October 3, 2026

Stock Market Crash: लगातार 8 हफ्ते से गिर रहा है बाजार, SIP बंद कर दें, चलाते रहें या और पैसा लगाएं? जानिए एक्सपर्ट की राय

Stock Market Crash: स्टॉक मार्केट की गिरावट रुकने का नाम नहीं ले रही है. हो सकता है कि आपका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो भी खतरे की घंटी भी बजा रहा हो और आप सोच रहे हों कि अपनी SIP जारी रखें, इसे कुछ समय के लिए रोक दें, या गिरावट का फायदा उठाने के लिए अपने फंड बढ़ाए. आज हम आपके लिए इसी सवाल का जवाब लेकर आए हैं, जिसमें InCred Money के CEO नितिन अग्रवाल की राय भी शामिल है. 

मार्केट में कितनी बड़ी गिरावट आई है?

Stock Market Crash NIFTY 50

Nifty 50 लगातार आठ हफ्तों से हर हफ्ते गिरावट के साथ बंद हो रहा है. ऐसा विदेशी इन्वेस्टर्स की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर चिंताओं के कारण हुआ है. गुरुवार, 1 अक्टूबर को Nifty 50 लगभग 198 पॉइंट्स या 0.88% गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ. सेंसेक्स लगभग 570 पॉइंट्स गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ. ट्रेडिंग के दौरान, निफ्टी 22,200 के करीब फिसल गया, और सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिर गया. खबर है कि इस इंट्राडे सेल-ऑफ से लगभग ₹8.7 लाख करोड़ का मार्केट कैपिटलाइजेशन खत्म हो गया, और इंडिया VIX 16% से ज्यादा उछल गया. VIX को आमतौर पर मार्केट का "डर का गेज" भी कहा जाता है. 

Stock Market Crash BSE SENSEX

निफ्टी अब जनवरी 2026 में अपने इंट्राडे रिकॉर्ड हाई 26,373.20 से लगभग 15% नीचे है. हालांकि इंडेक्स ऑफिशियली बेयर मार्केट में नहीं गया है, लेकिन अलग-अलग नतीजों में गिरावट बहुत ज्यादा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी 500 के 50% से ज्यादा स्टॉक अपने सबसे निचले लेवल से कम से कम 30% नीचे हैं. जब किसी म्यूचुअल फंड का NAV गिरता है, तो आपको एक तय रकम पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. इसे रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं, जो समय के साथ आपकी खरीदारी की एवरेज कीमत को बैलेंस करने में मदद करता है.

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InCred Money के CEO नितिन अग्रवाल की क्या राय है?

इस बारे में, नितिन अग्रवाल कहते हैं कि लगातार आठ हफ्तों की गिरावट किसी भी इन्वेस्टर के इन्वेस्टमेंट के नजरिए को परखती है. उनका मानना है कि मार्केट उन इन्वेस्टर्स को इनाम देता है जो अनिश्चितता के समय में डटे रहते हैं. मंदी के दौरान SIP को रोकने या बंद करने का मन करना आम बात है, लेकिन यह एक रिटेल इन्वेस्टर के लिए उल्टा फैसला हो सकता है. वह बताते हैं कि SIP में आपका पैसा डूबता नहीं है बल्क आप कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीद रहे हैं, जो SIP का असली उद्देश्य है. 

हालांकि, याद रखें कि रुपया-कॉस्ट एवरेजिंग रिटर्न की गारंटी नहीं देता है या नुकसान से नहीं बचाता है. लंबे समय तक मंदी के दौरान म्यूचुअल फंड की वैल्यू और गिर सकती है. इसलिए, चेक करें कि आपके इन्वेस्टमेंट आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से हैं या नहीं. अगर आपकी इनकम स्टेबल है, इमरजेंसी फंड काफी है, और इन्वेस्टमेंट का समय लंबा है, तो अपनी मौजूदा SIP जारी रखना सबसे अच्छा है. इससे आपको शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव के आधार पर फैसले लेने के बजाय डिसिप्लिन बनाए रखने में मदद मिलती है.

क्या आपको मंदी के दौरान अपनी SIP की रकम बढ़ानी चाहिए?

जिन लोगों की फाइनेंशियल हालत में कोई बदलाव नहीं हुआ है, उनके लिए अपनी मौजूदा SIP जारी रखना ठीक है. हालांकि रकम बढ़ाने का फैसला खुद ही लेना होगा. नितिन अग्रवाल के मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या आपको और इन्वेस्ट करना चाहिए. जिन लोगों के पास सरप्लस फंड, इमरजेंसी के लिए काफी फंड और 5 साल या उससे ज्यादा का इन्वेस्टमेंट का समय है, उनके लिए 8 हफ्ते की गिरावट कोई संकट नहीं बल्कि एंट्री का मौका हो सकता है, जिसे ज्यादातर लोग बाद में पहचानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मार्केट सीधी लाइन में नहीं चलता, और 8 हफ्ते की गिरावट का मतलब जरूरी नहीं कि 9वें हफ्ते भी गिरावट हो. उनकी सलाह है कि अपने इन्वेस्टमेंट बनाए रखें.

स्टॉक मार्केट क्यों गिर रहा है?

इस मार्केट में गिरावट के पीछे घरेलू और ग्लोबल दोनों वजहें हैं. पहली वजह US-ईरान टेंशन है. अनसुलझी डिप्लोमैटिक बातचीत की वजह से ग्लोबल मार्केट में लगातार अस्थिरता और वोलैटिलिटी बनी हुई है. दूसरी वजह विदेशी इन्वेस्टर्स का लगातार निकलना है. BSE के डेटा के मुताबिक, 2026 के पहले नौ महीनों में, विदेशी इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय स्टॉक मार्केट से लगभग ₹2.50 ट्रिलियन निकाले, जबकि घरेलू इन्वेस्टर्स (DIIs) ने इसी दौरान लगभग ₹6.28 ट्रिलियन इन्वेस्ट किए. रिपोर्ट्स बताती हैं कि विदेशी इन्वेस्टर्स ने सितंबर में एक्सचेंज के जरिए ₹45,536 करोड़ के शेयर बेचे, जिसमें से ₹20,128 करोड़ सिर्फ 2 इन्वेस्टर्स ने बेचे. इस तरह की निकासी से मार्केट सेंटिमेंट पर दबाव पड़ता है और जरूरी लार्ज-कैप रिकवरी के दौरान बिकवाली को बढ़ावा मिलता है.

तीसरा कारण US 10-साल का लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड है, जो लगभग 5.3% तक बढ़ गया है. इसने US में फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट को उभरते मार्केट्स की तुलना में ज्यादा आकर्षक बना दिया है. भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 96.50 के करीब फिसल गया है, और भारत का 10-साल का सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.1% को पार कर गया है. महंगाई के दबाव के बीच सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के खतरे को लेकर भी मार्केट चिंतित हैं. अक्टूबर की पॉलिसी मीटिंग में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीदों ने भी 1 अक्टूबर को सेलिंग प्रेशर को बढ़ाया.

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Disclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.