपाही पिता के लिए अपने बेटे को उसी सेना में अपने से ऊंचे अधिकारी पद पर देखना जीवन का सबसे बड़ा और अनमोल पल था।

छात्रों के लिए प्रेरणा बनी यह कहानी

पी. शशि कुमार की यह ऐतिहासिक सफलता देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं और रक्षा सेवाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, आपकी पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, सही मार्गदर्शन और लगन से आप बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। लेफ्टिनेंट पी. शशि कुमार की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो एक सिपाही का बेटा भी अपने कंधे पर सितारे सजाकर सेना का नेतृत्व कर सकता है।

लेखक के बारे में

Prachi

शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

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प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

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प्राची का मानना है कि करियर चुनना केवल एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही दिशा में अपना भविष्य सुरक्षित करना है। उनका उद्देश्य है कि हर छात्र और अभ्यर्थी तक बिना किसी भ्रम के, सटीक और सही समय पर जानकारी पहुंचे। वे पारदर्शिता और विश्वसनीयता को डिजिटल पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।

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इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।

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