August 31, 2026

Staircase Vastu Rules: सीढ़ियों की सही दिशा बदल सकती है घर का माहौल, जानें वास्तु के नियम

Staircase Vastu Rules: सीढ़ियों की सही दिशा बदल सकती है घर का माहौल, जानें वास्तु के नियम

वास्तु टिप्सImage Credit source: pexels

Vastu Tips For Home: घर बनवाते समय अक्सर लोग कमरों, रसोई, पूजा घर और मुख्य दरवाजे की दिशा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सीढ़ियों की दिशा को नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों को भी घर की ऊर्जा और बनावट से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि सीढ़ियों का सही स्थान और दिशा घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद कर सकती है. अगर आप नया घर बनवा रहे हैं या पुराने मकान में सीढ़ियों का निर्माण कराने की योजना बना रहे हैं, तो वास्तु से जुड़े कुछ सामान्य नियमों की जानकारी होना उपयोगी हो सकता है.

घर में सीढ़ियों के लिए कौन-सी दिशा मानी जाती है शुभ?

वास्तु की मान्यताओं के अनुसार घर में सीढ़ियों के निर्माण के लिए दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा को बेहतर माना जाता है. इन दिशाओं में सीढ़ियां होने से घर की संरचना में संतुलन बनाए रखने की मान्यता है. दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण को वास्तु में भारी वस्तुओं के लिए सही माना जाता है. चूंकि सीढ़ियां भी घर की भारी संरचनाओं में शामिल होती हैं, इसलिए इस हिस्से को इनके लिए अच्छा माना जाता है.

उत्तर-पूर्व दिशा में सीढ़ियां बनाने से क्यों बचते हैं?

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को काफी महत्वपूर्ण माना गया है. इसे पूजा, ध्यान और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. इसी वजह से वास्तु की मान्यताओं में इस दिशा को खुला और हल्का रखने की सलाह दी जाती है. इसलिए घर की सीढ़ियों को उत्तर-पूर्व दिशा में बनाने से आमतौर पर बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि यहां भारी निर्माण होने से घर के ऊर्जा संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

सीढ़ियों की शुरुआत किस दिशा से हो?

वास्तु में सिर्फ सीढ़ियों की जगह ही नहीं, बल्कि उनके चढ़ने के क्रम को भी महत्व दिया जाता है. सामान्य वास्तु मान्यताओं के अनुसार सीढ़ियां ऐसी होनी चाहिए कि उन पर चढ़ते समय व्यक्ति पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़े. इसे वास्तु के हिसाब से सही माना गया है.

सीढ़ियों के नीचे क्या बनाना चाहिए?

सीढ़ियों के नीचे की खाली जगह का इस्तेमाल आजकल स्टोरेज, अलमारी या अन्य कामों के लिए किया जाता है. वास्तु की मान्यताओं के अनुसार इस स्थान को साफ-सुथरा और सही से रखना बेहतर माना जाता है. अगर वहां पूरी जगह हो तो यहां स्टोरेज बनाया जा सकता है, लेकिन सीढ़ियों के नीचे पूजा घर या मंदिर बनाने से वास्तु में आमतौर पर बचने की सलाह दी जाती है.

सीढ़ियों का मुंह किस तरफ होना चाहिए?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार सीढ़ियों का निर्माण इस तरह करना बेहतर माना जाता है कि चढ़ते समय दिशा दक्षिणावर्त रहे. यानी सीढ़ियां ऊपर जाते हुए दाईं ओर घूमती हुई आगे बढ़ें. ऐसा माना जाता है कि दक्षिणावर्त दिशा घर के लिए सकारात्मक मानी जाती है.

क्या सीढ़ियों की दिशा वाकई घर का माहौल बदलती है?

वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की दिशा और स्थान को घर की ऊर्जा से जोड़ा जाता है. दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में सीढ़ियां रखना तथा उत्तर-पूर्व को हल्का और खुला रखने की सलाह इसी मान्यता पर आधारित है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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