July 13, 2026

राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को जारी किया नोटिस, SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 20 जुलाई को अगली सुनवाई - Haribhoomi

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को नोटिस भेजा है। कोर्ट ने SIT से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

Ram Temple donation theft Case

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को नोटिस भेजा है।

  • Published: 13 Jul 2026, 03:38 PM IST
  • Last Updated: 13 Jul 2026, 03:41 PM IST

Ram Temple donation theft case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों में कथित चोरी और अनियमितताओं का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। सोमवार, 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को भी जांच की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

20 जुलाई को अगली सुनवाई
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि SIT अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करेगी। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है। उस दिन याचिकाकर्ताओं की मांगों और SIT की जांच के निष्कर्षों पर विचार किया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर तीन मुख्य याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की गई है। याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मामले की CBI जांच कराने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) से ऑडिट कराने की मांग की है।

वहीं, RJD सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी याचिका में मंदिर ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने पर जोर दिया है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने भी इस मामले में एक निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

दान चोरी का खुलासा और SIT की कार्रवाई
मंदिर में दान के पैसों में हेरफेर का मामला जून के पहले सप्ताह में सामने आया था, जब दान की गिनती के दौरान अनियमितताएं पाई गई थीं। ट्रस्ट की सिफारिश पर यूपी सरकार ने SIT का गठन किया था, जिसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, IG किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। SIT को प्रथम दृष्टया गबन के सबूत मिले थे, जिसके बाद FIR दर्ज की गई थी।

SIT जांच में क्या आया सामने?
SIT की अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में दान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। SIT द्वारा खंगाले गए 45 दिनों के CCTV फुटेज में प्रक्रिया का बार-बार उल्लंघन पाया गया है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि काउंटिंग हॉल के अंदर नकदी की आवाजाही पर निगरानी बेहद कमजोर थी, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने चोरी को अंजाम दिया। SIT की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान कम से कम 70 बार चोरी की घटनाएं हुई थीं।

बता दें कि जांच से पहले ही कुछ कर्मचारियों के पास से लगभग ₹78.94 लाख और काउंटिंग रूम से सटे बाथरूम से ₹2.25 लाख की राशि बरामद की गई थी।