Sun, 23 Aug 2026 05:30 PM IST
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 23 Aug 2026 05:30 PM IST
सार
सांप काटने के बाद मरीज को अक्सर जगाए रखने की सलाह दी जाती है, उसकी चेतना और सांस पर लगातार नजर रखना जरूरी है। मरीज को शांत रखें, चलने न दें, काटे अंग को स्थिर करें और तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। जख्म काटना, जहर चूसना और कसकर रस्सी बांधना नुकसानदायक हो सकता है।
बरसात के दिनों में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा तो बढ़ ही जाता है, साथ ही इन मौसम में देशभर में सांप काटने के मामले भी सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में हर साल लगभग 50 से 60 हजार लोगों की मौत सांप के काटने से हो जाती है। ये दुनियाभर में सांप के काटने से होने वाली कुल मौतों का लगभग आधा हिस्सा है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाजेशन की सांप के काटने से जुड़ी जानकारी जैसे विस्तृत पब्लिक हेल्थ स्टडीज से पता चलता है कि इनमें से ज्यादातर दुखद घटनाएं बारिश के मौसम में ग्रामीण खेती वाले इलाकों में होती हैं। खतरा तब और बढ़ जाता है जब लोग डॉक्टर से सही उपचार लेने की जगह घरेलू उपायों और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सांप के काटने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान कई बार जहर से नहीं, बल्कि घबराहट और गलत उपचार से हो सकता है। सांप काटने के बाद आसपास के लोग अक्सर जख्म को काटने, मुंह से जहर चूसने या कसकर कपड़ा बांधने जैसी गलतियां कर बैठते हैं। ये मरीज की स्थिति को और बिगाड़ देती है।
आपने भी अक्सर देखा होगा कि जिसे सांप काटा होता है, उसे जागते रहने को कहा जाता है आखिर इसका क्या कारण है?
सांप काटने के बाद की सावधानियां - फोटो : Adobe Stock Photo
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सांप के जहर का असर इस बात पर निर्भर करता है कि किस सांप ने काटा है, कितना जहर शरीर में गया है और शरीर का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हो रहा है?
कुछ सांपों का जहर तंत्रिकाओं और मांसपेशियों पर असर डाल सकता है। इससे पलकें झुकने, बोलने या निगलने में परेशानी और धीरे-धीरे सांस लेने वाली मांसपेशियों में कमजोरी जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में मरीज की चेतना और सांस पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
मरीज को जागते रहने की बात क्यों कही जाती है?
सांप काटने के बाद अक्सर मरीज को जगाए रखने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये सलाह इसलिए दी जाती है ताकि उसके शरीर में जहर के लक्षणों और होश की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सोने से यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि मरीज की स्थिति बिगड़ रही है या बेहोशी जहर के असर से आ रही है?
- कुछ जहरीले सांपों का जहर तंत्रिका तंत्र पर असर डालकर पलकें झुकने, बोलने या निगलने में परेशानी और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण पैदा कर सकता है।
- गंभीर मामलों में सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए मरीज की चेतना और सांस पर नजर रखना जरूरी है।
मरीज के सोते समय इन लक्षणों की सही से पहचान नहीं हो पाती है।
सांप काटने पर जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
सांप काटने के बाद क्या गलत न करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सांप काटने के बाद जख्म को ब्लेड से काटकर खून निकालना या मुंह से जहर चूसने को घरेलू उपाय माना जाता रहा है, पर ये गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
- कसकर बांधी गई पट्टी या रस्सी रक्त प्रवाह को रोक सकती है जिससे स्वस्थ ऊतकों को भी को नुकसान पहुंच सकता है।
- इसी तरह जहर चूसने की कोशिश मरीज और मदद करने वाले दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
- इसलिए किसी घरेलू नुस्खे में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
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सांप काटने पर इंजेक्शन - फोटो : Amarujala.com/AI
समय रहते लगवाएं एंटीवेनम
डॉक्टर कहते हैं, सांप के काटने के बाद सबसे जरूरी काम समय पर अस्पताल पहुंचना है। वहां एंटीवेनम यानी सांप के जहर के प्रभाव को रोकने के लिए दी जाने इंजेक्शन जान बचाने वाली हो सकती है। इसके साथ मरीज की सांस, ब्लड प्रेशर और दूसरे अंगों से जुड़ी समस्याओं पर भी नजर रखने की जरूरी हो जाता है।
समय रहते मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएं और एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।