October 23, 2026

Success Story: पिता ने खींचा रिक्शा, बेटी ने गांवों तक पहुंचाई शिक्षा, अर्चना जायसवाल ने 7,650 बच्चों की बदली जिंदगी

Success Story: पिता ने खींचा रिक्शा, बेटी ने गांवों तक पहुंचाई शिक्षा, अर्चना जायसवाल ने 7,650 बच्चों की बदली जिंदगी

अर्चना जायसवाल ने 7,650 बच्चों की बदली जिंदगी Image Credit source: Linkedin/Archana Jaisal

कहते हैं कि मुश्किल हालात इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाते हैं. उत्तर प्रदेश की अर्चना जायसवाल की कहानी इसकी मिसाल है. आर्थिक तंगी के बीच पली-बढ़ीं अर्चना ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पढ़ाई पूरी की और ग्रामीण बच्चों को बेहतर एजुकेशन देने का संकल्प लिया. उन्होंने ‘शिक्षा साथी’ स्टार्टअप के जरिए गांवों में कम फीस पर पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई. आज उत्तर प्रदेश के छह जिलों में उनके लर्निंग सेंटर चल रहे हैं, जहां 7,650 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं. साथ ही, 740 से ज्यादा ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है.

पिता ने रिक्शा चलाकर पूरी की पढ़ाई

अर्चना जायसवाल की सफलता के पीछे उनके पिता जगदीश राम का संघर्ष भी शामिल है. गाजीपुर के रहने वाले जगदीश राम ने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली थी. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें महज 17 साल की उम्र में रिक्शा चलाना पड़ा. हालांकि, उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और मेहनत करके ग्रेजुएशन पूरा किया. बाद में उन्हें भारतीय रेलवे में नौकरी मिल गई. इसके बाद परिवार वाराणसी में रहने लगा.

बचपन में ही पिता का निधन

जगदीश राम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे. इसके लिए वह नौकरी के अलावा पेंटिंग और दूसरे छोटे-मोटे काम भी करते थे, लेकिन अर्चना के बचपन में ही पिता का निधन हो गया. परिवार में पांच बहनें और एक भाई थे. ऐसे में घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चुनौती बढ़ गई.

BHU से पढ़ाई के बाद आया नया विचार

परिवार की मुश्किलों के बावजूद अर्चना ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया. वह प्रोफेसर बनना चाहती थीं, लेकिन उचित गाइडेंस और संसाधनों की कमी के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो सका. पढ़ाई के बाद गांव जाने पर उन्होंने देखा कि सातवीं कक्षा के कई बच्चे बेसिक सवालों के जवाब भी नहीं दे पा रहे थे. उन्हें समझ आया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी कोचिंग की कमी और शहरों में पढ़ाई का खर्च बच्चों की शिक्षा में बड़ी बाधा है.

100 रुपये से शुरू की पढ़ाई, हजारों बच्चों को मिला लाभ

ग्रामीण बच्चों की परेशानी दूर करने के लिए अर्चना ने 2022 में ‘योर कोचिंग’ के नाम से शुरुआत की. 2023 में इसे ‘शिक्षा साथी’ के रूप में रजिस्टर कराया गया. इस पहल के तहत पहली से 12वीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूल के बाद पढ़ाया जाता है. फीस 100 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 600 रुपये तक है.

कम खर्च में क्वालिटी एजुकेशन

आज उत्तर प्रदेश के छह जिलों में शिक्षा साथी के लर्निंग सेंटर चल रहे हैं. यहां 7,650 से ज्यादा बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इसके अलावा, 740 से ज्यादा ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं को टीचर ट्रेनिंग देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. अर्चना की यह पहल कम खर्च में क्वालिटी एजुकेशन पहुंचाने के साथ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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