September 9, 2026

हाईकोर्ट ने देवरिया SP को फटकारा, कहा-अफसर ‘झूठों के झुंड’: अवैध हिरासत पर पूछा- दरोगा सस्पेंड क्यों नहीं हुआ? माफी मुझसे नहीं, उनसे मांगो - Prayagraj (Allahabad) News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को देवरिया एसपी अभिजीत आर. शंकर को कड़ी फटकार लगाई। मामला चार लोगों को 13 से 24 अप्रैल 2026 के बीच कथित तौर पर हिरासत में रखने का है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से 10 दिनों तक थाने में रखा।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गौरी बाजार थाने के CCTV कैमरों और संबंधित अवधि की फुटेज की जानकारी मांगी थी। बुधवार को एसपी और SHO ने बताया कि थाने का CCTV कैमरा खराब था और काम नहीं कर रहा था।

पुलिस अफसर की सफाई से जस्टिस अतुल श्रीधरन नाराज हो गए। कोर्ट ने पूछा- इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी SHO को सस्पेंड क्यों नहीं किया गया? माफी अदालत से नहीं, बल्कि हिरासत में रखे गए लोगों से मांगिए। सुनवाई के दौरान उन्होंने मौखिक टिप्पणी करते हुए पुलिस अफसरों को 'झूठों का झुंड' तक कह दिया।

10 दिन तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

10 दिन तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

पहले पूरा मामला समझिए-

देवरिया के गौरी बाजार थाना क्षेत्र के सुपारी गांव में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने कथित रूप से 4 लोगों को 10 दिन तक हिरासत में रखा था। इस मामले में चारों लोग कोर्ट में याचिका दाखिल की है। महेंद्र गौर और तीन अन्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें बिना कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा।

चारों ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। उनका कहना है कि 13 से 24 अप्रैल 2026 के बीच उन्हें अलग-अलग समय तक थाने में रखा गया। कुछ लोगों को करीब 10 दिन तक हिरासत में रखने का आरोप है।

मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ कर रही है। आरोपों की जांच के लिए हाईकोर्ट ने थाने के CCTV की फुटेज मांगी थी।

कोर्ट ने कहा कि- याचिकाकर्ताओं को SHO डॉ. महेंद्र कुमार की सैलरी से 65 हजार रुपए दिए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि- याचिकाकर्ताओं को SHO डॉ. महेंद्र कुमार की सैलरी से 65 हजार रुपए दिए जाएं।

CCTV खराब था, लेकिन थाने की डायरी में एंट्री तक नहीं हुई

2 सितंबर को राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि घटना से पहले ही थाने का CCTV खराब हो गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने देवरिया के एसपी और थाना प्रभारी (SHO) को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।

बुधवार को सुनवाई हुई। पीठ ने SHO डॉ. महेंद्र कुमार से पूछा- रिकॉर्डिंग कहां है? आप दो महीने से SHO थे। SHO ने बताया कि CCTV 12 अप्रैल 2026 को ही खराब हो गया था।

कोर्ट ने फिर पूछा कि कैमरा खराब होने की जानकारी थाने की डायरी में दर्ज की गई थी या नहीं। SHO ने कहा कि इसकी एंट्री नहीं की गई थी। एसपी अभिजीत आर. शंकर ने कोर्ट को बताया कि उन्हें CCTV खराब होने की जानकारी नहीं दी गई थी।

अप्रैल 2026 में देवरिया के गौरी बाजार SHO डॉ. महेंद्र कुमार थे। उन्होंने पप्पू यादव हत्याकांड के सिलसिले में सुपारी गांव के कुछ लोगों को हिरासत में लिया था।

अप्रैल 2026 में देवरिया के गौरी बाजार SHO डॉ. महेंद्र कुमार थे। उन्होंने पप्पू यादव हत्याकांड के सिलसिले में सुपारी गांव के कुछ लोगों को हिरासत में लिया था।

कोर्ट ने कहा- लोगों से माफी मांगिए

पीठ ने एसपी अभिजीत आर. शंकर से पूछा कि SHO के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। क्या उन्हें सस्पेंड किया गया या नौकरी से हटाया गया? एसपी ने इस पर कोर्ट से माफी मांगी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा, “कोर्ट से माफी मत मांगिए। उन लोगों से माफी मांगिए।”

जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि जिस थाना प्रभारी को सामान्य डायरी में जांच तक दर्ज करना नहीं आता, उसे सेवा में नहीं रहना चाहिए। ऐसा व्यक्ति सिपाही बनने के भी योग्य नहीं है।एसपी ने बताया कि थाना प्रभारी को अपराध शाखा भेज दिया गया है।

हालांकि, कोर्ट इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने पूछा कि अगर SHO दोषी पाए गए थे, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

CCTV के लिए मिले 46.46 लाख रुपए

कोर्ट ने 2 सितंबर के अपने आदेश का भी जिक्र किया। इसमें पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट ने CCTV को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने बताया कि देवरिया के थानों में CCTV लगाने के लिए राज्य सरकार ने 46.46 लाख रुपए जारी किए थे।

हालांकि, सरकारी हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि यह रकम कब जारी हुई थी। कोर्ट ने इस तारीख को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई की तारीख पर भी सवाल उठाया। एसपी की ओर से बताई गई कार्रवाई 14 अगस्त 2026 की थी। जबकि हाईकोर्ट का संबंधित आदेश 4 अगस्त को ही आ चुका था।

कोर्ट ने पहली नजर में कहा कि ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने और 4 अगस्त के आदेश के बाद ही जिला अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की।

काम पूरा नहीं हुआ, फिर भी पूरा भुगतान

बुधवार को कोर्ट ने CCTV लगाने वाली एजेंसी को किए गए भुगतान पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि जब CCTV का काम पूरा नहीं हुआ था, तो एजेंसी को पूरी रकम क्यों दी गई? कोर्ट ने कहा कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय पूरी रकम जारी कर दी गई। सिर्फ आश्वासन के आधार पर भुगतान कर दिया गया।

अवैध हिरासत के मामले में कोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता नंबर 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपए मिलेंगे। याचिकाकर्ता नंबर 1 को 5 हजार रुपए दिए जाएंगे। चारों को कुल 65 हजार रुपए का मुआवजा मिलेगा। यह रकम संबंधित SHO के वेतन से वसूली जाएगी।

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