अमेरिकी सेना ने हवाई, समुद्री और अंतरिक्ष संसाधनों की मदद से कॉमर्शियल जहाजों को दी सुरक्षा; ईरान के एंटी-शिप मिसाइलों को भी किया निष्क्रिय
अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ में तेल ले जाने वाले जहाजों के एक बड़े काफिले को सुरक्षा प्रदान की।
- Published: 03 Sep 2026, 10:20 AM IST
- Last Updated: 03 Sep 2026, 10:20 AM IST
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को यहां एक बड़े एस्कॉर्ट ऑपरेशन को अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, करीब 40 वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजारा गया।
इन जहाजों के जरिए लगभग 18 मिलियन बैरल यानी करीब 1.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई। युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था।
जहाजों की सुरक्षा के लिए कई स्तर पर तैनाती
इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने सिर्फ नौसैनिक ताकत पर निर्भर नहीं किया। जहाजों की सुरक्षा के लिए हवाई, समुद्री और अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना का उद्देश्य एक तरफ कॉमर्शियल जहाजों को ड्रोन हमलों से बचाना था, वहीं दूसरी ओर ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना भी था, जिससे वह समुद्री यातायात को निशाना बना सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान ईरान की ओर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निष्क्रिय किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है इतनी नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।
इसी वजह से अमेरिका ने अपनी मौजूदा युद्ध रणनीति में इस समुद्री मार्ग को खास महत्व दिया है। अमेरिकी रणनीति में जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव शामिल है।
अमेरिका ने करीब 60 सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार केंद्र शामिल थे।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए अमेरिकी सेना आने वाले समय में भी इस इलाके में सैन्य कार्रवाई जारी रख सकती है।
ट्रंप बोले- अब जहाजों को नहीं देख सकता ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ताजा हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सिर्फ ईरानी रडार सिस्टम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने की ईरान की क्षमता को कम करना भी था। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के पास जहाजों को ट्रैक करने के लिए पहले जैसी रडार क्षमता नहीं बची है।
तेल बाजार पर बढ़ रहा दबाव
होर्मुज में लगातार बने सैन्य तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव है।
ऊर्जा कंपनियां सैन्य सुरक्षा मिलने के बावजूद इस रास्ते से जहाज भेजने को जोखिम भरा मान रही हैं। तेल की कीमतों में तेजी और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का नया रुख
इस बीच ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सामग्री को जमीन के अंदर ही छोड़कर सैटेलाइट के जरिए उसकी निगरानी की जा सकती है।
यह रुख उनके पहले के बयानों से कुछ अलग माना जा रहा है, जब उन्होंने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करना संघर्ष की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया था।
आगे भी जारी रह सकता है सैन्य दबाव
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से विकसित करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहा तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है।