SIRTAR संस्थान में मंत्री के सामने फूटा अभिभावकों का गुस्सा: रोहतक में बोले- 3 साल से बच्चा आ रहा, कोई हुनर नहीं सिखाया - Rohtak News
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Rohtak SIRTAR Institute Controversy | Parents Complaint Minister Krishan Bedi
रोहतक17 घंटे पहले
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रोहतक की सिरतार संस्था में मंत्री कृष्ण बेदी को सम्मानित करते हुए।
रोहतक की राज्य पुनर्वास, प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (SIRTAR) के औचक निरीक्षण पर पहुंचे कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सामने ही अभिभावकों ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए। अभिभावकों ने कहा कि यहां बच्चे को कोई हुनर नहीं सिखाया जाता। तीन साल से बच्चा संस्था में आ रहा है, लेकिन कुछ नहीं करवाया जाता।
मंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे सेक्टर-4 निवासी सुदेश ने आरोप लगाया कि उसका बेटा मिलन पिछले तीन साल से संस्था में पढ़ रहा है। पहले बोलता भी था, लेकिन मां के गुजरने के बाद गले में दिक्कत हो गई। कान से बहरा हो गया, जिसके कारण मशीन लगानी पड़ रही है। लेकिन संस्था में बच्चे को कुछ खास सिखाया नहीं जाता।
कार्यक्रम में बच्चों को वर्दी देते हुए मंत्री कृष्ण बेदी।
मानव अधिकार आयोग में की शिकायत
अभिभावक सुदेश ने बताया कि संस्था में असुविधाओं को लेकर मानव अधिकार आयोग में शिकायत की थी, जिसके बाद संस्था ने टीचर लगाने की सहमति जताई, लेकिन टीचर नहीं लगाया। जब फाइल को री-ओपन करवाया तो संस्था ने स्पीच व म्यूजिक टीचर की वैकेंसी निकाली, लेकिन कोई टीचर नहीं लगाया।
प्रिंसिपल पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
अभिभावक सुदेश ने सिरतार संस्था के प्रिंसिपल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि बजट का 80 प्रतिशत वेतन में जाता है, जबकि 20 प्रतिशत बच्चों पर खर्च नहीं होता। हॉस्टल में बच्चों के खाने की गुणवत्ता चेक करने वाला भी कोई नहीं है। लड़कियों का हॉस्टल बंद कर दिया। लड़कों के हॉस्टल की हालत खराब है।
इस दौरान कार्यक्रम में डांस प्रस्तुतियां भी दी गईं।
मंत्रियों के आने पर सब चकाचक, हकीकत अलग
अभिभावक सुदेश ने बताया कि मंत्रियों के आने पर सबकुछ चकाचक नजर आता है, लेकिन हकीकत कुछ ओर है। कमिश्नर की तरफ से एक मैसेज आया कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारी कार्रवाई करेंगे, लेकिन वह नहीं कर रहे। क्योंकि दोनों आपस में दोस्त हैं।
अधिकारियों के साथ बैठकर करेंगे मंथन
मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि संस्था में सुविधाओं को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। जो कमियां हैं, उनको दूर करने का प्रयास किया जाएगा। जो बच्चे संस्था से एक उम्र के बाद बाहर निकलते हैं, उन्हें रोजगार कैसे मिले, इसको लेकर चर्चा की जाएगी। संस्था में वैकेंसी को लेकर भी बात की जाएगी। साथ ही बच्चों के अभिभावकों से भी मिलकर बात करेंगे।
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